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16वीं शताब्दी में बनी यह ईमारत आज पर्यटकों के दीदार को तरसती है. वर्तमान में यह ईमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन सरंक्षित है. एएसआई के अनुसार यह मकबरा बादशाह सम्राट अकबर कि पत्नी बीबी ईशवर्दी बेगम का है. बताया जाता है कि उनकी मौत के बाद उन्ही यहीं दफनाया गया था. यह ईमारत लाल बलुआ पत्थरों से बनी हुई है. ईमारत के चारों ओर गालियारे बने हुए है बिच में मुख्य मकबरा बना है जहाँ बताया जाता है कि अकबर कि पत्नी की कब्र हुआ करती थी जो वर्तमान में अब दिखाई नहीं देती है.
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में सेंकड़ो मुगल ईमारत है. कई ईमारतो का दीदार करने के लिए देशी विदेशी टूरिस्ट आगरा आते है. आगरा का ताजमहल विश्व भर में मशहूर है. ऐसी ही कई ईमारत आगरा में बनी हुई है जिन्हे बेहद कम लोग जानते है. जो अपनी गुमनामी की जिंदगी जी रही है. आगरा के गढ़ी भदौरिया क्षेत्र में स्थित ढाकरी का महल सुनसान और वीरान होने के कारण अपनी गुमनामी की जिंदगी जी रहा है.
इतिहासकार बताते है कि 16वीं शताब्दी में बनी यह ईमारत आज पर्यटकों के दीदार को तरसती है. वर्तमान में यह ईमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन सरंक्षित है. एएसआई के अनुसार यह मकबरा बादशाह सम्राट अकबर कि पत्नी बीबी ईशवर्दी बेगम का है. बताया जाता है कि उनकी मौत के बाद उन्ही यहीं दफनाया गया था. यह ईमारत लाल बलुआ पत्थरों से बनी हुई है. ईमारत के चारों ओर गालियारे बने हुए है बिच में मुख्य मकबरा बना है जहाँ बताया जाता है कि अकबर कि पत्नी की कब्र हुआ करती थी जो वर्तमान में अब दिखाई नहीं देती है.
गुमनामी और सन्नाटे में जी रही है यह ईमारत
यह ईमारत लाल बलुआ पत्थरों से बनी हुई है. यह करीब 31 फुट ऊँची आकर्षित ईमारत है. ईमारत में मुग़लकालीन समय की वास्तुकला और नक्कासी दिखाई देती है जो धीरे धीरे उचित रखरखाव ना होने के कारण धुंधली होती जा रही है. घनी आबादी के बीच अब यह ईमारत चारों ओर से अवैध निर्माण से घिर चुकी है. उचित प्रचार प्रसार ना होने के कारण बेहद कम ही लोग इसे जानते है. बेहद कम ही लोग यहाँ जाते है जिस कारण हर वक़्त यहाँ सन्नाटा पसरा रहता है.
आगरा के गढ़ी भदौरिया क्षेत्र में स्थित ढाकरी का महल वर्तमान में अवैध अतिक्रमणों से घिरता जा रहा है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन सरंक्षित इस मुग़लिया ईमारत के 100 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में नियमों को ताक पर रखकर कई मकान और रिहाइशी क्षेत्र बनता जा रहा है. वर्तमान में साफ सफाई के लिए एएसआई की तरफ से एक केयर टेकर इस ईमारत में कार्यरत है. वह सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अपनी ड्यूटी करते है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


