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बीजेपी नेता की बेरहमी से की गई थी हत्या, 10 साल बाद मिला इंसाफ, कांग्रेस MLA सहित 16 को उम्रकैद की सजा

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BJP नेता की बेरहमी से की गई थी हत्या, कांग्रेस MLA सहित 16 को उम्रकैद की सजा

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बेंगलुरु की विशेष अदालत ने कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 16 को बीजेपी नेता योगेश गौड़ा की 2016 हत्या में उम्रकैद की सजा सुनाई और 30 हजार का जुर्माना भी लगाया. योगेश गौड़ा की 2016 में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. कई आरोपियों को सबूत मिटाने को लेकर भी दोषी करार दिया गया.

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विनय कुलकर्णी के साथ 15 अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. (फाइल फोटो)

बेंगलुरु. बेंगलुरु में जनप्रतिनिधियों के लिए बनी एक विशेष अदालत ने BJP नेता योगेश गौड़ा की 2016 में हुई हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी और 15 अन्य लोगों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. इके अलावा, अदालत ने हर दोषी पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

यह मामला भाजपा नेता और धारवाड़ जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या से संबंधित है, जिनकी जून 2016 में धारवाड़ के एक जिम में कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दी गई थी. मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, जिसे बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था. जांच के दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए. घटना के समय मंत्री रहे कुलकर्णी को 2020 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी.

विशेष सांसद-विधायक अदालत ने 15 अप्रैल को कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी और 16 अन्य को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता योगेश गौड़ा की 2016 में हुई हत्या के मामले में दोषी करार दिया था. अदालत ने कुलकर्णी और अन्य आरोपियों को आपराधिक साजिश रचने और संबंधित अपराधों का दोषी पाया था. न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने आरोपियों को “योगेश गौड़ा की हत्या की आपराधिक साजिश रचने” में दोषी पाया. अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120(बी) (आपराधिक साजिश) सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी करार दिया.

अदालत ने कहा था कि आरोपियों को गैरकानूनी रूप से एकत्र होने, दंगा करने और हत्या से संबंधित आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत भी दोषी करार दिया गया है. इनमें आईपीसी की धारा 120(बी) के साथ-साथ धारा 302 (हत्या) भी शामिल है. इसके अलावा, कई आरोपियों को साक्ष्य (सबूत) मिटाने को लेकर भी दोषी करार दिया गया. वहीं, अदालत ने वासुदेव राम नीलेकणी और सोमशेखर बसप्पा न्यामगौड़ा के खिलाफ पुख्ता सबूत न होने के कारण उन्हें बरी कर दिया.

अदालत ने पुलिस अधिकारियों सहित कई स्वतंत्र गवाहों के खिलाफ, झूठी गवाही देने को लेकर कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया. साथ ही, अदालत ने अभियोजन पक्ष को सरकारी गवाह बने उस व्यक्ति के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति दे दी, जो बाद में अपने बयान से मुकर गया था.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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