Today Weather News Live: अप्रैल महीने की गर्मी लोगों को खूब सता रहा है. कई राज्यों और शहरों में पारा 40 के पार लगातार जा रहा है. पूरा भारत इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है. तापमान लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है. लू के थपेड़े दिन को और मुश्किल बना रहे हैं. हालात ऐसे हैं जैसे सूरज खुद ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर रहा हो. लेकिन इसी तपिश के बीच एक नई हलचल भी शुरू हो गई है. मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं. मौसम विभाग (IMD) ने साफ किया है कि अब तस्वीर बदलने वाली है. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय हो रहा है. यह सिस्टम उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित करेगा. धूल भरी आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर शुरू हो सकता है. यह बदलाव अचानक नहीं होगा लेकिन असर जरूर दिखेगा. यही वजह है कि मौसम विभाग ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया है.
बिहार में भी गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है.
- मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 36 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं. पहाड़ी इलाकों में पहले से सक्रिय सिस्टम अब मैदानों की ओर बढ़ेगा. इससे मौसम का मिजाज बदलने लगेगा. उत्तर-पश्चिम भारत में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी. कई जगहों पर तेज हवाएं चलेंगी. धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश भी हो सकती है. यह बदलाव धीरे-धीरे पूरे उत्तर भारत को प्रभावित करेगा. हालांकि, हीटवेव पूरी तरह खत्म नहीं होगी. लेकिन इसकी तीव्रता में कमी आ सकती है.
दिल्ली-NCR में गर्मी के बाद राहत की दस्तक
दिल्ली-एनसीआर में इस समय गर्मी अपने चरम पर है और हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं लग रहा. तेज धूप, तपती हवाएं और 43 डिग्री के आसपास पहुंचता तापमान लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है. कई इलाकों में लू का असर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों के लिए जोखिम और बढ़ गया है. लेकिन इस झुलसाती गर्मी के बीच मौसम विभाग ने राहत की उम्मीद जगाई है. 26 अप्रैल से मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. आंशिक बादल छाने लगेंगे और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है. यह बदलाव भले ही पूरी तरह से राहत न दे, लेकिन तपिश को थोड़ी कम जरूर करेगा. इसके अलावा, प्रदूषण का स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है, खासकर आनंद विहार और नोएडा जैसे इलाकों में. हालांकि, मौसम में बदलाव के साथ हवा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है.
यूपी में बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. लू के थपेड़े दिनभर लोगों को परेशान कर रहे हैं और शाम तक गर्म हवाओं का असर बना रहता है. हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर आवाजाही कम हो गई है और लोग जरूरी कामों के लिए ही घर से बाहर निकल रहे हैं. लेकिन मौसम विभाग ने यहां भी राहत के संकेत दिए हैं. 26 अप्रैल से मौसम में बदलाव शुरू होगा और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. धूल भरी आंधी के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है. कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी हो सकती है, जो फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है. हालांकि, इन गतिविधियों से तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है. इसके बावजूद लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई है, खासकर आंधी-तूफान और बिजली गिरने के दौरान.
बिहार में बारिश और ठनका का खतरा
बिहार में भी गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है और उमस भरी गर्मी के कारण हालात और भी कठिन हो गए हैं. लेकिन 25 अप्रैल के बाद मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. आसमान में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना बनेगी. इसके साथ ही ठनका यानी आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा, जो इस क्षेत्र में हर साल जानलेवा साबित होता है. मौसम विभाग के अनुसार 27 अप्रैल से बारिश का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है, खासकर उत्तर बिहार के जिलों में. शिवहर, मधुबनी, सुपौल और किशनगंज जैसे इलाकों में येलो अलर्ट जारी किया गया है. यह बदलाव जहां एक ओर गर्मी से राहत देगा, वहीं दूसरी ओर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत भी होगी, क्योंकि खराब मौसम अचानक नुकसान पहुंचा सकता है.
राजस्थान में लू के बीच आंधी का असर
हिमाचल-उत्तराखंड में बदलेगा मिजाज
- हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है. राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है. ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के भी आसार हैं, जिससे तापमान में गिरावट आएगी. शिमला, मनाली, धर्मशाला और कांगड़ा जैसे इलाकों में मौसम सुहावना हो सकता है. हालांकि, बारिश के साथ तेज हवाएं और गरज-चमक भी देखने को मिल सकती है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सावधानी बरतने की जरूरत है. यह बदलाव जहां गर्मी से राहत देगा, वहीं पहाड़ी रास्तों पर फिसलन और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ा सकता है.
- उत्तराखंड: उत्तराखंड में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर साफ दिखाई देगा. राज्य के पहाड़ी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है. इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. मैदानी इलाकों में हालांकि गर्मी बनी रहेगी, लेकिन कुछ हद तक राहत मिल सकती है. देहरादून और हरिद्वार जैसे क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश से तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है.
