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इकाना के जिन्न से परेशान ऋषभ पंत, टीम के हर खिलाड़ी को कर रहा है परेशान, घरेलू मैदान से जंग लड़ रहा कप्तान

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नई दिल्ली. अपने ही घर में हारने का दर्द कुछ अलग ही होता है. वो भीड़ जो उत्साह बढ़ाने आई थी, अचानक ख़ामोश हो जाती है, जानी-पहचानी पिच, मैदान के वही कोने, अपने ड्रेसिंग रूम का सुकून, इनमें से कुछ भी काम नहीं आता.  आईपीएल 2026 में लखनऊ एक ऐसी टीम है जो इस दर्द से अच्छी तरह समझती है.

इस सीजन में इकाना क्रिकेट स्टेडियम में गुजरात टाइटन्स के खिलाफ, का अपना लगातार दूसरा घरेलू मैच हार गए.  विडंबना देखिए, इस सीजन की दोनों जीतें बाहर मिलीं, ईडन गार्डन्स और हैदराबाद में.  जिसे वे अपना ‘गढ़’ कहते हैं, वह इकाना उनके लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हो रहा है.

आंकड़ों का आइना
कड़वे सच से शुरुआत करते हैं इकाना में LSG ने अब तक 22 मैचों में से केवल 9 जीते हैं, जीत का प्रतिशत महज 41% के आसपास.  चेपॉक में   CSK और वानखेड़े में  MI अपने घरेलू मैदान को किले में बदल देती हैं, जहाँ जीत का प्रतिशत 60–70% तक रहता है वहीं  LSG के लिए यही मैदान कमज़ोरी की जगह बन गया है.  2025 में तो हद हो गई, आठ घरेलू मैचों में छह हार, जिनमें पाँच लगातार और 2026 भी राहत नहीं लाया. पहले मैच में Delhi Capitals ने यहीं 6 विकेट से हराया, LSG मात्र 141 पर सिमट गई. दूसरे में वही कहानी, अच्छी शुरुआत, फिर पतन, फिर 164/8 और मेहमान टीम की आसान जीत.

गुजरात से  हार एक केस स्टडी

पावरप्ले के अंत में LSG 60/2, इस सीजन का सबसे शानदार पावरप्ले स्कोर।लेकिन जैसे ही फील्ड फैली, सब बिखर गया.  प्रसिद्ध कृष्णा ने इकाना की पिच पर उछाल और सटीक लेंथ से LSG के मध्यक्रम को तहस-नहस कर दिया 4/28. एडेन मार्कराम (30) और आयुष बदोनी (9) जल्दी आउट हुए, जिसके बाद निकोलस पूरन और अब्दुल समद भी क्रीज़ पर टिक नहीं सके.  17वें ओवर में स्कोर 120/6 था और टीम गहरे संकट में नज़र आ रही थी.  अंत में जॉर्ज लिंडे (10 गेंदों में 16 रन) और मोहम्मद शमी (5 गेंदों में 12*) ने संघर्षपूर्ण पारियां खेलकर लाज बचाई और टीम को 164/8 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया.  यह इस टीम की एक स्थायी और चिंताजनक कहानी बन गई है, जब मार्कराम और निकलस पूरन जैसे नामी बल्लेबाजों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए, तब जॉर्ज लिंडे और मोहम्मद शमी जैसे पुछल्ले बल्लेबाज़ टीम की नैया पार लगा रहे होते हैं.

रिकॉर्डस की ज़बानी: इकाना में LSG का सफर

इकाना में LSG का रिकॉर्ड 22 मैचों में 9 जीत, 13 हार, एक स्पष्ट संकट की तस्वीर है.  इस मैदान पर लगभग 60% मैच टॉस जीतने वाली टीमों ने जीते हैं.  2024 से अब तक 11 में से 7 बार लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमें सफल रही हैं. यही वह मैदान है जहाँ 2024 में KKR ने 235/6 का विशाल स्कोर बनाया और यही वह जगह है जहाँ उसी सीजन LSG 108 पर सिमट गई थी.  एक ही मैदान, दो चेहरे और दोनों चेहरों में LSG की असंगति साफ दिखती है.

घर में हार के पीछे तकनीकी कारण

इकाना की काली मिट्टी वाली पिच गेंद को धीमा करती है और असमान उछाल देती है.  LSG का पूरा बल्लेबाजी टेम्पलेट ‘बॉल-ऑन-द-बैट’ शैली पर टिका है.  ऋषभ पंत, निकोलस पूरन और मिचेल मार्श जैसे बल्लेबाज तब सबसे घातक होते हैं जब गेंद तेज़ी से बल्ले पर आए.  इकाना की धीमी सतह पर उनकी टाइमिंग बिगड़ती है और बड़े शॉट खेलना एक बड़ा जोखिम बन जाता है. यह सिर्फ एक तकनीकी बाधा नहीं है, बल्कि टीम की पहचान का भी संकट है; क्योंकि जिस आक्रामकता को वे अपनी ताकत मानते हैं, वही इस मैदान पर उनकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो रही है.

ओस और टॉस का गणित

इकाना में शाम के मैचों में दूसरी पारी बल्लेबाजी के लिए अनुकूल हो जाती है, ओस के कारण गेंद स्किड करती है और स्पिनरों की पकड़ कम होती है टॉस हारना, टीम को पहले ओवर से ही दबाव में डाल देता है. घर में हार का गम अलग होता है लेकिन अगर उस गम को सबक़ में न बदला जाए, तो वह सिर्फ़ गम बनकर रह जाती है. जब तक LSG इस पहेली को नहीं सुलझाती, इकाना का यह मैदान उनसे वही पुराने सवाल पूछता रहेगा और जवाब शायद उनके पास नहीं होगा.



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