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तेलंगाना हाईकोर्ट ने हैदराबाद के बांदलगुडा स्थित बैरिस्टर फातिमा ओवैसी एजुकेशनल कैंपस में एडमिशन को लेकर छात्रों और अभिभावकों को बड़ी चेतावनी दी है. कोर्ट ने कहा कि छात्र यहां अपने जोखिम पर प्रवेश लें क्योंकि यह संस्थान सल्कम चेरुवू तालाब के डूब क्षेत्र (FTL) में बना है. झील पर अतिक्रमण के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फिलहाल नए निर्माण पर रोक लगा दी है.
कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया.
नई दिल्ली. हैदराबाद के बांदलगुडा स्थित बैरिस्टर फातिमा ओवैसी एजुकेशनल कैंपस को लेकर तेलंगाना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ने हड़कंप मचा दिया है. कोर्ट ने छात्रों और अभिभावकों को सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि वे इस संस्थान में अपने जोखिम पर ही प्रवेश लें. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान छात्रों और अभिभावकों को आगाह किया कि इस संस्थान के कैंपस की स्थिति कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी. जस्टिस एनवी श्रवण कुमार ने स्पष्ट कहा कि जो भी छात्र यहां एडमिशन लेंगे वे अपनी जिम्मेदारी पर ऐसा करेंगे क्योंकि भविष्य में संस्थान के खिलाफ आने वाला फैसला उनकी पढ़ाई को प्रभावित कर सकता है.
दरअसल, याचिका में आरोप लगाया गया है कि AIMIM विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा स्थापित सालार-ए-मिल्लत एजुकेशनल ट्रस्ट का यह कैंपस सल्कम चेरुवू तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) और बफर जोन के भीतर बनाया गया है.
HYDRAA पर पक्षपात के आरोप
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में चिंता जताई कि सरकारी एजेंसी HYDRAA (हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स एंड एसर्ट्स प्रोटेक्शन एजेंसी) केवल गरीबों और मध्यम वर्ग के अतिक्रमणों को हटा रही है लेकिन इस हाई-प्रोफाइल कैंपस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए कोर्ट ने भी माना कि प्रथम दृष्टया निर्माण झील के क्षेत्र में प्रतीत होता है.
कोर्ट के सख्त निर्देश
· नोटिस बोर्ड पर जानकारी: कोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन को आदेश दिया है कि वे अपने नोटिस बोर्ड पर इस लंबित अदालती मामले की जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करें.
· निर्माण पर रोक: कोर्ट ने संस्थान को सल्कम चेरुवू क्षेत्र के भीतर किसी भी तरह के नए निर्माण करने से रोक दिया है.
· अकादमिक सत्र पर असर: चूंकि नया सत्र 1 जून से शुरू होना है कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगला आदेश सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और एडमिशन प्रक्रिया को प्रभावित करेगा.
मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को तय की गई है, जिसमें GHMC और TG-bPASS अधिनियमों के तहत निर्माण की वैधता की जांच की जाएगी.
सवाल-जवाब
हाई कोर्ट ने छात्रों को ‘रिस्क’ पर एडमिशन लेने की चेतावनी क्यों दी?
क्योंकि आरोप है कि यह कॉलेज एक झील (तालाब) के डूब क्षेत्र में अवैध रूप से बना है. अगर कोर्ट इसे अवैध घोषित कर तोड़फोड़ का आदेश देता है, तो वहाँ पढ़ रहे छात्रों का भविष्य और साल खराब हो सकता है. इसीलिए कोर्ट ने उन्हें पहले ही सतर्क कर दिया है.
क्या कॉलेज में आगे का निर्माण जारी रह सकता है?
नहीं, तेलंगाना हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर संस्थान को तालाब क्षेत्र के भीतर किसी भी तरह के आगे के निर्माण कार्य से पूरी तरह रोक दिया है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें


