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बलिया के सागरपाली का 130 साल पुराना श्री राम जानकी मंदिर, चमत्कारों की नई मिसाल, बोलने लगा था गूंगा

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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मनोज कुमार सिंह ने कहा कि, यह प्राचीन मंदिर लगभग 130 साल से भी अधिक पुराना है, जो एक बार फिर अपनी भव्यता के साथ खड़ा हुआ है. लेकिन इसकी कहानी न केवल इतिहास तक सिमट कर रह गई है, बल्कि यह आस्था, चमत्कार और लोगों की एक जुटता की मिसाल भी पेश कर रहा है. बताया यह भी जाता है कि, इस मंदिर की स्थापना गांव के ही महान विद्वान पंडित लक्ष्मी नारायण ने की थी.

बलिया: देश दुनिया में अनगिनत मंदिर अपनी चमत्कारी कहानियों और मान्यताओं को लेकर बेहद प्रसिद्ध है. इसी कड़ी में अगर बात उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद की करें, तो यहां भी एक बेहद प्राचीन मंदिर है, जो अपने आप में कई रहस्यमयी कहानियां को समेटे हुए खड़ा है. बताया जाता है कि यहां गूंगा भी बोलने लगा था. बलिया के फेफना थाना क्षेत्र अंतर्गत सागरपाली बघेजी में स्थित श्री राम जानकी मंदिर अपने आप में ऐतिहासिक, धार्मिक, चमत्कारी और आश्चर्यजनक भी है.

130 साल पुराना मंदिर भव्यता के साथ खड़ा है

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मनोज कुमार सिंह ने कहा कि, यह प्राचीन मंदिर लगभग 130 साल से भी अधिक पुराना है, जो एक बार फिर अपनी भव्यता के साथ खड़ा हुआ है. लेकिन इसकी कहानी न केवल इतिहास तक सिमट कर रह गई है, बल्कि यह आस्था, चमत्कार और लोगों की एक जुटता की मिसाल भी पेश कर रहा है. बताया यह भी जाता है कि, इस मंदिर की स्थापना गांव के ही महान विद्वान पंडित लक्ष्मी नारायण ने की थी. समय बदलता गया और मंदिर ने कई उतार चढ़ाव भी देखे, लेकिन संकट ज्यादा तब आया, जब सागरपाली-बैरिया मार्ग के का निर्माण होने लगा. जी हां इस दौरान, मंदिर में दरारें पड़ गई और उसका लगभग आधा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने लगा. लेकिन गांव वालों की श्रद्धा अभी भी डगमगाई नहीं थी.

सभी ने मिलकर कराया तैयार

सभी ने मिलकर करीब 3 वर्षों की मेहनत से मंदिर का विधिवत यज्ञ कराकर पुनर्निर्माण कराया है. आज मंदिर का ढांचा बदल चुका है, लेकिन यहां स्थापित मूर्तियां वही चमत्कारिक और प्राचीन है, जो इस स्थल की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को जीवित कर रही हैं. इस मंदिर को लेकर कई चमत्कारी घटनाएं भी सुनने को मिलती हैं. उन्होंने कहा कि, गांव में प्रचलित घटनाक्रम के अनुसार, एक व्यक्ति जो बोल नहीं पता था, आंधी तूफान के दौरान इसी मंदिर में रात में रुक गया था. सुबह जब उसके परिजन पहुंचे, तो उन्होंने देखा की अजब हो गया, उसकी आवाज ही वापस लौट गई थी.

अब तो यह खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई और लोगों की आस्था और भी बढ़ गई. दूसरी घटना की बात करें, तो गांव के एक कारीगर थे, जिनकी कोई संतान नहीं था. वह मंदिर आए और अपने दुख को पुजारी के साथ बयान किए, तो पुजारी ने उन्हें 11 सोमवार तक रुद्राभिषेक करने की सलाह दी. हालांकि, उन्होंने ऐसा ही किया. इसके बाद, उनके घर में खुशियों ने ऐसे दस्तक दिया, मानो जिसका कोई अंत नहीं रहा हो और उन्हें एक नहीं, बल्कि तीन पुत्रों की प्राप्ति हुई. मंदिर परिषद में मौजूद तमाम लोगों ने भी इस मंदिर के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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