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आज के समय में बाजार में मिलने वाले फलों को जल्दी पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल आम हो गया है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में आज भी लोग प्राकृतिक तरीकों पर भरोसा करते हैं. यहां फल पकाने के लिए प्याज़ का उपयोग किया जाता है, जो एक आसान, सस्ता और पूरी तरह केमिकल-फ्री तरीका है. यह पारंपरिक विधि न सिर्फ फलों का स्वाद बनाए रखती है, बल्कि सेहत के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है.
आजकल बाजार में मिलने वाले फल जल्दी पकाने के लिए कई तरह के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे फल देखने में तो अच्छे लगते हैं लेकिन सेहत के लिए उतने सही नहीं होते. लेकिन पहाड़ों में आज भी लोग पुराने और पहाड़ी तरीकों पर भरोसा करते हैं. यहां फल पकाने के लिए किसी दवाई या केमिकल का नहीं, बल्कि एक बहुत ही साधारण चीज, प्याज़ का इस्तेमाल किया जाता है.

यह तरीका बहुत ही आसान और दिलचस्प है. जब फल जैसे केले या आम पूरी तरह से नहीं पके होते, तो उन्हें एक बंद जगह में रखा जाता है जैसे टोकरी, बोरी या किसी डिब्बे में. उसके साथ कुछ प्याज़ रख दिए जाते हैं और फिर उसे ढक दिया जाता है. 1-2 दिन के अंदर ही फल धीरे-धीरे पकने लगते हैं. यह तरीका खासकर केले पकाने के लिए ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.

पहाड़ी लोग प्रकृति के बहुत करीब रहते हैं, इसलिए वे कोशिश करते हैं कि खाने-पीने की चीजें पूरी तरह प्राकृतिक ही रहें. केमिकल से पकाए गए फल जल्दी खराब भी हो जाते हैं और उनमें असली स्वाद भी नहीं होता. इसके अलावा, ये सेहत पर भी बुरा असर डाल सकते हैं. इसलिए पहाड़ों में लोग ऐसे किसी भी तरीके से बचते हैं और घरेलू उपाय अपनाते हैं.
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यह पूरी तरह से प्राकृतिक है इसमे किसी भी प्रकार का कोई केमिकल नहीं होता. इससे फल का असली स्वाद बना रहता है. यह सेहत के लिए भी सुरक्षित है इससे शरीर पर कोई बुरा असर नहीं होता है, और यह सबसे आसान और सस्ता तरीका है, हर घर में प्याज़ आसानी से मिल जाता है. ये पर्यावरण के अनुकूल भी है जो प्रकृति को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.

पहाड़ों के लोग हमें सिखाते हैं कि कैसे हम छोटी-छोटी चीजों से बड़े काम कर सकते हैं. जहां शहरों में लोग जल्दी के चक्कर में केमिकल का सहारा लेते हैं, वहीं पहाड़ों में लोग धैर्य और प्राकृतिक तरीकों को अपनाते हैं. यह तरीका सिर्फ फल पकाने का नहीं, बल्कि एक सोच को दिखाता है, प्रकृति के साथ मिलकर चलने की सोच.

यह पहाड़ी तरीका खासकर केले, आम, पपीता और नाशपाती जैसे फलों के लिए बहुत अच्छा काम करता है. इन फलों में प्राकृतिक रूप से पकने की क्षमता ज्यादा होती है, इसलिए प्याज़ की मदद से ये आसानी से और समान रूप से पक जाते हैं.

प्याज़ में एक तरह की प्राकृतिक गर्माहट और गैस (एथिलीन जैसे प्रभाव) होती है, जो फलों को जल्दी पकने में मदद करती है. जब प्याज़ और फल को एक साथ बंद जगह में रखा जाता है, तो यह गर्माहट अंदर ही बनी रहती है और फल धीरे-धीरे पक जाते हैं. यह पूरी प्रक्रिया बिल्कुल नैचुरल होती है और इसमें किसी तरह का नुकसान नहीं होता.

इस तरीके से फल आमतौर पर 1 से 3 दिन के अंदर पक जाते हैं. समय इस बात पर निर्भर करता है कि फल कितना कच्चा है और मौसम कैसा है. गर्म मौसम में फल जल्दी पकते हैं, जबकि ठंड में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है.


