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शुते बनर्जी और चंदू सरवटे की, जिन्होंने अंतिम विकेट के लिए एक ऐसी साझेदारी की जो लगभग 80 सालों तक अटूट रही. बाद में भारत के ही दो बल्लेबाजों ने 80 साल बाद इस रिकॉर्ड को तोड़ा.
80 साल पहले 1946 में शूते बनर्जी और चंदू सरवटे ने इंग्लैंड में नंबर 10-11 पर खेलकर लगाया शतक और बनाया रिकॉर्ड
नई दिल्ली. इतिहास क्रिकेट के खेल में अक्सर शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों और उनके शानदार शतकों की चर्चा होती है लेकिन इतिहास के पन्नों में कुछ ऐसी कहानियां भी दर्ज हैं, जहां जीत की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो जाने के बाद असली रोमांच शुरू हुआ. साल 1946 में लंदन के ‘द ओवल’ मैदान पर दो भारतीय पुछल्ले बल्लेबाजों ) ने एक ऐसा चमत्कार किया, जिसने क्रिकेट की किताबों को हमेशा के लिए बदल दिया.
यह कहानी है शुते बनर्जी और चंदू सरवटे की, जिन्होंने अंतिम विकेट के लिए एक ऐसी साझेदारी की जो लगभग 80 सालों तक अटूट रही. बाद में भारत के ही दो बल्लेबाजों ने 80 साल बाद इस रिकॉर्ड को तोड़ा.
जब हार के मुहाने पर खड़ी थी टीम इंडिया
यह मुकाबला भारतीय टीम और सरे के बीच खेला जा रहा था. मैच के दौरान भारतीय पारी पूरी तरह लड़खड़ा गई और महज 205 रनों पर 9 विकेट गिर चुके थे. मैदान पर मौजूद दर्शकों और विरोधी टीम के लिए यह मुकाबला सिर्फ एक औपचारिकता मात्र रह गया था. किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि भारत सम्मानजनक स्कोर तक भी पहुंच पाएगा. तभी मैदान पर भारत के आखिरी दो खिलाड़ी उतरे एक लेग स्पिनर (चंदू सरवटे) और एक मीडियम पेसर (शुते बनर्जी). दोनों का मुख्य काम गेंदबाजी करना था, बल्लेबाजी नहीं.
ओवल के मैदान पर अविश्वसनीय पलटवार
जैसे ही ये दोनों क्रीज पर टिके, ओवल के मैदान ने क्रिकेट इतिहास का सबसे अनोखा पलटवार देखा. दोनों गेंदबाजों ने सरे के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण का डटकर सामना किया. चंदू सरवटे ने सूझबूझ से खेलते हुए शानदार 124 रन बनाए. शुते बनर्जी ने भी विरोधी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए 121 रन जड़ दिए. दोनों ने मिलकर 10वें विकेट के लिए रिकॉर्ड 249 रनों की साझेदारी की. क्रिकेट इतिहास में यह पहला मौका था जब नंबर 10 और नंबर 11 के बल्लेबाजों ने एक ही पारी में शतक बनाए हों. इस ऐतिहासिक पारी की बदौलत भारत ने न केवल मैच में वापसी की, बल्कि अंत में इस मुकाबले को 9 विकेट से जीत लिया. यह साझेदारी केवल रनों की नहीं, बल्कि साहस और कभी न हार मानने वाले जज्बे की मिसाल थी.
2025 में टूटा सालों पुराना रिकॉर्ड
इस अकल्पनीय रिकॉर्ड की बराबरी करने में दुनिया भर के बल्लेबाजों को लगभग आठ दशक लग गए. शुते बनर्जी और चंदू सरवटे का यह रिकॉर्ड साल 2025 में जाकर दोहराया गया. घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) में मुंबई के दो खिलाड़ियों, तनुष कोटियन और तुषार देशपांडे ने नंबर 10 और 11 पर बल्लेबाजी करते हुए एक ही पारी में शतक जमाए. यह ऐतिहासिक घटना याद दिलाती है कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, जहां आखिरी गेंद और आखिरी विकेट गिरने तक कुछ भी असंभव नहीं होता.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


