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पाकिस्‍तान दलाली करने में रहा मस्‍त, ईरान ने भारत के साथ निभा दी दोस्‍ती – Iran India friendship Chabahar port golden bridge Pakistan china bypassed

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पाकिस्‍तान दलाली करने में रहा मस्‍त, इधर ईरान ने भारत के साथ निभा दी दोस्‍ती

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Chabahar Port News: भारत ईरान में चाबहार पोर्ट के एक हिस्‍से को डेवलप कर रहा है. अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद इसको लेकर गंभीर सवाल उठने लगे थे. अब ईरान ने एक बार फिर से रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण इस बंदरगाह पर स्थिति स्‍पष्‍ट की है. ईरानी दूतावास ने कहा कि चाबहार भारत-ईरान दोस्‍ती का गोल्‍डन ब्रिज है. चीन और पाकिस्‍तान इस फिराक में थे कि कैसे भारत को चाबहार से आउट हो जाए, पर ईरान ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया.

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ईरान ने चाबहार पोर्ट को भारत के साथ दोस्‍ती का गोल्‍डन ब्रिज बताया है. (फाइल फोटो/Reuters)

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कूटनीतिक उठापटक के बीच ईरान ने भारत के साथ अपने संबंधों को एक बार फिर मजबूती से दुनिया के सामने रखा है. भारत में ईरानी दूतावास ने चाबहार पोर्ट की तस्वीरें साझा करते हुए इसे ईरान-भारत मित्रता का ‘गोल्डन ब्रिज’ बताया. यह संदेश ऐसे समय आया है जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच संघर्षविराम के बाद वार्ता जारी है. ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर चाबहार पोर्ट की अहमियत को एक बार फिर से स्‍पष्‍ट किया है. पोस्ट में कहा गया कि यह बंदरगाह दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास का प्रतीक है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय तनाव कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रहे हैं. बता दें कि जंग शुरू होने के बाद अमेरिका और इजरायल की ओर से चाबहार पोर्ट सिटी पर एरियल अटैक किया था. हालांकि, इसमें पोर्ट को नुकसान नहीं हुआ था.

चीन और पाकिस्‍तान को चाबहार में भारत की मौजूदगी हमेशा से खटकती रही है. पाकिस्‍तान यहां भारत को कमजोर करने के लिए तमाम तरह की साजिशें रचीं, पर सफल नहीं रहा. वहीं, चीन बेल्‍ट एंड रोड कॉरिडोर प्रोजेक्‍ट के जरिये यहां अपनी पैठ बनाने का प्रयास कर रहा है, ऐसे में भारत इस क्षेत्र में बीजिंग के लिए बड़ा प्रतिद्वंद्वी बन गया है. स्‍वाभाविक है कि चीन को य‍ह बात बिल्‍कुल भी पसंद नहीं आ रहा है. दरअसल, हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों के संघर्ष के बाद दो सप्ताह का अस्थायी संघर्षविराम लागू किया गया है. इस समझौते में पाकिस्तान की भूमिका भी अहम बताई जा रही है, जिसका उद्देश्य तनाव कम करना, समुद्री मार्गों को फिर से खोलना और व्यापक बातचीत के लिए रास्ता तैयार करना है. हालांकि, इस सीजफायर की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है. लेबनान से जुड़ी झड़पें और समुद्री पहुंच को लेकर विवाद इस समझौते को लगातार चुनौती दे रहे हैं. इजरायल द्वारा लेबनान में जारी हमलों और संघर्षविराम पर अलग-अलग रुख ने कूटनीतिक प्रयासों को जटिल बना दिया है, जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा बना हुआ है. ऐसे संवेदनशील समय में चाबहार पोर्ट को प्रमुखता देकर ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत के साथ उसके आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते मजबूत बने रहेंगे.



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