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बल्लेबाज को ‘क्लीन बोल्ड’ करने वाले पक्षी की पिच पर हुई मौत, गेंदबाज ने किया विकेट क्लेम, बैटर का बवाल, फंस गए अंपायर

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बल्लेबाज को ‘क्लीन बोल्ड’ करने वाले पक्षी की पिच पर हुई मौत, फंस गए अंपायर

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1969 में शेफील्ड शील्ड के एक मैच के दौरान कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने क्रिकेट के नियमों और मानवीय संवेदनाओं के बीच एक अनोखी लकीर खींच दी. यह कहानी है महान ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ग्रेग चैपल, बल्लेबाज जॉन इनवेरारिटी और एक अभागे ‘स्वैलो’  पक्षी की.

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1969 में एडीलेड के मैदान पर ग्रेग चैपल की गेंद पर एक पक्षी की हुई मौत, फंस गए अंपायर

नई दिल्ली. क्रिकेट को अक्सर ‘अनिश्चितताओं का खेल’ कहा जाता है, जहाँ एक गेंद पूरे मैच का पासा पलट सकती है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि एक उड़ते हुए पक्षी ने किसी बल्लेबाज की किस्मत बदल दी हो? 1969 में शेफील्ड शील्ड के एक मैच के दौरान कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने क्रिकेट के नियमों और मानवीय संवेदनाओं के बीच एक अनोखी लकीर खींच दी. यह कहानी है महान ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ग्रेग चैपल, बल्लेबाज जॉन इनवेरारिटी और एक अभागे ‘स्वैलो’  पक्षी की.

एक घातक डिलीवरी और एक अनहोनी

साल 1969 में दक्षिण ऑस्ट्रेलिया और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बीच शेफील्ड शील्ड का मुकाबला चल रहा था. ग्रेग चैपल गेंदबाजी कर रहे थे और क्रीज पर थे जॉन इनवेरारिटी. चैपल ने एक सटीक गेंद फेंकी जो सीधे स्टंप्स से टकराने वाली थी.  इनवेरारिटी पूरी तरह बीट हो चुके थे और गेंद उनके डिफेंस को भेदते हुए विकेटों की ओर बढ़ रही थी. तभी, अचानक बीच हवा में एक छोटा सा स्वैलो पक्षी गेंद और बल्लेबाज के बीच आ गया। गेंद सीधे उस पक्षी से टकराई.  टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वह नन्हा पक्षी तुरंत वहीं ढेर हो गया और पिच पर गिर पड़ा.  सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि पक्षी से टकराने के बावजूद गेंद अपनी दिशा नहीं भटकी और सीधे जाकर स्टंप्स पर लगी बेल्स गिर गईं, और तकनीकी रूप से बल्लेबाज बोल्ड हो गया.

अंपायरों का फैसला और खेल की भावना

मैदान पर सन्नाटा छा गया कायदे से देखा जाए तो चैपल ने बल्लेबाज को आउट कर दिया था, लेकिन क्या इसे एक ‘वैध’ विकेट माना जा सकता था? अंपायरों के सामने एक धर्मसंकट खड़ा हो गया.  क्रिकेट की नियमावली  में हर छोटी-बड़ी स्थिति के लिए नियम हैं, लेकिन एक पक्षी के हस्तक्षेप पर कोई स्पष्ट धारा नहीं थी. अंपायरों ने आपस में लंबी चर्चा की और अंततः खेल भावना को ऊपर रखा.  उन्होंने उस गेंद को ‘डेड बॉल’  घोषित कर दिया.  तर्क यह था कि पक्षी का हस्तक्षेप एक बाहरी बाधा थी जिसने खेल की सामान्य प्रक्रिया को बाधित किया. जॉन इनवेरारिटी, जो लगभग पवेलियन की ओर कदम बढ़ा चुके थे, उन्हें वापस बुलाया गया.

चैपल का नुकसान और इनवेरारिटी का फायदा

उस दिन किस्मत इनवेरारिटी पर मेहरबान थी जीवनदान मिलने के बाद उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की और 89 रनों की पारी खेली.  दूसरी ओर, ग्रेग चैपल को वह विकेट नहीं मिला जिसके वे हकदार थे.  इतिहास के पन्नों में यह दर्ज हो गया कि एक बल्लेबाज को ‘एक पक्षी ने आउट किया’, लेकिन वह फिर भी ‘नॉट आउट’ रहा.

नियमों से परे क्रिकेट

यह घटना हमें याद दिलाती है कि खेल सिर्फ आंकड़ों और नियमों का पुलिंदा नहीं है.  कभी-कभी प्रकृति खुद मैच में एक खिलाड़ी की भूमिका निभाने आ जाती है. वह अभागा पक्षी तो नहीं बचा, लेकिन उसकी उस ‘कुसमय’ की उड़ान ने क्रिकेट इतिहास को सबसे यादगार और विचित्र कहानियों में से एक दे दी. आज भी जब क्रिकेट में ‘डेड बॉल’ के नियमों पर चर्चा होती है, तो 1969 का वह मंजर और ग्रेग चैपल की वह बदनसीब गेंद जरूर याद की जाती है.

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राजीव मिश्रAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें



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