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OPINION: फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, फैन फॉलोइंग के नाम पर अंधभक्ति, गुमनाम चेहरों में गुम होता जेंटलमैन गेम

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virat kohli travis head controversy: अक्सर देखा गया है कि दो बड़े चेहरों के बीच में  सोशल मीडिया गंदगी में बदल जाता है, और अब इसे नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है. ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद यह जहरीली फैन आर्मी समझे कि किसी एक खिलाड़ी के प्रति अंधभक्ति दिखाकर वे असल उद्देश्य को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं.

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विराट कोहली-ट्रेविस हेड के बीच हैंडशेक विवाद के बाद फैंस ने लांघी सारी सीमाएं

नई दिल्ली. टॉक्सिक फैन कल्चर एक बार फिर हमें परेशान करने लौट आया है. ट्रेविस हेड और विराट कोहली के बीच हुए हैंडशेक विवाद ने अब हेड की पत्नी और परिवार तक को निशाना बना दिया है, और एक बार फिर हमने सभी सीमाएं लांघते हुए देखा है. वैसे यह पहली बार नहीं है हर बार जब ऐसा कुछ होता है, कुछ ट्रोल फैनडम को बदनाम करते हैं और कुछ बेहद गलत कर बैठते हैं.  सच्चाई यह है कि किसी भी खिलाड़ी के परिवार को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है.

अक्सर देखा गया है कि दो बड़े चेहरों के बीच में  सोशल मीडिया गंदगी में बदल जाता है, और अब इसे नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है. ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद यह जहरीली फैन आर्मी समझे कि किसी एक खिलाड़ी के प्रति अंधभक्ति दिखाकर वे असल उद्देश्य को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं.

फैन फॉलोइंग का गोरखधंधा

हेड की पत्नी पर हमला करके कोई भी कोहली के प्रति अपनी वफादारी साबित नहीं कर रहा है. यही सच्चाई है. भारतीय फैनडम, जो व्यक्तियों पर जरूरत से ज्यादा केंद्रित है, कई बार बेहद विषैला और खतरनाक हो जाता है. ऐसा लगता है जैसे कुछ फैंस के लिए यह मायने ही नहीं रखता कि भारत हार गया, बस उनका पसंदीदा खिलाड़ी अच्छा खेल गया यही काफी है.  “देश हार गया तो क्या हुआ, हमारा हीरो तो चला” यह सोच भारतीय खेल संस्कृति के लिए घातक है.  फिर सवाल उठता है हेड ने कोहली से विवाद कैसे कर लिया? और इसका जवाब कुछ लोग इस तरह देते हैं कि उसके परिवार को निशाना बना दिया जाता है.

फर्जी अकाउंट से घात प्रतिघात

अब कुछ फर्जी अकाउंट भी सामने आ रहे हैं जो खुद को हेड का समर्थक बताकर कोहली और उनके परिवार को गालियां दे रहे हैं. यह भी उतना ही निंदनीय और शर्मनाक है. इसमें भी कोई शक नहीं कि ऐसे कई अकाउंट्स भारतीय ‘फैंस’ द्वारा ही चलाए जा रहे हैं उनके लिए यह कोहली के खिलाफ अपनी भड़ास निकालने का एक और मौका है. कोहली और रोहित शर्मा से  पहले सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ थे.  उनसे पहले सुनील गावस्कर और कपिल देव लेकिन उस दौर में हमने ऐसा जहरीला फैन वॉर कभी नहीं देखा जैसा आज कोहली और रोहित के फैंस के बीच देखने को मिलता है और इस सब में असली नुकसान किसका हो रहा है ये हर किसी को पता है.

ट्रोलर्स को टेंशन नहीं

अब वक्त आ गया है कि इन ट्रोल्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो. इस नफरत को यहीं खत्म करना होगा.  नफरत फैलाना आज की नई प्रवृत्ति बनती जा रही है, लेकिन यह उस भारत की तस्वीर नहीं है जिसमें हम विश्वास करते हैं. यह एक साधारण हैंडशेक का मामला है खेल में जीत-हार तो होती ही रहती है.  इसका किसी के परिवार, पत्नी या बेटी से कोई लेना-देना नहीं है. जो भी इस मर्यादा को तोड़ता है, वह या तो भ्रमित है या फिर सभ्य समाज का हिस्सा बनने लायक नहीं.

सोशल मीडिया बना भड़ास का अड्डा

दूसरी और ज्यादा खतरनाक बात यह है कि लोगों को अब लगने लगा है कि वे कुछ भी कह सकते हैं और बच निकलेंगे.  सोशल मीडिया की गुमनामी ने इसे और बढ़ावा दिया है.  धीरे-धीरे यह एक ऐसा मंच बन गया है जहां बिना किसी नियंत्रण के गाली-गलौज होती है.  यह सिर्फ अश्लील ही नहीं, बल्कि चिंताजनक भी है.  यह दिखाता है कि लोगों के भीतर कितना गुस्सा और असंतोष भरा हुआ है. हमने इसे बहुत लंबे समय तक नजरअंदाज किया है, और आज सोशल मीडिया का यह स्तर उसी का नतीजा है.  अगर आप सच में खेल के समर्थक हैं, तो आपको इसके खिलाफ खड़ा होना होगा तभी आप असली फैन कहलाएंगे वरना आप सिर्फ ट्रोल हैं.

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Rajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें



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