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General M.M. Naravane On China: पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने न्यूज18 इंडिया पर बातचीत के दौरान उम्मीद जताई कि भारत-चीन सीमा विवाद सुलझ सकता है. नरवणे ने अपनी किताब को लेकर मचे बवाल और गलवान हिंसा के बाद चीन के प्रति सेना के नजरिए पर भी खुलकर अपनी बात रखी. उनके मुताबिक बातचीत से ही दोनों देशों के बीच समाधान का रास्ता निकल सकता है.
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच चल रहे दशकों पुराने सीमा विवाद को लेकर हर हिंदुस्तानी के मन में एक ही सवाल है कि क्या यह कभी खत्म होगा? इस गंभीर मुद्दे पर देश के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. News18इंडिया पर रुबिका लियाक़त को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इस मुद्दे के हर पहलू पर बारीकी से रोशनी डाली है. नरवणे ने कहा कि चीन के साथ लगती LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर भारत ने एक भी इंच जमीन नहीं गंवाई है.
1. क्या वाकई सुलझ सकती है चीन के साथ सीमा की उलझन?
अक्सर लोग सीमा और बाउंड्री को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन जनरल नरवणे ने इसमें अंतर स्पष्ट किया है. उनके अनुसार बॉर्डर वह होता है जो नक्शे पर साफ हो और जमीन पर पिलर्स के जरिए पहचाना जा सके, जैसा भारत-पाकिस्तान सीमा पर है. चीन के साथ हमारी केवल एक बाउंड्री है, जिसे सुलझाना मुमकिन है. उन्होंने तर्क दिया कि चीन ने अपने 14 में से 12 पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद हल कर लिए हैं. अब सिर्फ भारत और भूटान के साथ विवाद बचा है. जब 12 देशों के साथ बात बन सकती है, तो भारत के साथ भी समाधान जरूर निकलेगा.
2. समाधान का सही रास्ता क्या होना चाहिए?
जनरल नरवणे का मानना है कि किसी भी विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत का सिलसिला जारी रहना चाहिए. जब दो देश आपस में बात करते हैं, तभी एक-दूसरे के विचार और नजरिए को समझा जा सकता है. उनके अनुसार कोई भी समझौता तभी सफल होता है जब वह ‘विन-विन सिचुएशन’ वाला हो. यानी दोनों पक्षों को यह लगना चाहिए कि उनकी मांगों का सम्मान हुआ है. लगातार संवाद से मतभेद कम होते हैं और एक ऐसा बिंदु आता है जहां दोनों देश सहमति पर पहुंच सकते हैं.
3. दुश्मन के तौर पर या पड़ोसी, चीन को कैसे देखे सेना?
गलवान घाटी में हुई हिंसा में भारत ने अपने 20 जांबाज जवानों को खोया था. उस वक्त जनरल नरवणे खुद सेना प्रमुख थे. उन्होंने साफ कहा कि जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो सेना चीन को एक दुश्मन के नजरिए से ही देखती है. युद्ध या तनाव की स्थिति में सेना का पेशेवर धर्म यही है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में आगे बढ़ने के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक नजरिया भी जरूरी है. जब तक सीमा पर कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक दूसरी तरफ तैनात हर ताकत सेना के लिए दुश्मन की तरह ही है.
4. पूर्व सेना प्रमुख की किताब पर क्यों मचा है बवाल?
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें


