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Bhilwara News Hindi : भीलवाड़ा में बढ़ती गर्मी के बीच मिट्टी के मटकों की मांग तेजी से बढ़ रही है. खास बात यह है कि इस बार बाजार में काले और लाल मटकों को लेकर अलग ही चर्चा छिड़ी हुई है. लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर कौन सा मटका पानी को ज्यादा ठंडा रखता है. पारंपरिक बनाम आधुनिक पसंद के बीच यह मुकाबला ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है.
मटका बनाने वाले कारीगरों के अनुसार लाल मटका पारंपरिक होता है और यह सामान्य मिट्टी से बनाया जाता है. इसकी सतह हल्की छिद्रयुक्त होती है, जिससे पानी धीरे-धीरे रिसता है और वाष्पीकरण के कारण पानी ठंडा रहता है. यह प्रक्रिया प्राकृतिक होती है और लंबे समय से लोग इसी तरह के मटकों का उपयोग करते आ रहे हैं. लाल मटके की खासियत यह भी है कि यह पानी को मीठा स्वाद देता है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसकी मांग बनी रहती है.

भीलवाड़ा – गर्मी का असर जैसे-जैसे तेज होता जा रहा है, वैसे-वैसे लोगों का रुझान पारंपरिक ठंडक देने वाले साधनों की ओर बढ़ रहा है. फ्रिज के बावजूद मिट्टी के मटकों की मांग कम नहीं हुई है, बल्कि इन दिनों बाजारों में इनकी बिक्री तेजी से बढ़ रही है. खास बात यह है कि इस बार लोगों के बीच एक खास चर्चा बनी हुई है कि काला मटका ज्यादा ठंडा पानी देता है या लाल मटका। इसी सवाल के चलते बाजार में दोनों तरह के मटकों की खूब खरीदारी हो रही है और दुकानदार भी ग्राहकों को अलग-अलग फायदे बता रहे हैं.

भीलवाड़ा के बाजारों में इस समय दोनों तरह के मटकों की अच्छी खासी मांग देखी जा रही है. ग्रामीण इलाकों से आने वाले ग्राहक अब भी लाल मटके को ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि यह पारंपरिक और सस्ता होता है. वहीं शहर के युवा और आधुनिक सोच वाले लोग काले मटकों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं. डिजाइन और स्टाइल के कारण भी काले मटके लोगों को पसंद आ रहे हैं.
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वहीं काले मटके को खास प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. इसे बनाने के बाद भट्टी में विशेष तरीके से पकाया जाता है, जिससे इसका रंग काला हो जाता है. काला मटका धूप को कम अवशोषित करता है और अंदर का तापमान संतुलित बनाए रखने में मदद करता है. कुछ लोगों का मानना है कि काला मटका पानी को ज्यादा देर तक ठंडा रखता है, खासकर जब इसे छांव में रखा जाए. इसी कारण शहरों में काले मटकों की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है.

पानी ठंडा होने का मुख्य कारण मटके की मिट्टी और उसकी गुणवत्ता होती है, न कि केवल उसका रंग. अगर मटका अच्छी मिट्टी से बना है और सही तरीके से तैयार किया गया है, तो वह किसी भी रंग का हो, पानी को ठंडा रखेगा. इसलिए खरीदारी करते समय केवल रंग पर ध्यान देने के बजाय उसकी गुणवत्ता और बनावट पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.

कीमत की बात करें तो लाल मटके अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं और हर वर्ग के लोग इन्हें आसानी से खरीद सकते हैं. दूसरी ओर काले मटके थोड़े महंगे होते हैं, क्योंकि इन्हें बनाने में ज्यादा मेहनत और विशेष प्रक्रिया लगती है. इसके बावजूद गर्मी से राहत पाने के लिए लोग कीमत की परवाह किए बिना अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार मटके खरीद रहे हैं.

भीलवाड़ा में इस बार मटकों को लेकर एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहां लोग पारंपरिक और आधुनिक दोनों विकल्पों के बीच तुलना कर रहे हैं. चाहे काला मटका हो या लाल, दोनों ही अपनी-अपनी खूबियों के कारण बाजार में छाए हुए हैं. भीषण गर्मी के बीच मिट्टी के मटकों की बढ़ती मांग यह साबित करती है कि आज भी लोग प्राकृतिक और सस्ते उपायों को प्राथमिकता दे रहे हैं.


