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High Court Action on Digital Arrest: बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 23 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले चार आरोपियों को जमानत देने से दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ मना कर दिया है. कोर्ट ने मनी ट्रेल और मास्टर माइंड की गिरफ्तारी का जिक्र भी अपने ऑर्डर में किया है.
हाईकोर्ट के सख्त रुख ने कुछ लोगों के गले सुखा दिए हैं. (एआई इमेज)
High Court Action on Digital Arrest: जमा-पूंजी पर गिद्ध नजरें गड़ाए बैठे ‘अफसरों’ की दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसी हेकड़ी निकाली है, कि कोर्ट रूम में उनके गले सूख गए. दरअसल, ये वे ‘अफसर’ हैं, जिन्होंने खुद को पुलिस का अधिकारी बताकर एक 70 वर्षीय बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट किया था.
इन ठगों ने बुजुर्ग को करीब 22.92 करोड़ रुपये की चपत लगाई थी. वारदात को अंजाम देने वाले इन चारों आरोपियों को कोर्ट ने जमानत देने से साफ मना कर दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज जैन ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि एक ऐसा आपराधिक षड्यंत्र है, जिसकी जड़ें बहुत गहरी हैं.
क्या है पूरा मामला?
सबसे पहले पीड़ित को टेलिकॉम विभाग का कर्मचारी बनकर फोन किया गया. पीड़ित को डराया गया कि उनकी आईडी का इस्तेमाल फाइनेंसियल क्राइम में हुआ है. फिर कॉल को फर्जी पुलिस और जांच अधिकारियों को ट्रांसफर कर दिया गया. बुजुर्ग को वीडियो कॉल के जरिए 24 घंटे निगरानी में रखा गया. उन्हें किसी से बात करने या घर से निकलने की इजाजत नहीं थी. इसी मनोवैज्ञानिक दबाव में ठगों ने उनसे 22.92 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए.
अदालत ने लगाई फटकार, कहा- यह कोई मामूली जुर्म नहीं
आरोपियों ने कोर्ट में दलील दी कि वे तो सिर्फ फैसिलिटेटर थे. उन्हें साजिश का पता नहीं था. लेकिन कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये आरोपी इस साजिश के अहम हिस्सेदार है. जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 1.90 करोड़ रुपये सीधे एक आरोपी के खाते में आए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई है. कोर्ट ने कहा कि अगर इस मोड़ पर आरोपियों को राहत दी गई, तो जांच पूरी तरह प्रभावित हो सकती है.
कोर्ट ने कहा- हर मोहरा अपनी भूमिका बखूबी निभाता है
जस्टिस मनोज जैन ने समाज में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर गहरी चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध वरिष्ठ नागरिकों की लाचारी का फायदा उठाते हैं. जनता के भरोसे को कत्ल करने वाला यह एक संगठित अपराध है, जहां हर मोहरा अपनी भूमिका बखूबी निभाता है. अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करने के कारण पर कहा कि इस गिरोह के कई मास्टरमाइंड अभी भी फरार हैं. ठगी गई करोड़ों की रकम का एक बड़ा हिस्सा अभी तक बरामद नहीं हुआ है. डिजिटल सबूतों और मनी ट्रेल को ट्रैक करने के लिए आरोपियों को पुलिस कस्टडी में रखना जरूरी है.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें


