सीतामढ़ी में ओलावृष्टि का कहर, गेहूं,सरसों से लेकर आम-लीची तक बर्बाद, जानें हाल

Date:


Last Updated:

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर रबी की मुख्य फसल गेहूं पर पड़ा है. इस समय गेहूं की फसल पककर तैयार थी और किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन तेज हवा और ओलों के प्रहार से खेतों में खड़ी फसल गिर गई. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसल के जमीन पर गिरने से बालियां टूट गई हैं, जिससे उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका है.

सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले में मंगलवार की देर शाम मौसम ने अचानक करवट ली और प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला. रात करीब 8:25 बजे तेज हवाओं के साथ अचानक ओलावृष्टि शुरू हो गई, जिसने कुछ ही देर में शहर से लेकर गांव तक पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया. 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं और भारी ओलों की बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया. स्थानीय लोगों के अनुसार, ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में जमीन सफेद दिखाई देने लगी. इस बेमौसम बदलाव ने जहां गर्मी से राहत की उम्मीद जगाई थी, वहीं अब लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें भी खींच दी हैं.

​गेहूं की फसल को सबसे अधिक चोट
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर रबी की मुख्य फसल गेहूं पर पड़ा है. इस समय गेहूं की फसल पककर तैयार थी और किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन तेज हवा और ओलों के प्रहार से खेतों में खड़ी फसल गिर गई. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसल के जमीन पर गिरने से बालियां टूट गई हैं, जिससे उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका है. साथ ही दानों के काले पड़ने या सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है. महीनों की मेहनत के बाद जब फसल कटने को तैयार थी, तब इस आपदा ने किसानों को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है.

​बागवानी और दलहन-तिलहन पर संकट के बादल
ओलावृष्टि का असर बागवानी पर भी पड़ा है. सीतामढ़ी आम और लीची उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन तेज हवाओं के कारण पेड़ों से मंजर और टिकोले बड़ी संख्या में गिर गए हैं. इससे इस साल फलों की पैदावार पर बुरा असर पड़ने की संभावना है. वहीं दलहन और तिलहन फसलें, खासकर सरसों, भी काफी नुकसान की चपेट में आई हैं. ओलों की मार से सरसों की फलियां फट गईं और दाने खेतों में बिखर गए. सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है, क्योंकि गोभी, टमाटर और बेल वाली सब्जियां लगभग नष्ट हो गई हैं.

​किसानों की बढ़ी चिंता
अचानक आई इस आपदा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कई गांवों में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. किसानों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में मौसम इसी तरह खराब रहा, तो बची हुई फसल भी नष्ट हो सकती है. अब पीड़ित किसान सरकार और जिला प्रशासन से मदद की उम्मीद लगाए हुए हैं. उनकी मांग है कि जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस आर्थिक संकट से उबर सकें.

About the Author

Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

हिडमा, देवजी, पापा राव के ‘मकड़जाल’ का अंत… जानें नक्सलवाद से कैसे मुक्त हुआ देश? – News18 हिंदी

होमवीडियोदेशNaxalwaad: हिडमा, देवजी, पापा राव के 'मकड़जाल' का...

Kerala Elections: केरल चुनाव में उतरे बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन, बिहार के 3 लाख लोगों के मन में भरा उत्साह

तिरुवनंतपुरम: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष...