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onion crisis india| nashik onion news| नासिक प्याज संकट, किसान को 25 बोरी पर मिला सिर्फ 1 रुपये का बिल

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देश में एक बार फि‍र प्‍याज क‍िसानों को खून के आंसू रुला सकती है. हाल ही में नास‍िक के किसान प्रकाश गलाधर को 25 बोरी प्याज बेचकर सिर्फ 1262 रुपये मिलने से बवाल मच गया है. बिल वायरल होने पर प्याज की ओवर सप्लाई, कम दाम और सरकारी नीति पर बहस तेज हो गई है.

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प्‍याज एक बार फ‍िर रुला सकता है, नास‍िक से आई ये खबर परेशान करने वाली है.

Onion Price Crash: देश पहले ही एलपीजी गैस और पेट्रोल-डीजल को लेकर फूंक-फूंककर कदम रख रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशहित में सोना खरीदने और खाने के तेल से लेकर कार पूलिंग या पब्लिक वाहन इस्तेमाल करने को लेकर कड़े फैसलों की अपील की है, वहीं अब महाराष्ट्र के नासिक से एक और बुरी खबर सामने आई है.आने वाले दिनों में देश में प्याज रुला सकती है.

महाराष्ट्र के एक किसान के मंडी में प्याज बेचने के बाद मिले मुनाफे का बिल वायरल होने से प्याज संकट पर चर्चा शुरू हो गई है. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक संभाजीनगर के वरुडी गांव के 45 वर्षीय किसान प्रकाश गलाधर ने चार एकड़ में प्याज उगाई थी और वे प्याज की 25 बोरी (सैक) एपीएमसी मंडी में लेकर पहुंचे. इसे बेचने पर गलाधर को कुल मूल्य सिर्फ 1,262 रुपये मिला. यानि उन्हें प्रति किलो प्याज पर एक रुपये का भी मुनाफा नहीं मिला. परिवहन, तौल, स्टोरेज और अन्य खर्च काटने के बाद उनके हाथ कुछ नहीं लगा. उल्टा उन्हें 1 रुपया चुकाने को कहा गया.

किसान प्रकाश गलाधर ने दुख व्यक्त करते हुए बताया, ‘3 मई को मैंने चार एकड़ में उगाई 25 बोरा प्याज बेची लेकिन मंडी में बेहद घटिया दाम मिलने के बाद मैंने बाकी बची प्याज फेंक दी.’

किसान की 1 रुपये के बिल की तस्वीर जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो उसने पूरे देश में एक बार फिर किसान संकट की चर्चा छेड़ दी है.

पहले भी आया है प्याज संकट
प्याज का संकट भारत में नया नहीं है. साल 2010 में भारी बारिश के चलते प्याज का उत्पादन घट गया था और इस वजह से प्याज के दाम आसमान पर पहुंच गए थे. साल 2019 में भी देशभर में प्याज महंगा हो गया था, जिसने राजनीति को भी प्रभावित किया था. इसके बाद साल 2023-24 में भी देश में प्याज का संकट आया था. हालांकि अब 2026 में प्याज की ओवर सप्लाई और गुणवत्ता की समस्या से किसानों को घाटा हो रहा है.

व्यापारी और अधिकारी क्या कहते हैं?
व्यापारियों का कहना है कि कुछ हिस्से में प्याज की गुणवत्ता खराब होने और बाजार में अधिक सप्लाई के कारण दाम गिरे हैं. वहीं, संभाजीनगर एपीएमसी के चेयरमैन राधाकिसान पठाडे ने कहा कि सरकार की खरीद और निर्यात नीति में बदलाव जरूरी है. उन्होंने मांग की कि किसानों को कम से कम 100 किलो पर 1,200 रुपये मिलने चाहिए.

वहीं महाराष्ट्र ऑनियन फार्मर्स एसोसिएशन ने पिछले चार-पांच महीनों में कम दाम पर प्याज बेचने वाले किसानों को प्रति क्विंटल 1,500 रुपये की तत्काल राहत देने की मांग की है. अगर राहत नहीं मिली तो राज्य में आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें



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