Last Updated:
दिल्ली से लेकर जयपुर तक, गेंदें बाउंड्री के बाहर और गेंदबाज अपने सिर पकड़कर जमीन पर बैठे नजर आए. यह क्रिकेट नहीं, बल्कि बल्लेबाजों का एक ऐसा तांडव था जिसने रिकॉर्ड बुक के पन्ने फाड़ दिए. 444 गेंदें, 985 रन और लगभग 13.31 रन प्रति ओवर की मार इस दिन गेंदबाजों के पास छिपने की भी जगह नहीं थी.
200 किमी के अंतर पर एक दिन में बने 985 रन, शनिवार बन गया बॉलर्स के लिए ब्लैक डे
नई दिल्ली. शनिवार का सूरज जैसे ही ढला, क्रिकेट के मैदान पर गेंदबाजों के लिए ‘ब्लैक सैटरडे’ की शुरुआत हो गई. दिल्ली से लेकर जयपुर तक, गेंदें बाउंड्री के बाहर और गेंदबाज अपने सिर पकड़कर जमीन पर बैठे नजर आए. यह क्रिकेट नहीं, बल्कि बल्लेबाजों का एक ऐसा तांडव था जिसने रिकॉर्ड बुक के पन्ने फाड़ दिए. 444 गेंदें, 985 रन और लगभग 13.31 रन प्रति ओवर की मार इस दिन गेंदबाजों के पास छिपने की भी जगह नहीं थी.
दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में रनों की जो आग लगी, उसकी तपिश 200 किमी दूर जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम तक महसूस की गई. दिल्ली में पंजाब किंग्स ने रनों का पीछा करते हुए दिल्ली कैपिटल्स को धूल चटाई, तो वहीं जयपुर में सनराइजर्स हैदराबाद ने राजस्थान रॉयल्स के जबड़े से जीत छीन ली. दोनों मैचों ने यह साबित कर दिया कि आज के दौर में कोई भी लक्ष्य सुरक्षित नहीं है.
आँकड़ों का तूफान: 100 और 50 की झड़ी
इस खूनी शनिवार को रिकॉर्ड्स की ऐसी सुनामी आई कि हर कोई दंग रह गया.पूरे दिन में2 तूफानी शतक जड़े गए, जिन्होंने गेंदबाजों के हौसले पस्त कर दिए. पहला शतक आया दिल्ली में कएल राहुल के बैट से जो किसी कविता की तरह थी वहीं दूसरा शतक आया वैभव सूर्यवंशी से बल्ले से तो एक तूफान के जैसे था. 6 आतिशी अर्धशतकों ने रनों की रफ्तार को थमने नहीं दिया. 985 रन कुल मिलाकर स्कोरबोर्ड पर टंगे, जो टी20 क्रिकेट की बढ़ती आक्रामकता का प्रमाण है. जयपुर में 26 छक्के और 47 चौके लगाए वही दिल्ली में 33 छक्के और 49 चौके लगे. साफ है दोनों स्टेडियम की सपाट पिच और मैदान का साइज बल्लेबाजों को खूब रास आया और आईपीएल का सबसे ज्यादा रन बनने वाला दिन बन गया.
ऑरेंज कैप का ‘म्यूजिकल चेयर’
क्रिकेट इतिहास में शायद ही ऐसा कभी हुआ हो, जब एक ही दिन में ऑरेंज कैप ने 4 बार अपना चेहरा बदला हो. जैसे-जैसे रन बन रहे थे, वैसे-वैसे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी की टोपी एक सिर से दूसरे सिर पर जा रही थी. यह महज एक कैप का मुकाबला नहीं था, बल्कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों के बीच वर्चस्व की जंग थी. शनिवार का यह दिन गेंदबाजों के लिए किसी ‘ब्लैक डे’ से कम नहीं था. जहाँ बल्लेबाज जश्न मना रहे थे, वहीं गेंदबाज केवल अपनी अगली गेंद को बाउंड्री से वापस आने का इंतजार कर रहे थे. क्रिकेट ने एक बार फिर दिखाया कि जब बल्ला बोलता है, तो रिकॉर्ड्स खुद-ब-खुद मूक दर्शक बन जाते हैं.
About the Author

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