राजस्थान में इस समय गर्मी अपने चरम पर है
दक्षिण भारत में प्री-मानसून की आहट
दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज पूरी तरह अलग नजर आ रहा है. यहां एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण आंधी-तूफान और बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं. केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में मध्यम स्तर की बारिश की संभावना है. इसके साथ ही पश्चिमी घाट के इलाकों में भी तेज हवाएं और गरज-चमक देखने को मिल सकती है. महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में भी हल्की बारिश और ओलावृष्टि के संकेत हैं. इसे प्री-मानसून गतिविधियों की शुरुआत माना जा रहा है, जो आने वाले समय में मानसून की दिशा तय करेगी. हालांकि, कुछ क्षेत्रों में गर्मी का असर अभी भी बना रहेगा.
पूर्वोत्तर में तूफान और भारी बारिश का खतरा
पूर्वोत्तर भारत में मौसम पहले से ही काफी सक्रिय है और आने वाले दिनों में यह और तेज हो सकता है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 48 घंटों में तेज तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. इसके साथ ही आकाशीय बिजली और ओलावृष्टि का खतरा भी बना रहेगा. यह क्षेत्र फिलहाल देश का सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका बन सकता है. लोगों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान घरों में सुरक्षित रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें.
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस क्या होता है?
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक खास तरह की वेदर सिस्टम है, जो भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) के आसपास बनती है और पश्चिमी हवाओं के साथ भारत की ओर बढ़ती है. यह खासतौर पर सर्दियों और गर्मियों के बीच के समय में सक्रिय होती है. जब यह उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंचती है, तो अपने साथ नमी लेकर आती है, जिससे बारिश, ओलावृष्टि और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी होती है. गर्मियों में इसका असर बहुत अहम होता है, क्योंकि यह तेज गर्मी और लू के बीच थोड़ी राहत दिलाता है. कई बार इसकी वजह से अचानक मौसम बदल जाता है और धूल भरी आंधी या गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हो जाती है.
हीटवेव क्यों बढ़ रही है?
हीटवेव यानी लू की घटनाएं पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है, जिससे वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है. इसके अलावा तेजी से हो रहा शहरीकरण, कंक्रीट के जंगल, हरियाली की कमी और बढ़ता प्रदूषण भी गर्मी को और ज्यादा तीखा बना रहे हैं. शहरों में ‘हीट आइलैंड इफेक्ट’ के कारण तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों से ज्यादा रहता है. पेड़-पौधों की कमी और पानी के स्रोतों का घटाव भी गर्मी को बढ़ावा देता है. यही वजह है कि अब लू पहले से ज्यादा लंबी और खतरनाक होती जा रही है.
आंधी-तूफान के दौरान क्या सावधानी रखें?
आंधी-तूफान के समय सबसे जरूरी है सतर्क रहना और सुरक्षित जगह पर रहना. खुले मैदान, छत या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें, क्योंकि तेज हवाओं में पेड़ गिर सकते हैं या बिजली गिरने का खतरा होता है. बिजली के खंभों और तारों से दूर रहें. घर के अंदर रहें और खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें. इस दौरान मोबाइल चार्जिंग या अन्य बिजली उपकरणों का उपयोग कम करें, ताकि करंट या शॉर्ट सर्किट का खतरा न हो. अगर बाहर फंस जाएं, तो किसी मजबूत इमारत में शरण लें. मौसम विभाग की चेतावनियों को नजरअंदाज न करें और यात्रा टालने की कोशिश करें.
क्या बारिश से तुरंत राहत मिलेगी?
हल्की या मध्यम बारिश से गर्मी से कुछ हद तक राहत जरूर मिलती है, लेकिन यह राहत तुरंत और पूरी तरह से नहीं होती. बारिश के बाद नमी बढ़ जाती है, जिससे उमस महसूस हो सकती है. हालांकि तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट आ सकती है, जो राहत देती है. अगर लगातार कुछ दिनों तक बारिश या बादल बने रहें, तभी असली राहत मिलती है. कई बार बारिश के बाद फिर से तेज धूप निकलने पर गर्मी और उमस दोनों बढ़ जाती हैं. इसलिए इसे अस्थायी राहत ही माना जाता है, न कि स्थायी समाधान.
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर कितने दिन तक रहता है?
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर आमतौर पर 2 से 4 दिन तक रहता है, लेकिन इसकी तीव्रता और दिशा के अनुसार यह समय थोड़ा बढ़ या घट सकता है. जब यह सिस्टम सक्रिय होता है, तो अचानक मौसम बदल जाता है तेज हवाएं, बादल, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलती है. पहाड़ी इलाकों में इसका असर ज्यादा समय तक रह सकता है, जहां बर्फबारी और लगातार बारिश होती है. मैदानी इलाकों में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम समय का होता है, लेकिन इस दौरान तापमान में गिरावट और लू से राहत जरूर मिलती है. हालांकि, सिस्टम के गुजरते ही फिर से तापमान बढ़ने लगता है, इसलिए इसका असर अस्थायी ही माना जाता है.


