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जेष्ठ महीने में क्यों होती है हनुमान जी की विशेष पूजा, क्या है महत्व? हनुमानगढ़ी के महंत से जाने

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धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ माह तप, त्याग और सेवा का प्रतीक है इस दौरान पड़ने वाली भीषण गर्मी में सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है. यही कारण है कि बड़ा मंगल के अवसर पर जगह-जगह भंडारे, प्याऊ (ठंडे पानी की व्यवस्था), शरबत वितरण और गरीबों को भोजन कराने की परंपरा देखने को मिलती है. यह न केवल भक्ति का रूप है बल्कि समाज सेवा का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो हनुमान जी के जीवन मूल्यों को दर्शाता है . साल 2026 में इस पवित्र महीने की शुरुआत 2 मई से हो रही है जो 29 जून तक चलेगा.

अयोध्या: ज्येष्ठ महीने में हनुमान जी की विशेष पूजा का गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. खासतौर पर इस माह के प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है. जो उत्तर भारत में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित होता है. मान्यता है कि इसी ज्येष्ठ महीने में प्रभु श्री राम और हनुमान जी की पहली भेंट हुई थी. जिसके बाद हनुमान जी ने अपने जीवन को पूर्णत प्रभु राम की सेवा में समर्पित कर दिया. यही वजह है कि जब प्रभु राम अपने परमधाम को जाने लगे तो हनुमान जी महाराज को अयोध्या का राजा बना दिया यानी कि इस कलयुग में हनुमान जी महाराज राजा के रूप में अयोध्या में विराजमान है.

त्याग और सेवा का है प्रतीक

धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ माह तप, त्याग और सेवा का प्रतीक है इस दौरान पड़ने वाली भीषण गर्मी में सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है. यही कारण है कि बड़ा मंगल के अवसर पर जगह-जगह भंडारे, प्याऊ (ठंडे पानी की व्यवस्था), शरबत वितरण और गरीबों को भोजन कराने की परंपरा देखने को मिलती है. यह न केवल भक्ति का रूप है बल्कि समाज सेवा का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो हनुमान जी के जीवन मूल्यों को दर्शाता है . साल 2026 में इस पवित्र महीने की शुरुआत 2 मई से हो रही है जो 29 जून तक चलेगा.

इस माह में हनुमान की पूजा होती है फलदायनी

अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी के महंत के अनुसार ज्येष्ठ महीने में हनुमान जी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है. इस समय श्रद्धा से की गई आराधना से भक्तों के जीवन के संकट, भय और बाधाएं दूर होती हैं. विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष या शनि दोष होता है. उन्हें बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए. इससे ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी को अजर-अमर और संकटमोचक कहा गया है.ज्येष्ठ माह में उनकी उपासना करने से मानसिक शांति आत्मबल और साहस में वृद्धि होती है.भक्त इस दौरान हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ और राम नाम का जप करते हैं, जिससे आध्यात्मिक उन्नति होती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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