नई दिल्ली: दुनिया भर में मची उथल-पुथल, विशेषकर पश्चिम एशिया के तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. लेकिन इस संकट के बीच भारत के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कमर कस ली है. ग्रामीण इलाकों में चल रही कल्याणकारी और बुनियादी ढांचे की योजनाओं की रफ्तार धीमी न पड़े, इसके लिए मंत्रालय ने एक व्यापक समीक्षा की है. सरकार का सीधा फोकस रोजगार, समय पर फंड, पक्के मकान और शानदार ग्रामीण सड़कों पर है.
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण रोजगार, आवास निर्माण, सड़क विकास और जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं पर कोई नकारात्मक असर न पड़े, लाभार्थियों को समय पर मदद मिले, फंड की कमी न हो और योजनाओं का काम बिना रुकावट चलता रहे, इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं.
रोजगार और विकास पर सरकार का फोकस
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 प्रस्तावित वीबी-जीरामजी 2025 लागू होने तक पहले की तरह पूरी तरह प्रभावी रहेगा. यानी ग्रामीण परिवारों को रोजगार देने में कोई रुकावट नहीं आएगी. मनरेगा के तहत मांग पर काम देने, समय पर मजदूरी भुगतान और अन्य सभी कानूनी अधिकार पहले की तरह जारी रहेंगे. केंद्र सरकार द्वारा तय मौजूदा मजदूरी दरें फिलहाल लागू रहेंगी. मजदूरी समय पर मिले, इसके लिए लगभग ₹17,744 करोड़ की पहली किस्त जल्द जारी की जा रही है. नए कानून के लागू होने पर 125 दिन तक रोजगार की बेहतर गारंटी देने का प्रस्ताव है. संशोधित मजदूरी दरें बाद में अलग से घोषित की जाएंगी.
ग्रामीण आवास योजना पर खास जोर
ग्रामीण इलाकों में हर जरूरतमंद को घर उपलब्ध कराने के लक्ष्य के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. निर्माण सामग्री की सप्लाई और कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए समय पर डीबीटी भुगतान, सख्त निगरानी, जियो-टैगिंग और अधूरे घरों को जल्दी पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है. इसके साथ ही मजदूरी, शौचालय, पेयजल, गैस कनेक्शन और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी एक साथ जोड़कर लाभ दिया जा रहा है. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मटेरियल बैंक जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि निर्माण सामग्री समय पर और उचित लागत पर उपलब्ध हो सके.
ग्रामीण सड़क योजनाएं जारी
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों के अनुसार मौजूदा दरों पर ही कार्यों को मंजूरी दी जा रही है. PMGSY-I, II, III और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों की सड़क परियोजनाओं के ज्यादातर कामों को मंजूरी मिल चुकी है. वे टेंडर की प्रक्रिया में हैं. PMGSY-III के तहत कुछ पुलों से जुड़े कार्य अभी बाकी हैं. PMGSY-IV के तहत लगभग 12,100 किलोमीटर सड़क कार्यों को मंजूरी दी जा चुकी है और ये भी टेंडर चरण में हैं. आगे आने वाली परियोजनाओं में बाजार की मौजूदा दरों और लागत के हिसाब से नई दरें लागू की जाएंगी.
कृषि और प्राकृतिक संसाधनों को मजबूती
भूमि संसाधन विभाग, वाटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में काम कर रहा है. इसका मकसद जल संरक्षण, खेती, बागवानी और चारागाह विकास को बढ़ावा देना है. विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर लगातार समन्वय कर रहा है, ताकि योजना का क्रियान्वयन प्रभावी और जमीन पर दिखने वाला हो.


