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Udaipur Doctors Medical Miracle: उदयपुर के डॉक्टरों ने एक अनोखा और चुनौतीपूर्ण केस सफलतापूर्वक संभालते हुए बिना ऑपरेशन और बिना बेहोशी के मरीज की सांस की नली से 32MM का स्क्रू निकाल दिया. यह प्रक्रिया ब्रोंकोस्कोपी तकनीक के जरिए की गई, जिसमें बिना चीरा लगाए अंदर फंसी वस्तु को सुरक्षित बाहर निकाला जाता है. इस दौरान डॉक्टरों ने अत्यंत सावधानी और कौशल का परिचय दिया, जिससे मरीज को किसी प्रकार की जटिलता का सामना नहीं करना पड़ा. यह सफलता आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञता का बेहतरीन उदाहरण है, जो भविष्य में ऐसे मामलों के लिए नई उम्मीद जगाती है.
उदयपुर: उदयपुर शहर के बड़ी स्थित टीबी एवं चेस्ट अस्पताल में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल मामले को आसान तरीके से हल कर एक 17 वर्षीय युवक को नया जीवन दिया है. रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित इस अस्पताल में युवक की सांस की नली में फंसे 32 एमएम लंबे लोहे के स्क्रू को बिना किसी ऑपरेशन और बिना बेहोश किए सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया. जानकारी के अनुसार युवक सुथारी का काम कर रहा था, इसी दौरान गलती से उसने स्क्रू निगल लिया. यह स्क्रू सीधे उसके दाएं फेफड़े की श्वास नली में जाकर फंस गया.इसके बाद युवक को लगातार खांसी, छाती में तेज दर्द और बलगम में खून आने जैसी गंभीर परेशानी होने लगी.परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहा उसे भर्ती किया गया.डॉक्टरों ने जांच के बाद स्थिति को गंभीर मानते हुए अगले ही दिन इस प्रक्रिया को करने का फैसला लिया.
आमतौर पर ऐसे मामलों में मरीज को बेहोश कर सर्जरी या रिजिड ब्रोंकोस्कोपी की जरूरत पड़ती है, लेकिन यहां डॉक्टरों ने फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया.इस तकनीक की मदद से बिना चीर-फाड़ और बिना एनेस्थीसिया के स्क्रू को बाहर निकाल लिया गया.
जटिल मामलों का इलाज आधुनिक तकनीक से संभव
सहायक प्रोफेसर डॉ. महेश माहिच ने बताया कि यह मामला काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि स्क्रू फेफड़े की नली में गहराई तक फंसा हुआ था.जरा सी चूक मरीज के लिए खतरनाक हो सकती थी.लेकिन अनुभवी टीम ने सावधानीपूर्वक प्रक्रिया को अंजाम दिया.वहीं कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राहुल जैन ने इस सफलता को बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि बिना सर्जरी और बिना जनरल एनेस्थीसिया के इस तरह का केस संभालना डॉक्टरों की उच्च स्तर की दक्षता को दर्शाता है. इससे यह भी साबित होता है कि अब यहां जटिल से जटिल मामलों का इलाज आधुनिक तकनीक से संभव है.
मार्गदर्शन में पूरी टीम ने इस प्रक्रिया को सफल बनाया
सीनियर प्रोफेसर डॉ. महेंद्र कुमार बैनाड़ा के मार्गदर्शन में पूरी टीम ने इस प्रक्रिया को सफल बनाया. डॉक्टरों का कहना है कि फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी तकनीक मरीज के लिए सुरक्षित और कम जोखिम वाली होती है, जिससे जल्दी रिकवरी भी होती है. फिलहाल युवक की हालत स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है. इस अनोखी चिकित्सा सफलता ने एक बार फिर उदयपुर के सरकारी अस्पतालों की क्षमता और विशेषज्ञता को साबित कर दिया है.
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