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Ground Report Kanpur : कानपुर के कई इलाकों में लोग कई साल से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. कहीं लोग टैंकर के भरोसे हैं, तो कहीं दूसरे घरों से पीने का पानी लाना पड़ता है. लोकल 18 से जूही बंबुरहिया में रहने वाली मुन्नी देवी बताती हैं कि वर्षों से साफ पानी नहीं मिला. सुनील कनौजिया बताते हैं कि करीब 35 साल से यही समस्या बनी हुई है. पहले पानी में क्रोमियम मिलने की बात सामने आई थी. पिछले साल जांच में पारा मिलने का दावा किया गया. गंदे पानी का असर खेतों और पशुओं तक पर पड़ रहा है.
कानपुर. यूपी के कानपुर शहर को साफ पानी देने के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं. योजनाएं बनती हैं, पाइपलाइन डाली जाती है, ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाते हैं और बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं. लेकिन जमीनी सच्चाई इससे अलग है. कानपुर के कई इलाकों में आज भी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. जूही बंबुरहिया, पनकी, भौंती, जाजमऊ के आसपास के गांवों और दक्षिण क्षेत्र के कई हिस्सों में लोगों को गंदा, बदबूदार और रंग बदला हुआ पानी मिल रहा है. कहीं लोग टैंकर के भरोसे हैं, तो कहीं दूसरे घरों से पीने का पानी लाना पड़ता है. लोकल 18 से जूही बंबुरहिया निवासी मुन्नी देवी बताती हैं कि वर्षों से साफ पानी नहीं मिला. आज भी पीने लायक पानी घर में नहीं आता. मजबूरी में दूसरे अपार्टमेंटों से पानी भरकर लाना पड़ता है.
कभी पीला, कभी हरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की हालत देखकर डर लगता है. कभी पीला पानी आता है, कभी झाग वाला, कभी बदबूदार और कई बार हरे रंग का पानी भी टंकियों में भर जाता है. शिकायतें वर्षों से हो रही हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ. स्थानीय निवासी सुनील कनौजिया बताते हैं कि 30 से 35 साल से यही समस्या बनी हुई है. उनका कहना है कि पहले पानी में क्रोमियम मिलने की बात सामने आई थी. पिछले साल जांच में पारा मिलने का दावा किया गया, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई.
मुंह में छाले, किडनी रोग
चकेरी क्षेत्र के किशनपुर और आसपास के गांवों में भी लोग दूषित पानी से परेशान हैं. लोगों का कहना है कि पानी में हानिकारक तत्व मिलने की शिकायत पहले भी उठती रही है. गंदे पानी का असर खेतों और पशुओं तक पर पड़ रहा है. कई जगह जमीन पर सफेद केमिकल जैसे निशान दिखते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पहले अच्छी खेती होती थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं. लोगों का कहना है कि गंदे पानी की वजह से त्वचा रोग, मुंह के छाले, पेट दर्द, लीवर, किडनी और दूसरी बीमारियां बढ़ रही हैं. गरीब परिवार इलाज के खर्च से टूट रहे हैं. करोड़ों खर्च होने के बाद भी साफ पानी कब मिलेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


