Last Updated:
मुहम्मदाबाद गोहना के तमसा तट पर स्थित रघुवीर घाट का नाम किसी देवी-देवता पर नहीं, बल्कि स्थानीय व्यवसायी रघुवीर प्रसाद जायसवाल के नाम पर रखा गया है. पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लालजी वर्मा के अनुसार, सन 1936 में रघुवीर प्रसाद जायसवाल ने जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए इस घाट का निर्माण कराया था, क्योंकि पहले लोग यहां कच्चे और मिट्टी वाले घाट पर स्नान करने को मजबूर थे. घाट के निर्माण के बाद आसपास अन्य घाटों और मंदिरों का भी विकास हुआ। बाद में मंदिर समिति के प्रयासों से शासन द्वारा 17.38 लाख रुपये की लागत से मंदिर का निर्माण कराया गया.
मऊ. उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना तमसा तट के किनारे बना रघुवीर घाट काफी प्रसिद्ध है. यह रघुवीर घाट किसी देवी देवता के नहीं बल्कि एक व्यक्ति के नाम पर पड़ा है. लोकल 18 से बात करते हुए पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लालजी वर्मा ने बताया कि यह रघुवीर घाट नगर के एक व्यवसाय रघुवीर जायसवाल ने जन सुविधाओं को देखते हुए इस घाट का निर्माण कराया, क्योंकि इस घाट पर लोग कच्चे घाट पर स्नान करते थे जिससे मिट्टी होने से लोगों को काफी परेशानियां होती थी. सन 1936 में रघुवीर प्रसाद जायसवाल ने इस रघुवीर घाट का निर्माण कराया. इस घाट के निर्माण के बाद इसके बगल में बच्चा बाबू जमीदार ने इस घाट को देखते हुए दूसरे घाट पर रामघाट निर्माण कराया और और घाट को देखते हुए तमाम समाजसेवियों ने यहां एक मंदिर की स्थापना कराई.
कस्बे के व्यवसाई रघुवीर प्रसाद जायसवाल ने कराया निर्माण
लालजी वर्मा ने बताया कि सन 2006 में जनता ने इस मंदिर समिति का उन्हें अध्यक्ष बनाया फिर उन्होंने शासन से प्रयास कर कर बजट लाकर इस मंदिर का निर्माण कराया. क्योंकि शासन द्वारा इस मंदिर का निर्माण करने के लिए 17 लाख 38 हजार रुपए के खर्चे से पूरे मंदिर का निर्माण कार्य कराया गया तब से इस मंदिर पर हर वर्ष कुछ अलग ही विकास कार्य होता रहा है. हालांकि मंदिर और घाट का पूर्ण विकसित निर्माण करने में लगभग दो वर्ष लग गए लेकिन आज यहां इस घाट का विशेष महत्व है जहां लोग बड़े ही श्रद्धा और भाव से प्रत्येक देव दीपावली व डाला छठ पर आकर पूजा पाठ करते हैं.
घाट का महत्व देखते हुए सरकार ने 3 करोड़ से कराया सुंदरीकरण
रघुवीर घाट का निर्माण रघुवीर प्रसाद जायसवाल ने कराया क्योंकि उनके ना कोई लड़का और ना कोई लड़की थी. कोई संतान न होने के वजह से बड़े व्यवसाई थे और अधिक पैसा था फिर उन्होंने सोचा क्यों ना सारे पैसे का सदुपयोग किया जाए और जनहित के कार्य में प्रयोग किया जाए. फिर उन्होंने यह सोचकर जहां मिट्टी में लोग स्नान करते थे उस घाट का बेहतर सुंदरीकरण कराया और इस घाट का नाम ही रघुवीर घाट रख दिया गया. लाखों रुपए खर्च करके इस घाट का निर्माण कराया गया जहां बेहतर सुविधाएं दी गई. हालांकि इस घाट को बेहतर मानते हुए ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने 3 करोड रुपए का सुंदरीकरण के लिए बजट पास किया और 3 करोड रुपए से इस घाट का और बेहतर से सुंदरीकरण कराया गया है.
About the Author
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


