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चित्रकूट में वन विभाग नहीं, बंदरो से निपटने की जिम्मेदारी नगर व ग्राम पंचायत को, इनको करना होगा फोन

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धर्म नगरी चित्रकूट में बंदरों का आतंक अब लोगों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है.प्रभु श्रीराम की तपोस्थली होने के कारण यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर दिन पहुंचते हैं और धार्मिक स्थलों के आसपास बंदरों की मौजूदगी आम बात है. कई बार यही बंदर लोगों के हाथ से प्रसाद, खाने-पीने का सामान और मोबाइल तक छीन लेते हैं, और कई इलाकों में बंदरों के झुंड घरों में घुस जाते हैं, और छतों में पड़े कपड़े या अन्य सामनों का काफी ज्यादा नुकसान भी कर देते है.

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चित्रकूटः यूपी के धर्म नगरी चित्रकूट में बंदरों का आतंक अब लोगों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है. प्रभु श्रीराम की तपोस्थली होने के कारण यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर दिन पहुंचते हैं और धार्मिक स्थलों के आसपास बंदरों की मौजूदगी आम बात है. कई बार यही बंदर लोगों के हाथ से प्रसाद, खाने-पीने का सामान और मोबाइल तक छीन लेते हैं, और कई इलाकों में बंदरों के झुंड घरों में घुस जाते हैं, और छतों में पड़े कपड़े या अन्य सामनों का काफी ज्यादा नुकसान भी कर देते है.

स्थानीय निकाय पकड़ेंगे बंदर

वही अब इस समस्या से निपटने के लिए चित्रकूट जिला प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू कर दी है. पहले लोग बंदरों की शिकायत सीधे वन विभाग से करते थे, लेकिन अब बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को सौंप दी गई है.और लोगों को वन विभाग में अब इसके लिए फोन नहीं करना पड़ेगा. बता दे कि जिले में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई है. जो शरारती और आक्रामक बंदरों को पकड़कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ने का काम करेंगे.

नगर पंचायत और ग्राम प्रधान की रेस्क्यू की जिम्मेदारी

इस संबंध में प्रत्यूष कुमार कटियार ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि नई व्यवस्था के तहत शहर क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने का काम नगर पालिका करेगी,वही कस्बों में यह जिम्मेदारी नगर पंचायतों को दी गई है, जबकि गांवों में ग्राम प्रधानों के माध्यम से बंदरों का रेस्क्यू कराया जाएगा. इसके लिए हर क्षेत्र में अलग-अलग टीम गठित की जाएगी, जिसमें बंदरों को पकड़ने के लिए अनुभव रखने वाले लोगों को शामिल किया जाएगा,और उनको पैसा भी दिया जाएगा. उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि इन टीमों को विशेष प्रशिक्षण और जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि बंदरों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके,और कस्बे से दूर जंगलों में इनको सुरक्षित स्थानों में छोड़ा जाएगा.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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