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भारत के लिए कभी नहीं खेले ये 5 टैलेंटेड क्रिकेटर्स, बुलावा तो आया लेकिन एक मौके को तरसे

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five talented cricketers never played for india: भारत में हर बच्चे का सपना होता है- हाथ में बल्ला या गेंद थामना और देश के लिए क्रिकेट खेलना. नीली जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना और देश को जीत दिलाना हर क्रिकेटर के लिए एक गर्व का पल होता है. हालांकि, इसमें सभी को कामयाबी नहीं मिलती. हमने कई ऐसे टैलेंटेड खिलाड़ी देखे हैं, जो खुशकिस्मती से भारत के लिए खेले और खूब नाम कमाया. हालांकि, कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे जिनका घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड तो शानदार था पर उन्हें कभी टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली. सबसे ज्यादा दुख तब होता है, जब भारतीय टीम में सिलेक्शन के बावजूद एक भी मैच खेलने का मौका न मिले. हम यहां ऐसे ही 5 बदनसीब खिलाड़ियों की कहानी लेकर आए हैं, जो टीम का हिस्सा तो बने, लेकिन कभी मैच नहीं खेल पाए.

महाराष्ट्र के धीरज जाधव घरेलू क्रिकेट के दिग्गज रहे, लेकिन भारत के लिए खेलने का उनका सपना सिर्फ सपना ही रह गया. साल 2004 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे टेस्ट के लिए उन्हें टीम में चुना गया था. लेकिन उस समय टीम में गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गजों की मौजूदगी की वजह से उन्हें डेब्यू का मौका नहीं मिला. उनका फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड देखें तो 76 मैचों में 56.06 की औसत से 5831 रन बनाए. उन्होंने 20 शतक लगाए और उनका बेस्ट स्कोर नाबाद 260 रन रहा.

बंगाल के लंबे कद के तेज गेंदबाज शिब शंकर पॉल ने अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को खूब परेशान किया. उन्हें 2004 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और फिर बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में जगह मिली, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और वो कभी मैदान पर नहीं उतर सके. 2016 में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. शिब शंकर का फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड देखें तो 61 मैचों में 220 विकेट चटकाए, जिसमें 15 बार पारी में 5 विकेट भी चटकाए.

रणदेब बोस भारत के सबसे भरोसेमंद गेंदबाजों में से एक थे. 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के दौरान उन्होंने एक अभ्यास मैच में 5 विकेट भी लिए थे. लेकिन कप्तान राहुल द्रविड़ ने उनके ऊपर श्रीसंत को तरजीह दी. इसके बाद उन्हें दोबारा कभी मौका नहीं मिला. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने पूरे करियर में कभी ‘नो बॉल’ नहीं फेंकी. फर्स्ट क्लास में उनके आंकड़े बेहद शानदार हैं. रणदेब ने 91 मैचों में 317 विकेट चटकाए. वह आईपीएल में वो पंजाब और कोलकाता की टीम का भी हिस्सा रहे.

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सुनील वाल्सन का नाम इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा. वह 1983 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला. वह इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं, जो वर्ल्ड चैंपियन टीम में तो थे पर कभी भारत के लिए कोई इंटरनेशनल मैच नहीं खेल पाए. सुनील ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 75 मैच खेलते हुए 212 विकेट झटके. संन्यास के बाद वो आईपीएल टीम दिल्ली कैपिटल्स (पहले दिल्ली डेयरडेविल्स) के मैनेजर के रूप में भी काम कर चुके हैं.

मुंबई के बाएं हाथ के स्पिनर राजेश पवार का घरेलू रिकॉर्ड कमाल का था. उन्हें 2007 वर्ल्ड कप के 30 संभावित खिलाड़ियों में चुना गया था और फिर बांग्लादेश दौरे के लिए टेस्ट टीम में भी जगह मिली. हालांकि, अनिल कुंबले और हरभजन सिंह जैसे महान स्पिनरों के होते हुए उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिल पाया. राजेश ने 84 फर्स्ट क्लास मैचों में 281 विकेट लिए. गेंदबाजी के साथ-साथ वो एक अच्छे बल्लेबाज भी थे और उनका बेस्ट स्कोर 95 रन रहा.

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