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Arvind Kejriwal AAP News | Somnath Bharati Court Case | आप पर आए महासंकट के बीच केजरीवाल को बड़ी राहत, अहम केस में बरी हुआ करीबी

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आम आदमी पार्टी (AAP) में चल रही उथल-पुथल के बीच अरविंद केजरीवाल को एक बड़ी राहत मिली है. केजरीवाल के करीबी सोमनाथ भारती को 2014 के चर्चित मामले में कोर्ट ने बरी कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब पार्टी पहले से ही बगावत के कारण राजनीतिक संकट का सामना कर रही है, जिससे इस राहत को और भी अहम माना जा रहा है.

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए भारती और 16 अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया. अदालत ने साफ कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में असफल रहा और मामले में पेश किए गए सबूत पर्याप्त नहीं थे.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला जनवरी 2014 का है, जब मालवीय नगर के खिड़की एक्सटेंशन इलाके में अफ्रीकी मूल की महिलाओं के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगा था. उस समय सोमनाथ भारती दिल्ली सरकार में कानून मंत्री थे और उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मिलकर देर रात एक छापेमारी जैसी कार्रवाई की थी.

आरोपों में मारपीट, छेड़छाड़, गैरकानूनी तरीके से घुसना, सार्वजनिक सेवकों के काम में बाधा डालना और दंगा फैलाने जैसी धाराएं शामिल थीं. पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की थी.

कोर्ट ने क्यों किया बरी?

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस केस की सबसे बड़ी कमजोरी गवाहों की अनुपस्थिति रही. जिन पीड़ित महिलाओं के बयान इस मामले की आधारशिला थे, वे कोर्ट में पेश ही नहीं हुईं. ऐसे में उनके बयान कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं माने गए.

जज ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपियों ने गैरकानूनी तरीके से भीड़ बनाकर कोई अपराध किया. कोर्ट ने टिप्पणी की, ‘प्रॉसिक्यूशन अपना केस संदेह से परे साबित करने में विफल रहा.’

इसके अलावा, FIR दर्ज होने में देरी और सबूतों की कमी भी केस को कमजोर करने वाले अहम कारण रहे.

भारती का पक्ष क्या था?

सोमनाथ भारती ने फैसले के बाद कहा कि उन्हें स्थानीय लोगों से शिकायत मिली थी कि इलाके में कुछ विदेशी नागरिक ड्रग्स और मानव तस्करी में शामिल हैं. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. भारती के मुताबिक, पुलिस कोर्ट में कथित पीड़ितों को पेश नहीं कर पाई, जिससे मामला और कमजोर हो गया. उन्होंने इसे ‘सच्चाई की जीत” बताया.

यह फैसला अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के लिए ऐसे समय में आया है, जब राघव चड्ढा के नेतृत्व में पार्टी के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों ने बगावत कर दी है. ये सभी सांसद आप का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं.



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