Last Updated:
Goshala Summer Care: भीषण गर्मी के बीच गोशालाओं में गौवंश की देखभाल के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं. कूलर, पंखे और शेड की व्यवस्था से तापमान नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे पशुओं को लू से बचाया जा सके. इसके साथ ही पौष्टिक और हल्की स्पेशल डाइट दी जा रही है, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे. पशुपालक और संस्थाएं मिलकर इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. इन व्यवस्थाओं से गौवंश को राहत मिल रही है और उनकी उत्पादकता पर भी सकारात्मक असर पड़ रहा है, जो पशु कल्याण की दिशा में एक सराहनीय पहल है.
बीकानेर. मरुस्थलीय क्षेत्र राजस्थान में इन दिनों गर्मी अपने चरम पर है. आसमान से बरसती आग ने आमजन के साथ-साथ बेजुबान पशुओं का भी जीना मुश्किल कर दिया है. जहां इंसान गर्मी से बचने के लिए तरह-तरह के उपाय कर लेता है, वहीं पशु पूरी तरह दूसरों पर निर्भर होते हैं. ऐसे में बीकानेर की गोशालाओं में गौवंश को राहत देने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, जो किसी ‘वीआईपी व्यवस्था’ से कम नहीं हैं.
बीकानेर संभाग प्रदेश के सबसे गर्म इलाकों में गिना जाता है, जहां तापमान अक्सर 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है. इस भीषण गर्मी का सीधा असर दुधारू पशुओं पर देखने को मिल रहा है. गर्मी के कारण न केवल पशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि दूध उत्पादन में भी भारी गिरावट दर्ज की जा रही है. इस स्थिति को देखते हुए गोशाला संचालकों ने समय रहते विशेष तैयारियां शुरू कर दी थीं.
शहर की लक्ष्मीनाथ मंदिर गौशाला में गर्मी से बचाव के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. यहां लगभग एक हजार से अधिक गौवंश की देखभाल की जा रही है.
पशुओं के लिए पंखों की व्यवस्था की
गोशाला के मुनीम मगनलाल ने बताया कि गर्मी को देखते हुए करीब डेढ़ माह पहले ही कूलर और पंखों की व्यवस्था कर दी गई थी. वर्तमान में गोशाला में करीब 20 कूलर और 100 से अधिक पंखे लगाए गए हैं. कमजोर गायों और छोटे बछड़ों के लिए विशेष रूप से कूलर लगाए गए हैं, जबकि अन्य पशुओं के लिए पंखों की व्यवस्था की गई है.
सुबह और शाम गौवंश को खिलाया जाता
सिर्फ ठंडक ही नहीं, बल्कि गायों के खानपान में भी खास बदलाव किया गया है. गर्मी से राहत देने के लिए गायों को विशेष ‘समर डाइट’ दी जा रही है. इसमें गुड़ का शरबत और पौष्टिक लड्डू शामिल हैं. ये लड्डू खल, मंगचुरी, चापट और गुड़ के मिश्रण से तैयार किए जाते हैं, जो पशुओं के शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ ऊर्जा भी प्रदान करते हैं. गोशाला में रोजाना 50 से 60 कार्टन ऐसे लड्डू मंगवाए जा रहे हैं, जिन्हें सुबह और शाम गौवंश को खिलाया जाता है.
इसके अलावा, गोशाला में स्वच्छ पेयजल और हरे चारे की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है. शाम के समय विशेष रूप से गुड़ का शरबत तैयार कर गायों को पिलाया जाता है, जिससे उन्हें गर्मी से राहत मिल सके. बावजूद इसके, अत्यधिक तापमान का असर पूरी तरह से टालना संभव नहीं हो पा रहा है.
40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई
गर्मी के कारण गायों की भूख में कमी आई है और वे सामान्य मात्रा में चारा नहीं खा पा रही हैं. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ा है. जहां सामान्य दिनों में एक गाय 10 लीटर तक दूध देती थी, वहीं अब यह उत्पादन घटकर 5 से 6 लीटर रह गया है. यानी करीब 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है.
About the Author
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें


