रायबरेली: कहते हैं, सीखने और पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती. व्यक्ति जीवन भर कुछ न कुछ सीखता और पढ़ता रहता है. यह पंक्तियां रायबरेली के रहने वाले राजा राम मौर्य पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, क्योंकि उन्होंने जिंदगी के उस पड़ाव पर एक अनोखा काम कर दिखाया है, जिसे सुनकर आप भी उनकी प्रशंसा करेंगे.
पंजाब राज्य के मोगा शहर के रहने वाले हैं राजा राम मौर्य
दरअसल, राजा राम मौर्य मूल रूप से पंजाब राज्य के मोगा शहर के रहने वाले हैं. उनका जन्म 11 दिसंबर 1956 को मोगा में हुआ था. उनकी इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई एस.डी. हायर सेकेंडरी स्कूल, मोगा से हुई है. इसके बाद डीएम कॉलेज, मोगा से ग्रेजुएशन करने के उपरांत उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी, शिमला में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने हिंदी विषय में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की.
पाली भाषा में 86% अंक हासिल कर बनाया नया कीर्तिमान
इसके बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की. तैयारी के दौरान वर्ष 1980 में उनका चयन पंजाब नेशनल बैंक में क्लर्क-कम-कैशियर के पद पर हो गया. शिक्षित परिवार से होने के कारण उन्हें अपने पूर्वजों (सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य और महात्मा बुद्ध) के इतिहास को गहराई से जानने की हमेशा से जिज्ञासा रही है. यही जिज्ञासा उन्हें 70 वर्ष की उम्र में भी पढ़ाई के प्रति प्रेरित करती रही.
इसका नतीजा यह रहा कि उन्होंने इस उम्र में भी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित यूपी बोर्ड की परीक्षा में सफलता हासिल की. उन्होंने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि पाली भाषा विषय में 86% अंक प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया.
पूर्वजों के इतिहास को जानने की जिज्ञासा से की पढ़ाई
लोकल 18 से बातचीत करते हुए राजा राम मौर्य बताते हैं कि पाली भाषा से पढ़ाई करने के पीछे एक रोचक कहानी है. वे बताते हैं कि एक बार रायबरेली जिले के त्रिपुला चौराहे के समीप स्थित अशोक स्तंभ पर एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था. उसमें शामिल होने के लिए वे भी पहुंचे थे. वहां उन्होंने देखा कि स्तंभ पर उनके पूर्वजों (सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, महात्मा बुद्ध) के उपदेश पाली भाषा में लिखे हुए हैं, जिन्हें पढ़ना और समझना उनके लिए कठिन था.
पोते ने की पढ़ाई में मदद
यहीं से उनके मन में पाली भाषा सीखने की जिज्ञासा पैदा हुई. घर लौटकर उन्होंने अपने पोते अथर्व से पाली भाषा के बारे में जानकारी जुटाने को कहा. उनके पोते ने उन्हें ChatGPT और AI की मदद से पाली भाषा के नोट्स तैयार करके दिए. इसके बाद उन्होंने माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर जाकर परीक्षा की जानकारी प्राप्त की.
इसके बाद उन्होंने प्रतापगढ़ जनपद के राजकीय इंटर कॉलेज, काला काकर में कक्षा 10 में दाखिला लिया. पढ़ाई जारी रखते हुए वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा दी, जिसका परीक्षा केंद्र प्रतापगढ़ के जे.आई.सी. कॉलेज में बना था. गुरुवार को घोषित परिणाम में उन्होंने पाली भाषा में 86% अंक हासिल कर परीक्षा उत्तीर्ण की. यह खबर मिलते ही उनके और उनके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
उन्होंने आगे बताया कि वे पाली भाषा में इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई भी करना चाहते हैं. उनका कहना है कि उनकी इस सफलता में उनके पोते अथर्व का विशेष योगदान रहा है.
बैंक से सेवानिवृत्त हैं
राजा राम मौर्य बताते हैं कि उनका करियर पंजाब नेशनल बैंक से शुरू हुआ था. उन्होंने देश के कई राज्यों में सेवाएं दीं और अंत में उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले के गोमती नगर स्थित क्षेत्रीय स्टाफ कॉलेज से 31 दिसंबर 2016 को सेवानिवृत्त हुए.
वे बताते हैं कि उनके परिवार के सभी सदस्य शिक्षित हैं. उनके पांच बच्चे हैं, जिनमें चार बेटियां शिक्षक हैं, जबकि बेटा राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में सीनियर केमिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत है और बहू बेंगलुरु की एक निजी कंपनी में इंजीनियर है.


