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किसानों हो जाएं अलर्ट! इस बार पहले लगाई धान तो हो जाएंगे परेशान, एक्सपर्ट ने बताया उपाय

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धान बोने से पहले हो जाएं सावधान! मौसम वैज्ञानिक ने किसानों को ये खास नई सलाह

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वैज्ञानिक डॉक्टर निराला ने बताया कि पूरा देश अल नीनो का मार झेल रहा है. यही कारण है कि आसमान से आग बरस रहे हैं. ऐसा ही आगे भी जारी रहने की संभावना है. ऐसा होता है तो धान की खेती पर बुरा असर पड़ेगा. इस स्थिति में किसानों को मौसम का ध्यान रखते धान लगाने की जरूरत है.

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जहानाबाद : उत्तर भारत में इस वक्त आग बरस रहा है. गर्मी से हर जीव परेशान है. यहां तक की किसानों की फसलें भी प्रभावित हो रही है. उधर, मौसम विभाग ने बारिश को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी है. ऐसे में खरीफ फसल भी प्रभावित हो सकता है. कृषि विज्ञान केंद्र गंधार के विषय वस्तु वैज्ञानिक डॉक्टर निराला ने Local 18 से कहा कि इस बार धान की फसल पर बारिश का बुरा असर पड़ सकता है. IMD का मानना है कि अल नीनो का व्यापक असर मौसम पर पड़ा है, जिसके चलते इस साल बारिश होने की संभावना बहुत कम है. ऐसे में किसानों को अभी धान की खेती से बचना चाहिए.

पूरा देश अल नीनो का मार झेल रहा
वैज्ञानिक डॉक्टर निराला ने बताया कि पूरा देश अल नीनो का मार झेल रहा है. यही कारण है कि आसमान से आग बरस रहे हैं. ऐसा ही आगे भी जारी रहने की संभावना है. ऐसा होता है तो धान की खेती पर बुरा असर पड़ेगा. इस स्थिति में किसानों को मौसम का ध्यान रखते हुए कम अवधि और मध्यम अवधि वाले धान लगाने की जरूरत है. ऐसा इसलिए, यदि आप कम अवधि वाले धान की बुआई करते हैं तो देर से भी बुआई कर सकते हैं और जुलाई में बिचड़ा डालकर अगस्त में धान लगाते हैं तो बारिश का पानी प्राप्त कर सकते हैं.

‘देर से करें धान की खेती’ 
उन्होंने आगे कहा कि अगस्त – सितंबर में मगध क्षेत्र में बारिश की संभावना है. ऐसे में कम अवधि वाले धान की बुआई करते हैं तो रबी फसल भी आसानी से लगा सकते हैं और उससे भी फसल पा सकते हैं. हम किसानों से यही आग्रह करेंगे कि इस बार बिचड़ा भी जुलाई में ही लगाएं, ताकि आपका धान प्रभावित न हो. जिस प्रकार से मौसम वैज्ञानिक ने सलाह दी है.

ये हैं कुछ कम और मध्यम अवधि की किस्में 
डॉक्टर निराला का मानना है कि मध्यम अवधि और कम अवधि में धान की कुछ किस्मों को किसान अपने खेतों में बुआई कर सकते हैं.

किस्म                   अवधि             उत्पादन क्षमता
राजेंद्र श्वेता       120-125 दिन    प्रति कट्ठा 1.5 मन
सबौर हर्षित     110-115 दिन    45 से 50 क्विंटल/हेक्टेयर
सबौर सम्पन्न    110-115 दिन    60-65 क्विंटल/हेक्टेयर
राजेंद्र सरस्वती                          40-45 क्विंटल/हेक्टेयर

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें



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