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चंदौली के मुगलसराय स्थित पूर्व मध्य रेल के प्लांट डिपोट कॉलोनी स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था ने रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. यहां न नियमित डॉक्टर मिल रहे हैं और न ही पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं. इलाज के लिए लोगों को 5 किलोमीटर दूर लोको अस्पताल जाना पड़ रहा है, जहां लंबी प्रक्रिया और घंटों इंतजार के बाद भी दवा मिलना तय नहीं होता. स्थानीय लोगों ने रेल प्रशासन से स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा.
चंदौली: जिले के मुगलसराय के पूर्व मध्य रेल के प्लांट डिपोट कॉलोनी में स्थित स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों बदहाली का शिकार बना हुआ है. कभी रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए तत्काल चिकित्सा सुविधा का केंद्र रहा यह अस्पताल अब लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गया है. स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों का आरोप है कि यहां न नियमित डॉक्टर आते हैं और न ही कोई मेडिकल स्टाफ मौजूद रहता है. केवल एक कर्मी सुबह-शाम केंद्र की देखरेख के लिए आता है.
नहीं मिलते हैं यहां डॉक्टर
दरअसल, रेलवे कर्मचारियों के परिवारों को इलाज और दवा के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय निवासी अमित रंजन ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वह रेलवे स्टाफ परिवार से हैं और जब भी उनके माता-पिता दवा लेने इस स्वास्थ्य केंद्र पर आते हैं, तो यहां डॉक्टर नहीं मिलते. उन्होंने कहा कि मजबूरी में लोगों को लोको अस्पताल जाना पड़ता है, जहां लंबी प्रक्रिया और घंटों इंतजार के बाद भी दवा मिलना तय नहीं होता.
दवा भी नहीं रहती उपलब्ध
आगे अमित रंजन ने बताया कि लोको अस्पताल में पहले नंबर लगाइए, फिर कंप्यूटर से प्रक्रिया पूरी कराइए. डॉक्टर दवा लिख देते हैं, लेकिन जब काउंटर पर जाते हैं, तो दवा उपलब्ध नहीं रहती. यहां हमारे पास स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन डॉक्टर ही नहीं रहते. अगर दवा मिलती भी है, तो केवल 15 दिन की मिलती है. उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य केंद्र खासतौर पर रेलवे फैक्ट्री और आसपास के कर्मचारियों के लिए खोला गया था, ताकि किसी दुर्घटना या अचानक चोट लगने पर तुरंत इलाज मिल सके.
महिलाओं को होती है परेशानी
वहीं, अमित ने बताया कि लेकिन पिछले 5-6 वर्षों से यहां की व्यवस्था लगातार खराब होती चली गई है. लोगों का आरोप है कि कभी-कभार डॉक्टर आते भी हैं, तो सिर्फ औपचारिकता निभाकर लौट जाते हैं. रेलवे कॉलोनी की महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है. गर्मी के मौसम में दवा लेने के लिए उन्हें करीब 5 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जबकि यह स्वास्थ्य केंद्र उनके क्वार्टर से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है. इसके बावजूद यहां इलाज और दवा की सुविधा नहीं मिल पा रही है.
स्वास्थ्य सेवाएं पड़ी हैं पूरी ठप
स्थानीय निवासियों ने रेल प्रशासन से मांग की है कि इस स्वास्थ्य केंद्र को फिर से पूरी तरह संचालित किया जाए. लोगों का कहना है कि पहले यहां बेहतर इलाज की सुविधा मिलती थी और छोटी-मोटी चोट या बीमारी का तत्काल उपचार यहीं हो जाता था. अब हालत यह है कि भवन तो मौजूद है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं. रेल कर्मचारियों और उनके परिवारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो वे रेल प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें


