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जोजिला दर्रे के पास हादसे की खबर मिलते ही प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया. हाईवे से बर्फ का मलबा हटाने का काम काफी तेजी से चल रहा है. भारी मशीनें लगातार रास्ता साफ करने में जुटी हुई हैं. यह 434 किलोमीटर लंबा हाईवे सामरिक रूप से बहुत ही अहम है. 11,575 फीट की ऊंचाई पर होने के कारण यहां सफर अक्सर खतरनाक रहता है.
हिमस्खलन के बाद राजमार्ग को बंद कर दिया गया है.
श्रीनगर. अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को जोजिला दर्रे के लद्दाख स्थित हिस्से में श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर भारी हिमस्खलन (Avalanche) हुआ, जिससे कई वाहन फंस गए. हालांकि, इस घटना में किसी के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है. अधिकारियों ने बताया कि हिमस्खलन शुक्रवार सुबह जोजिला दर्रे के लद्दाख स्थित हिस्से में हुआ. कई यात्री वाहन मलबे में फंस गए, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.
घटना के बाद राजमार्ग को बंद कर दिया गया है, जबकि मलबा हटाने और यातायात बहाल करने के लिए बचाव और सफाई अभियान शुरू किए गए हैं. वर्तमान में, श्रीनगर-लेह राजमार्ग (एनएच-1, पूर्व में एनएच-1डी) लद्दाख में श्रीनगर को लेह से जोड़ने वाली 434 किलोमीटर लंबी दो लेन वाली एक महत्वपूर्ण सड़क है. अपनी ऊंचाई और मनमोहक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध, यह राजमार्ग 11,575 फीट ऊंचे जोजिला दर्रे से होकर गुजरता है.
जोजिला दर्रे के ऊपर एक सुरंग का निर्माण किया जा रहा है. एक बार चालू हो जाने पर यह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और देश के शेष हिस्सों के बीच हर मौसम में सुरक्षित संपर्क प्रदान करेगी. निर्माणाधीन सुरंग जोजिला दर्रे के नीचे से गुजरेगी, जो जम्मू और कश्मीर के गांदरबल जिले के सोनमर्ग को लद्दाख के कारगिल जिले के द्रास से जोड़ेगी.
यह घोड़े की नाल के आकार की, एक सिंगल-ट्यूब, दो लेन वाली सड़क सुरंग है जिसकी चौड़ाई 9.5 मीटर, ऊंचाई 7.57 मीटर और लंबाई 14.2 किलोमीटर है, जो समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. पहले से ही चालू जेड-मोर सुरंग के साथ मिलकर, श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर स्थित यह भू-रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना लद्दाख क्षेत्र को पूरे वर्ष मौसम-प्रतिरोधी संपर्क प्रदान करेगी, पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी और भारतीय सशस्त्र बलों के लिए रसद व्यवस्था को मजबूत करेगी.
यह उन 31 सड़क सुरंगों में से एक है (जिनमें से 20 जम्मू और कश्मीर में और 11 लद्दाख में हैं) जिनका निर्माण कुल 1.4 लाख करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है. पूरा होने पर, यह एशिया की सबसे लंबी सुरंग बन जाएगी.





