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India Rice Aid To Iran: ईरान के लिए भारत बना ‘अन्नदाता’, पाकिस्तान करता रह गया तमाशा; कर दिया पूरा इंतजाम

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नई दिल्ली: जंग में अच्छे-अच्छों की हालत खराब हो जाती है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चले लगभग 40 दिनों के युद्ध ने यही साबित किया है. तीनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन सबसे ज्यादा मार आम लोगों पर पड़ी है. सीजफायर का ऐलान जरूर हो गया है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी आसान नहीं हैं. युद्ध अपने साथ सिर्फ तबाही नहीं लाता, बल्कि महंगाई, बेरोजगारी और खाने-पीने की किल्लत भी लेकर आता है. ईरान में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां आम लोग महंगाई और जरूरी सामानों की कमी से जूझ रहे हैं. ऐसे समय में जब पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की चर्चाएं हो रही हैं, वहीं भारत ने एक बार फिर इंसानियत का परिचय देते हुए ईरानी लोगों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है. शांति वार्ता भी टूट गई है. इस कारण पाकिस्तान की पूरी दुनिया में भद्द पिट गई है. भारत सरकार अब युद्ध से प्रभावित ईरान समेत कई देशों को चावल भेजने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि वहां के लोगों को राहत मिल सके.

यह कदम सिर्फ एक कूटनीतिक पहल नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का बड़ा उदाहरण भी है. जब युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूट जाती है, तब सबसे पहले असर रसोई पर पड़ता है. ईरान में भी यही हो रहा है. जरूरी खाद्य सामग्री महंगी हो गई है और कई जगहों पर उपलब्धता कम हो गई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार ऐसे में भारत का आगे आना एक राहत भरी खबर है. सरकार के पास इस समय अनाज का पर्याप्त भंडार है, जिसे जरूरतमंद देशों तक पहुंचाया जा सकता है. यह फैसला भारत की वैश्विक भूमिका को भी मजबूत करता है, जहां वह सिर्फ एक आर्थिक ताकत ही नहीं, बल्कि संकट के समय मददगार देश के रूप में भी उभर रहा है.

भारत की पहल से ईरान को राहत की उम्मीद

भारत सरकार के स्तर पर हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई. अधिकारियों के मुताबिक, देश में गेहूं और चावल का बड़ा स्टॉक मौजूद है, जिसे अब निर्यात या मानवीय सहायता के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है. खासतौर पर युद्ध से प्रभावित देशों को प्राथमिकता दी जा रही है. ईरान के लिए चावल की शिपमेंट शुरू करने का प्रस्ताव इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

  • भारत में फूड कॉरपोरेशन के गोदामों में इस समय चावल और गेहूं का अधिशेष भंडार है. पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में नए सीजन की फसल आने वाली है, इससे गोदामों में जगह की कमी भी एक चुनौती बन रही है. ऐसे में सरकार के सामने यह सवाल था कि इस अतिरिक्त अनाज का क्या किया जाए. इसी के तहत यह फैसला लिया गया कि जरूरतमंद देशों को अनाज भेजकर दोहरी समस्या का समाधान किया जाए. एक तरफ भंडारण का दबाव कम होगा और दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर भारत की छवि मजबूत होगी.
  • दूसरी ओर वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है और कई देशों में खाद्य संकट गहराने की आशंका है. इसी को देखते हुए शिपिंग मंत्रालय को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस बात की योजना बनाएं कि कैसे बड़े कार्गो जहाजों के जरिए खाद्य सामग्री को प्रभावित देशों तक पहुंचाया जा सके. यहां तक कि कुछ हाई-वैल्यू फूड आइटम्स को हवाई मार्ग से भेजने पर भी विचार किया जा रहा है.

पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में है. जहां एक ओर पाकिस्तान शांति वार्ता की मेजबानी में व्यस्त नजर आया और अंत में यह शांति वार्ता विफल भी हो गई. वहीं जमीनी स्तर पर राहत पहुंचाने में उसकी कोई खास भूमिका सामने नहीं आई है. और खबर आ रही है कि यह बातचीद भी विफल रही है. इसके उलट भारत ने सीधे तौर पर मदद की पहल करके यह दिखा दिया है कि संकट के समय सिर्फ बातचीत ही नहीं, बल्कि ठोस कदम भी जरूरी होते हैं. यही वजह है कि भारत की इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है.

भारत ईरान को किस तरह की मदद देने जा रहा है?

भारत सरकार ईरान को मुख्य रूप से चावल की शिपमेंट भेजने की योजना बना रही है. इसके अलावा जरूरत के अनुसार अन्य खाद्य सामग्री भी भेजी जा सकती है. यह मदद मानवीय आधार पर दी जाएगी, ताकि युद्ध से प्रभावित आम लोगों को राहत मिल सके.

भारत के पास इतना अनाज कहां से आया?

भारत में हर साल बड़ी मात्रा में गेहूं और चावल का उत्पादन होता है. इस बार फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के गोदामों में जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा हो गया है. नए सीजन की फसल आने से पहले इस स्टॉक को कम करना जरूरी है, इसलिए इसे निर्यात या सहायता के रूप में भेजने की योजना बनाई गई है.

क्या इस मदद से भारत को भी फायदा होगा?

हां, इस कदम से भारत को दोहरा फायदा मिलेगा. एक तरफ गोदामों में जमा अतिरिक्त अनाज का इस्तेमाल हो जाएगा, जिससे भंडारण की समस्या कम होगी. दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि एक जिम्मेदार और मददगार देश के रूप में मजबूत होगी.

इस मामले में पाकिस्तान पीछे क्यों नजर आ रहा है?

पाकिस्तान फिलहाल शांति वार्ता की प्रक्रिया में व्यस्त है और उसने अभी तक राहत सामग्री भेजने जैसी ठोस पहल नहीं की है. हालांकि वार्ता टूटने से अब उसकी पूरी दुनिया में भद्द पिट गई है. इसके विपरीत भारत ने सीधे तौर पर मदद का ऐलान करके अपनी सक्रिय भूमिका दिखाई है.



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