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गोंडा का दूधनाथ महादेव मंदिर I temples in gonda

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गोंडा जिले के झंझरी विकासखंड के महादेवा स्थित दूधनाथ महादेव मंदिर श्रद्धा और आस्था का एक प्राचीन केंद्र माना जाता है. यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग के प्रति लोगों की गहरी मान्यता है और दूर-दूर से भक्त भगवान शिव के दर्शन व जलाभिषेक के लिए आते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है.

गोंडा. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी के महादेवा में स्थित दूधनाथ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. इस मंदिर का इतिहास जितना पुराना है, उतनी ही खास इसकी मान्यता भी मानी जाती है. यहां दूर-दूर से लोग भगवान शिव के दर्शन करने और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए आते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है, यानी यह किसी इंसान द्वारा स्थापित नहीं किया गया, बल्कि अपने आप प्रकट हुआ है. यही वजह है कि इस मंदिर की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है. बताया जाता है कि पहले यह शिवलिंग खुले स्थान पर था और लोग यहां आकर पूजा-अर्चना किया करते थे. ग्रामीण के लोकल 18 से बातचीत के दौरान राजमन गिरी बताते हैं कि इस मंदिर के निर्माण की कहानी भी काफी रोचक है. कहा जाता है कि गोंडा के राजा देवी बख्श सिंह एक बार इस स्थान से गुजर रहे थे. तभी उनकी नजर इस दिव्य शिवलिंग पर पड़ी. उन्होंने यहां की आस्था और लोगों की श्रद्धा को देखते हुए इस स्थान पर एक भव्य मंदिर बनवाने का निर्णय लिया. इसके बाद राजा देवी बख्श सिंह ने यहां मंदिर का निर्माण कराया, जिससे यह स्थान और भी प्रसिद्ध हो गया.

घनश्याम गिरि बताते हैं कि जब मंदिर का निर्माण हो रहा था तो मंदिर की शिखर रात में अपने आप गिर जाती थी दिन में निर्माण होता था रात में गिर जाती थी. इस चीज से परेशान होकर राजा देवी बख्श सिंह ने एक पुरोहित से अपनी परेशानी बताई और उन्होंने बताया कि हम दिन में मंदिर का निर्माण करवाते है और रात में मंदिर अपने आप गिर जाती है तो उसे पुरोहित ने बताया कि मंदिर का निर्माण करवाइए और एक स्थान ऐसा छोड़ दीजिए जहां से बारिश के समय पर उस पानी सीधा भोलेनाथ पर आ सके तब से एक स्थान वहां छोड़ गया है और आज भी वह स्थान वैसे ही है.

कितना पुराना है शिवलिंग

घनश्याम गिरि बताते हैं कि हम लोग अपने पूर्वजों से इस शिवलिंग के बारे में सुनते आ रहे हैं लेकिन किसी को नहीं पता है या शिवलिंग कितना पुराना है इसको काफी प्राचीन शिवलिंग माना जाता है माना जाता है कि इस शिवलिंग का संबंध काफी पुराना माना जाता है.  मंदिर के पुजारी शिवकुमार गिरी बताते हैं कि मंदिर बनने के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई. खासकर सोमवार, शुक्रवार, सावन के महीने और महाशिवरात्रि के मौके पर यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है. भक्त जलाभिषेक करते हैं और भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. मंदिर का शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है.

नाम के पीछे का क्या है कारण

शिवकुमार गिरी बताते हैं कि इस मंदिर पर दूध चढ़ाने की विशेष मानता है इसलिए इस मंदिर का नाम दूधनाथ है और इसलिए इस मंदिर पर दूध भी चढ़ाया जाता है वैसे तो हर शिवलिंग पर दूध से अभिषेक किया जाता है लेकिन यहां से करने का एक विशेष महत्व है. दूधनाथ महादेव मंदिर की एक और खास बात यह है कि यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा यहां पूरी होती है. यही कारण है कि लोग बार-बार इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं. आसपास के गांवों के लोग तो इसे अपनी आस्था का मुख्य केंद्र मानते हैं. आज के समय में भी यह मंदिर अपनी पुरानी परंपराओं और मान्यताओं को संजोए हुए है. यहां पूजा-पाठ का क्रम नियमित रूप से चलता रहता है और मंदिर परिसर में हमेशा भक्ति का माहौल बना रहता है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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