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UPSC Story: सरहद पर आतंकियों को चटाई धूल, अब यूपीएससी में लहराया परचम, सुपरहिट है आर्मी मेजर की कहानी

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Major Nitish Kumar Singh UPSC Success Story: कश्मीर के शोपियां में आतंकियों से लोहा लेते हुए घायल हुए मेजर नीतीश कुमार सिंह (रिटायर्ड) ने यूपीएससी 2025 में 305वीं रैंक हासिल कर अपनी वीरता का लोहा मनवाया है. बेगूसराय के इस जांबाज की कहानी हार न मानने वाले जज्बे की सबसे बड़ी मिसाल है.

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Major Nitish Kumar Singh UPSC Story: मेजर नीतीश कुमार सिंह ने साबित कर दिया कि फौजी कभी रिटायर नहीं होते

नई दिल्ली (Major Nitish Kumar Singh UPSC Success Story). भारतीय सेना के शौर्य और अदम्य साहस की कहानियां अक्सर सरहदों तक ही सीमित रह जाती हैं. लेकिन मेजर नीतीश कुमार सिंह (रिटायर्ड) ने इसे एक कदम आगे बढ़ा दिया है. बिहार के बेगूसराय के रहने वाले और एनडीए के पूर्व छात्र मेजर नीतीश ने अपनी बहादुरी का परिचय केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में भी दिया है.

मेजर नीतीश कुमार सिंह साल 2017 में दक्षिण कश्मीर के शोपियां में एंटी-टेरर ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की गोलियों का सामना करते हुए गंभीर रूप से घायल हो गए थे. लेकिन शरीर पर लगे वो जख्म उनके इरादों को तोड़ नहीं सके. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 305 हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि एक फौजी कभी हारना नहीं सीखता. जानिए मेजर नीतीश कुमार सिंह (रिटायर्ड) ने यूपीएससी सीएसई 2025 में सफलता कैसे हासिल की. पढ़िए यूपीएससी सक्सेस स्टोरी.

भारतीय सेना का जांबाज संभालेगा प्रशासन की कमान

शोपियां के उस एनकाउंटर में मेजर नीतीश कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME) में तैनात थे. गंभीर चोटों के कारण उनकी सैन्य सेवाओं पर असर पड़ा, लेकिन देश सेवा का जज्बा उनके खून में था. सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने हार मानकर बैठने के बजाय खुद को फिर से तैयार किया और किताबों को अपना हथियार बनाया. अब वे मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग के लिए जाने को तैयार हैं.

मैदान-ए-जंग में दिखाई थी बहादुरी

मेजर नीतीश कुमार सिंह का सैन्य करियर वीरता से भरा रहा है. साल 2017 में शोपियां में हुए उस ऑपरेशन को याद कर आज भी उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं. आतंकियों के साथ मुठभेड़ में मेजर नीतीश कुमार सिंह ने अपनी जान की परवाह किए बिना मोर्चा संभाला था. इस दौरान वे बुरी तरह घायल हुए, जिसके बाद उन्हें लंबे इलाज और रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा. उनके इसी अदम्य साहस के लिए उन्हें सेना के प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया.

जख्मों से मजबूत थे इरादे

बिहार के बेगूसराय की मिट्टी ने देश को कई योद्धा दिए हैं और नीतीश उनमें से एक हैं. सेना से मेडिकल आधार पर बाहर आने के बाद उनके सामने जीवन की नई चुनौती थी. उन्होंने तय किया कि अगर वे सरहद पर बंदूक लेकर देश की रक्षा नहीं कर सकते तो वे कलम उठाकर सिस्टम के अंदर से समाज की सेवा करेंगे. उन्होंने अपनी शारीरिक सीमाओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और कड़ी मेहनत से यूपीएससी की तैयारी शुरू की.

जज्बे की ऐतिहासिक जीत

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी किसी तपस्या से कम नहीं होती. उस पर भी घायल शरीर के साथ मानसिक एकाग्रता बनाए रखना उनके लिए और भी मुश्किल था. लेकिन मेजर नीतीश ने हार नहीं मानी. उन्होंने यूपीएससी सीएसई 2025 में 305वीं रैंक हासिल कर उन सभी युवाओं के लिए मिसाल कायम की है जो छोटी-छोटी बाधाओं से टूट जाते हैं. उनकी यह जीत केवल रैंक नहीं, बल्कि उस फौजी जज्बे की जीत है जो कहता है कि ‘युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ.’

नीतीश कुमार सिंह जल्द ही मसूरी (LBSNAA) में अपनी ट्रेनिंग शुरू करेंगे. उनकी कहानी देश के हर उस उम्मीदवार के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों में अपना रास्ता बनाने की कोशिश कर रहा है.

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Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें



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