नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता आज केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के बड़े विशेषज्ञ और राजनयिक उनकी नेतृत्व क्षमता के कायल हो चुके हैं. हाल ही में नॉर्वे के पूर्व जलवायु और पर्यावरण मंत्री एरिक सोल्हेम ने पीएम मोदी की तुलना दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के नेताओं से की है. उनका मानना है कि मोदी ने अपने विजन और कड़ी मेहनत से जो मुकाम हासिल किया है, उसके आसपास फिलहाल कोई दूसरा ग्लोबल लीडर नजर नहीं आता है. सोल्हेम ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में किसी नेता के लिए इतने लंबे समय तक भारी जनसमर्थन बनाए रखना एक दुर्लभ घटना है.
एरिक सोल्हेम का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी डेटा एनालिटिक्स कंपनी ‘मॉर्निंग कंसल्ट’ के सर्वे ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस सर्वे के अनुसार पीएम मोदी 68 प्रतिशत की शानदार अप्रूवल रेटिंग के साथ दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं की सूची में टॉप पर बने हुए हैं. सोल्हेम ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि शायद 1950 के दशक में यूरोप के नेताओं ने ऐसा समर्थन देखा होगा, लेकिन आज के दौर में यह कल्पना से परे है. उनके मुताबिक मोदी की यह सफलता उनके व्यक्तिगत संघर्ष और भारत के लिए उनके आधुनिक दृष्टिकोण का परिणाम है.
मोदी की लोकप्रियता के आगे क्यों पीछे छूटे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप?
दुनिया अक्सर अमेरिका और यूरोप के नेताओं को शक्ति का केंद्र मानती है, लेकिन लोकप्रियता के मामले में स्थिति बिल्कुल उलट है. एरिक सोल्हेम ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पीएम मोदी की लोकप्रियता के करीब नहीं पहुंचते हैं. उनका मानना है कि किसी बड़े और विविधता भरे देश में एक नेता का इतना प्रभाव होना अविश्वसनीय है. सोल्हेम ने तर्क दिया कि छोटे देशों में शायद कोई नेता ऐसा समर्थन पा ले, लेकिन भारत जैसे विशाल देश में यह मोदी के व्यक्तित्व का जादू ही है. उन्होंने मोदी को महज एक राजनेता नहीं बल्कि एक ‘सच्चा विश्व नेता’ करार दिया है.
क्या चाय बेचने वाले का सफर आज भी दुनिया को प्रेरणा देता है?
एरिक सोल्हेम ने पीएम मोदी के शुरुआती जीवन और उनके संघर्षों का विशेष रूप से उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि गुजरात के एक छोटे रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले एक साधारण परिवार से निकलकर दुनिया के सबसे शक्तिशाली मंचों तक पहुंचना एक बहुत बड़ी बात है. यह सफर न केवल भारतीयों के लिए बल्कि दुनिया के हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है जो अपनी मेहनत से अपनी किस्मत बदलना चाहता है. मोदी की यह सादगी और आम लोगों से उनका जुड़ाव ही उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा आधार है, जिससे लोग खुद को जोड़कर देखते हैं.
बिना पश्चिम की नकल किए भारत को आधुनिक कैसे बना रहे हैं मोदी?
प्रधानमंत्री मोदी के विकास मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह आधुनिकता को तो अपनाते हैं, लेकिन अपनी जड़ों को नहीं छोड़ते. एरिक सोल्हेम का मानना है कि मोदी एक ऐसा भारत बना रहे हैं जो तेजी से तरक्की करे, पर जिसकी आत्मा उसकी संस्कृति और परंपरा में बसी हो. उन्होंने कहा कि मोदी पश्चिम की अंधी नकल करने के बजाय भारतीय विरासत पर गर्व करना सिखाते हैं. यह मॉडल विकास का एक नया रास्ता दिखाता है जहां तकनीक और इतिहास का अद्भुत संतुलन है. सोल्हेम ने यह भी कहा कि मोदी का भारत अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानता है.
पश्चिमी मीडिया क्यों नहीं समझ पाता भारतीय समाज और मोदी का रिश्ता?
अक्सर देखा गया है कि पश्चिमी मीडिया के कुछ हिस्से पीएम मोदी के प्रति नकारात्मक रुख अपनाते हैं. इस पर सोल्हेम ने बड़ी बेबाकी से अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्थाएं धर्म और संस्कृति को संदेह की नजर से देखती हैं, इसलिए वे भारत की जमीनी हकीकत को नहीं समझ पातीं. उनके अनुसार भारत में संस्कृति और धर्म लोगों की पहचान का हिस्सा हैं, न कि कोई विवाद. मोदी ने इसी सांस्कृतिक पहचान को देश के विकास से जोड़ दिया है. यही कारण है कि पश्चिमी मीडिया के दावों के उलट भारत की जनता मोदी के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहती है.
वैश्विक संघर्षों को शांत करने में भारत का रोल कितना अहम है?
एरिक सोल्हेम ने भारत की शांतिपूर्ण विकास की नीति की भी जमकर सराहना की है. उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ हुए संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा संयम और मजबूती दिखाई है. उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे पाकिस्तान के साथ हुए छोटे संघर्ष को मोदी सरकार ने कुछ ही दिनों में नियंत्रित कर शांत कर दिया. सोल्हेम के मुताबिक यह एक ऐसा उदाहरण है जिससे दुनिया के अन्य देश बहुत कुछ सीख सकते हैं. भारत आज एक ऐसी शक्ति बन चुका है जो युद्ध के बजाय विकास और शांति के जरिए अपनी धाक जमाने में विश्वास रखता है.


