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अटूट हौसला और पति का मिला साथ, शादी के बाद इस महिला ने अधूरे सपने किए पूरे, सातवीं बार में बनेंगी अधिकारी

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UPPCS Sucess Story: कहते हैं कि मन में हौंसला हो तो एक ना एक दिन सफलता जरूर मिलती है. ऐसी ही सफलता भरी कहानी है ग्रेटर नोएडा की रहने वाली सविता रानी की, जो आज अधिकारी बन चुकी हैं. आइए उनकी सफलता की पूरी कहानी आपको बताते हैं.

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस) परीक्षा में चयनित सविता रानी की सफलता संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक कहानी है. उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हों, तो कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती है. साल 2015 से शुरू हुई उनकी तैयारी का सुनहरा परिणाम साल 2025 में सामने आया, जब उनका चयन ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) के पद पर हुआ.

सविता रानी ने बताया कि यह उनका सातवां मेंस और सातवां इंटरव्यू था. लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. हर प्रयास से उन्होंने नई सीख ली और अपनी रणनीति को और मजबूत बनाया. उनकी यह उपलब्धि उन सभी अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.

अदम्य इच्छाशक्ति और अनुशासन का प्रमाण
उन्होंने बताया कि वर्तमान में सविता रानी नोएडा एक्सटेंशन में निवास करती हैं. वे साल 2008 से दिल्ली में सरकारी शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं और शिक्षा के क्षेत्र में लगभग 18 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रही हैं. नौकरी, परिवार और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपने सपने को साकार किया, जो उनकी अदम्य इच्छाशक्ति और अनुशासन का प्रमाण है.

उन्होंने बताया कि उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी अत्यंत उत्कृष्ट रही है. उन्होंने अपनी 12वीं की शिक्षा सुशीला गर्ल्स इंटर कॉलेज, गाजियाबाद से प्राप्त की. इसके बाद साल 2006 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन एलिमेंट्री टीचर एजुकेशन किया. साल 2008 में उन्होंने बीएससी पूरी की और उसी साल दिल्ली में सरकारी शिक्षक के रूप में कार्यभार संभाला. शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी. साल 2013-14 में उन्होंने गणित से एमए किया और बी.एड. की डिग्री प्राप्त की. इसके अतिरिक्त, साल 2020-21 में उन्होंने समाजशास्त्र में एमए भी किया.

धैर्यपूर्वक अपने सपने का पीछा जारी
उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उनका चयन सीनियर लेक्चरर, नायब तहसीलदार और सहायक जिला रोजगार अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी हुआ. हालांकि, उस समय बच्चों की जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने इन पदों को ज्वाइन नहीं किया. उनका लक्ष्य उच्च प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करना था, इसलिए उन्होंने धैर्यपूर्वक अपने सपने का पीछा जारी रखा.

पति के सपनों को किया साकार
सविता रानी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, पति और परिवार को देती हैं. उन्होंने भावुक होकर बताया कि यह सपना उनके पति का था, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से साकार किया. उनके परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें हर कठिन परिस्थिति में आगे बढ़ने की शक्ति दी. उनकी सफलता न केवल महिलाओं के लिए, बल्कि उन सभी अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है, जो पारिवारिक और व्यावसायिक जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं.

उन्होंने यह साबित कर दिया कि दृढ़ निश्चय और समय के सदुपयोग से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है. उन्होंने युवाओं के लिए संदेश दिया और कहा कि बड़े सपने देखिए और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत कीजिए. केवल प्रार्थना करने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि उसके लिए निरंतर प्रयास करना आवश्यक है. अपने समय का सही उपयोग करें और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ते रहें.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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