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Agra Taj Mahal: आगरा के ताजमहल के कई रहस्य आज भी रहस्य ही बने हुए हैं. इन्हीं रहस्यों में से एक है ताजमहल के नीचे बने 22 कमरे, जहां कई लोगों की ओर से अनेकों दावे किए गए हैं. आइए इतिहासकार से जानते हैं कि आखिर इन 22 कमरों को क्यों बंद किया गया है.
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित ताजमहल की खूबसूरती का हर कोई कायल है. मुगलकाल में बनी यह धरोहर हर किसी को पंसद आती है. प्रतिदिन हजारों की संख्या में पर्यटक ताजमहल का दीदार करने आते हैं. ताजमहल की वास्तुकला, नक्कासी और उसके इतिहास को हर कोई दिलचस्पी से सुनना चाहता है. ताजमहल के मुख्य मकबरे के नीचे 22 कमरे बने हुए हैं.
दरअसल इतिहासकारों के अनुसार, यह कमरे ताजमहल की मुख्य इमारत की सुरक्षा और उसके सरंचनात्मक स्थिरता के लिए बनाये गए थे. यह कमरे एक गलियारे के आकर में बने हुए हैं. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि मुगलकाल में बादशाह, रानियां और अन्य मुग़ल शासक यहां गर्मियों में आते थे. दरअसल यह यमुना नदी के किनारे बना हुआ है, जिस कारण यह ठंडा रहता था. गर्मी से बचाव के लिए यह जगह सबसे बेस्ट मानी जाती थी.
खजाना या कोई मूर्ति होने का नहीं है कोई सबूत
आगरा के इतिहासकार मयंक दीक्षित ने बताया कि ताजमहल के नीचे बंद पड़े 22 कमरों का रहस्य सामान्य है. उन्होंने बताया कि इतिहास और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार, यह कमरे एक गालियारे के तौर पर बने हुए हैं. इसमें कोई खजाना या किसी तरह की कोई मूर्तियां नहीं हैं. यह ताजमहल की मुख्य इमारत को एक पिलर की तरह मजबूती प्रदान करते हैं.
एएसआई के अनुसार ये कमरे ताजमहल की मुख्य संरचना की नींव को सहारा देते हैं. ज्यादा भीड़भाड़ से नुकसान का खतरा बना रहता है. इसी डर से कमरों को आम जनता के लिए बंद रखा गया है. इतिहासकार ने कहा कि कुछ लोगों ने दावा किया है कि इन कमरों में कुछ हिंदू मूर्तियां, खजाने आदि हो सकते हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई खास सबूत नहीं मिला है.
1900 के दशक में यह कमरे थे खुले
आगरा के इतिहासकार मयंक दीक्षित ने बताया कि पूर्व में यह कमरे आम जनता के लिए भी खुले थे. सन 1900 में ताजमहल में यह कमरे आसानी से देखे जा सकते थे. समय के साथ धीरे-धीरे ताजमहल की सुरक्षा को देखते हुए कड़े नियम लगाकर इन्हे बंद कर दिया गया था. पुरातत्व विभाग का कहता है कि ताजमहल के नीचे बने यह गालियारे जैसे कमरे ताजमहल को सुरक्षित रखे हुए हैं. हालांकि समय-समय पर कई लोग अलग-अलग तरह के दावे करते हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई खास सबूत नहीं मिला है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.


