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Mahendra Bhati RAS Success Story: सिलाई मशीन की खट-खट के बीच जोधपुर के महेंद्र भाटी ने एसडीएम बनने का सपना बुना. आरएएस 2024 परीक्षा में 72वीं रैंक हासिल कर उन्होंने कमाल कर दिया है. पढ़िए लेडीज कपड़े सिलने से लेकर प्रशासनिक अधिकारी बनने तक का उनका पूरा सफर.
Mahendra Bhati RAS: महेंद्र भाटी दो बार आरएएस परीक्षा पास कर चुके हैं
नई दिल्ली (Mahendra Bhati RAS Success Story). राजस्थान के जोधपुर की गलियों में सिलाई मशीन की खट-खट अब विजय गान में बदल चुकी है. जिस हाथ ने कल तक लेडीज सूट और कुर्तियों की सिलाई की, वही हाथ अब राजस्थान प्रशासनिक सेवा के जरिए शासन की कमान संभालेंगे. महेंद्र भाटी की सक्सेस स्टोरी उन करोड़ों युवाओं के लिए उम्मीद है, जो अभावों को अपनी किस्मत मान बैठते हैं. महेंद्र ने साबित कर दिया कि इरादे फौलादी हों तो सिलाई मशीन की मेज भी स्टडी टेबल बन सकती है.
कठिन हालातों में बुना कामयाबी का ताना-बाना
जोधपुर के बेहद साधारण परिवार से आने वाले महेंद्र भाटी के लिए सफलता का रास्ता फूलों की सेज नहीं था. उनका पूरा परिवार सिलाई के काम से जुड़ा है. घर की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि पढ़ाई के साथ-साथ हाथ बंटाना मजबूरी भी थी और जिम्मेदारी भी. महेंद्र भाटी खुद भी लड़कियों के कपड़े सिलने का काम करते थे. दिनभर कैंची और धागों के बीच रहने वाले इस युवा ने रातों को किताबों से अपनी तकदीर लिखने का फैसला किया. उन्होंने ठान लिया था कि सरकारी अफसर बनकर ही रहेंगे.
इंजीनियरिंग के बाद प्रशासनिक सेवा का जुनून
महेंद्र भाटी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया. उन्होंने कुछ समय तक नौकरी भी की. लेकिन जब अपने एक दोस्त को RAS अधिकारी बनते देखा तो उनके मन में भी समाज के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा जगी. उन्होंने तय किया कि वे राजस्थान की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में जाएंगे. काम और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था. लेकिन महेंद्र भाटी ने ऐसा टाइम मैनेजमेंट किया कि सिलाई मशीन की आवाज कभी उनकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनी.
हार न मानने वाला जज्बा, दूसरी कोशिश में मिली बड़ी जीत
महेंद्र भाटी की सफलता उनकी लगातार मेहनत का परिणाम है. पिछले साल यानी RAS 2023 में भी उन्होंने सफलता हासिल की थी, लेकिन तब उनकी रैंक 1323 थी. उन्हें पता था कि वे इससे बेहतर कर सकते हैं. उन्होंने दोबारा किताबें उठाईं, अपनी कमियों पर काम किया और इस बार इतिहास रच दिया. आरएएस मुख्य परीक्षा में 249 और इंटरव्यू में 53 अंकों के साथ यानी कुल 900 में से 302 नंबर लाकर उन्होंने राज्य में 72वां स्थान हासिल किया है.
इंटरव्यू में पूछे गए रोचक सवाल
महेंद्र भाटी के इंटरव्यू में उनके व्यावहारिक ज्ञान की भी परीक्षा ली गई. उनसे पूछा गया कि कढ़ी और खाटा (राजस्थानी व्यंजन) में क्या अंतर होता है? उनसे सामान्य ज्ञान और करेंट अफेयर्स पर भी सवाल किए गए. उन्होंने अपनी सहजता और सटीक जानकारी से बोर्ड का दिल जीत लिया. महेंद्र भाटी की सफलता संसाधनों की कमी का रोना रोने वालों के मुंह पर तमाचा है. उनकी कहानी सिखाती है कि पृष्ठभूमि से फर्क नहीं पड़ता; फर्क इससे पड़ता है कि आप अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए कितनी मेहनत करने को तैयार हैं.
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