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अभी तक रात के सफर के लिए राजधानी के बेहतर कोई ट्रेन नहीं थी.हालांकि दिन में सफर करना हो तो वंदे भारत को कोई जोड़ नहीं है. पर भारतीय रेलवे ने अभी वंदे भारत स्लीपर के दो ट्रेन सेट लांच किए हैं. यानी इनकी मुंह दिखाई हो चुकी है और इसी में ही ये लोगों के दिल में उतर गयी हैं. 12 साल अंत तक आने वाली हैं. आइए जानते हैं इसकी खासियत.
रेलवे ने दो ट्रेन तैयार कर चला दिए हैं और इस साल अंत तक 12 ट्रेन सेट आ जाएंगे. आने वाले सालों में 250 से ज्यादा वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें चलाने की तैयारी है. इन ट्रेनों को राजधानी और तेजस एक्सप्रेस से भी ज्यादा प्रीमियम बनाया जा रहा है. यात्रियों को होटल जैसी सुविधा, तेज स्पीड और आरामदायक रात का सफर मिलेगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा पूरी तरह बदल सकती है.

गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर इस साल पहली 16 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू की गई. इस ट्रेन ने यात्रा समय कम करने के साथ यात्रियों को बेहतर आराम का अनुभव दिया. ट्रेन की डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा है, जबकि ऑपरेशनल स्पीड 160 किमी प्रति घंटा रखी गई है.

शुरुआती 10 ट्रेन सेट बीईएमएल और चेन्नई की आईसीएफ मिलकर बना रहे हैं. इसके अलावा 200 ट्रेन सेट बनाने का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दो कंपनियों को दिया गया है, जिससे देशभर में हाईस्पीड ट्रेन नेटवर्क तेजी से बढ़ेगा.
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नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा पर खास फोकस किया गया है. बेहतर सीट कुशनिंग, कम शोर और कंपन, स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम, आरामदायक सीढ़ियां और बेहतर स्पेस मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं. इससे लंबी दूरी की यात्रा पहले से ज्यादा शांत, आरामदायक और प्रीमियम बनेगी.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में अलग से इंजन नहीं होगा. पूरी ट्रेन में पावर सिस्टम फैला होगा, जिससे ट्रेन तेजी से स्पीड पकड़ सकेगी और जल्दी रुक भी सकेगी. इसी तकनीक की वजह से यात्रा समय काफी कम होगा और औसत रफ्तार बढ़ेगी, जो भारतीय रेलवे के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें छोटी दूरी की फ्लाइट्स को कड़ी टक्कर दे सकती हैं. रात में सफर करते हुए यात्री आराम से सो सकेंगे और सुबह सीधे शहर में पहुंचेंगे. यही वजह है कि रेलवे इसे एयर ट्रैवल के सस्ते और सुविधाजनक विकल्प के रूप में देख रहा है.

जानकारों का मानना है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए फिलहाल दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता जैसे रूट बेहतर माने जा रहे हैं.


