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नेट्स पर अर्जुन तेंदुलकर को गेंदबाज़ी देखने वाले बताते हैं कि गेंद धमाकेदार है, लाइन-लेंथ पर पकड़ है और विकेट लेने की भूख भी है मगर मैच में मौका? वो अभी भी “बाद में” की फ़ाइल में पड़ा है. कप्तान ऋषभ पंत से लेकर कोच जस्टिन लैंजर तक हर कोई तारीफ तो करता है पर किलाने की तरफदारी कोई करता नजर नहीं आता
अर्जुन तेंदुलकर 9 मैचों से डगआउट में बैठे हैं, LSG का ना तो टीम मैनेजमेंट और ना ही कप्तान उनको खिलाने को तैयार
नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में एक नाम है जो सबसे ज़्यादा रोशन है सचिन तेंदुलकर मगर इसी रोशनी के साये में उनका बेटा अर्जुन तेंदुलकर अंधेरे में खड़ा है. IPL 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स लगातार मैच गँवा रही है, टीम मैनेजमेंट हर बार नई-नई कोशिशें कर रहा है बल्लेबाज़ी बदली, गेंदबाज़ी बदली, कॉम्बिनेशन बदला मगर एक नाम बेंच पर धूल खाता रहता है और वो है अर्जुन तेंदुलकर.
नेट्स पर अर्जुन तेंदुलकर को गेंदबाज़ी देखने वाले बताते हैं कि गेंद धमाकेदार है, लाइन-लेंथ पर पकड़ है और विकेट लेने की भूख भी है मगर मैच में मौका? वो अभी भी “बाद में” की फ़ाइल में पड़ा है. कप्तान ऋषभ पंत से लेकर कोच जस्टिन लैंजर तक हर कोई तारीफ तो करता है पर किलाने की तरफदारी कोई करता नजर नहीं आता और मैचों की संख्या बढती जा रही है और उम्मीद का दामन छूटता जा रहा है.
स्टेडियम में परिवार, मैदान पर इंतज़ार
हर मैच में एक तस्वीर दिखती है सानिया (अर्जुन की पत्नी) और सारा तेंदुलकर (बहन) स्टेडियम में बैठी होती हैं उम्मीद लेकर आती हैं, अर्जुन का नाम Playing XI में सुनने के लिए मगर जब टीम की घोषणा होती है तो वही मायूसी, वही ख़ाली आँखें यह सिलसिला हर मैच में दोहराया जाता है जैसे किसी फ़िल्म का वो दर्द भरा scene जो बार-बार replay हो.
मुंबई में भी यही कहानी थी
यह पहली बार नहीं है मुंबई इंडियंस में भी अर्जुन के साथ यही सौतेला व्यवहार हुआ सालों तक स्क्वाड में रहे, नेट्स पर पसीना बहाया, मगर मैचों में मौका बेहद कम मिला. लोगों ने तब भी यही कहा “सचिन का बेटा है, इसीलिए रखा है, वरना इसे खिलाते क्यों नहीं यह सवाल आज भी जवाब माँग रहा है. लखनऊ आए तो लगा शायद यहाँ ताज़ी हवा मिलेगी. नई टीम, नया मैनेजमेंट, नया मौका मगर हालात जस के तस हैं.
सचिन का नाम, वरदान या अभिशाप?
यही सबसे बड़ा सवाल है।क्या अर्जुन को सचिन तेंदुलकर का बेटा होने का नुक़सान हो रहा है? जब भी वो मैदान पर आते हैं, तुलना होती है जब मौका नहीं मिलता तो लोग कहते हैं “बाप के नाम पर है. और जब अच्छा करते हैं तो कहते हैं बाप जैसा तो नहीं. यह एक ऐसी जंग है जो अर्जुन को हर तरफ़ से हारते हुए दिखाती है बिना खेले भी. अब वक़्त आ गया है लखनऊ सुपर जायंट्स के मैनेजमेंट को एक सीधा सवाल अगर टीम हार रही है, अगर गेंदबाज़ी विकल्प काम नहीं कर रहे, तो नेट्स का वो गेंदबाज़ जो हर दिन पसीना बहाता है उसे मौका देने में क्या नुक़सान है अर्जुन तेंदुलकर को सिर्फ़ एक चीज़ चाहिए मौका. न तरस, न सिफ़ारिश, बस एक मौका और शायद यही वो पल होगा जब वो साबित कर देंगे कि वो सचिन के बेटे से पहले अर्जुन तेंदुलकर हैं.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


