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Comic Gallery: एयरपोर्ट पर अचानक समीर की नजरे बोर्डिंग पास पर लिखे ‘SSSS’ पर टिक जाती हैं. यह समीर और सिमरन दोनों के समक्ष से परे था कि आखिर यह किस चीज का कोड है. इसके बाद, समीर की हालत देखने वाली थी. माथे पर पसीना और चेहरे पर घबराहट साफ नजर आ रही थी. आखिर यह ‘SSSS’ क्या था, जानने के लिए मजे लें कॉमिक गैलरी का…
रोज की तरह आज भी एयरपोर्ट की चकाचौंध लुभाने वाली थी. समीर और सिमरन अपने सफर को लेकर काफी उत्साहित थे. दोनों हंसते हुए यह सोचकर टर्मिनल में दाखिल हुए कि ‘चलो आज टाइम से पहुंच गए… अब सब आसानी से हो जाएगा’. चेक-इन, इमिग्रेशन और सिक्योरिटी चेक का प्रॉसेस समय से पूरा हो गया था. लिहाजा, अब दोनों के चेहरे पर एक सुकून नजर आने लगा था.

लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई, जब समीर का ध्यान उसके बोर्डिंग पास पर छपे एक कोड पर गया. यह कोड SSSS था. समीर के चेहरे की मुस्कान अचानक गायब हो गई. -उसने हैरानी से पूछा- ‘ये क्या है?’ सिमरन ने भी बोर्डिंग पास देखा और थोड़ी उलझन में पड़ गई. अब माहौल में हल्की बेचैनी घुलने लगी थी.

समीर के मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे- क्या उसे रोका जाएगा? क्या कोई समस्या हो गई है? वहीं, सिमरन ने तुरंत अपना फोन निकाला और इस कोड के बारे में जानकारी खोजने लगी.
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कुछ ही मिनटों में उसे समझ आ गया कि SSSS का मतलब है ‘ सेकेंडरी सिक्योरिटी स्क्रीनिंग सिलेक्शन’. उसे यह भी समझ में आ गया कि यह एक अतिरिक्त और सख्त सुरक्षा जांच है. सिमरन ने समीर को समझाया- घबराने की जरूरत नहीं है, यह एक रूटीन प्रक्रिया है, बस तुम्हें एक दूसरी जांच से गुजरना होगा. यह सुनकर ही समीर की धड़कनें थोड़ी तेज थीं.

तभी सिक्योरिटी स्टाफ ने समीर को अलग से बुलाया. बहुत ही प्रोफेशनल अंदाज में उन्हें बताया गया कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है और उन्हें बस सहयोग करना होगा. समीर ने गहरी सांस ली और आगे बढ़ गया.

अब शुरू हुई असली जांच. सबसे पहले उसकी पूरी बॉडी चेकिंग की गई. सिक्योरिटी अधिकारी हर चीज को ध्यान से देख रहे थे, लेकिन उनका व्यवहार पूरी तरह शांत और प्रोफेशनल था. सिमरन थोड़ी दूरी पर खड़ी सब कुछ देख रही थी.

फिर सिक्योरिटी टीम ने समीर से उसका लैपटॉप और फोन ऑन करके दिखाने को कहा. हर डिवाइस को ध्यान से चेक किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सब कुछ सुरक्षित है. अब तक समीर को समझ आ गया था कि यह प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन जरूरी है.

इसके बाद समीर के बैग की बारी आई. बैग को पूरी तरह खोलकर हर सामान बाहर निकाला गया. कपड़े, एक्सेसरीज़, यहां तक कि छोटे-छोटे सामान भी ध्यान से जांचे गए. थोड़ी देर के लिए वहां हल्की अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया, लेकिन सब कुछ व्यवस्थित तरीके से हो रहा था.

करीब 20-25 मिनट बाद आखिरकार वह पल आया, जिसका समीर को इंतजार था. सिक्योरिटी अधिकारी ने मुस्कुराते हुए उसका बोर्डिंग पास लौटाया, जिस पर क्लियरेंस का स्टैंप लग चुका था. समीर ने राहत की सांस ली और सिमरन भी मुस्कुरा उठी.

देखा, कुछ भी डरने जैसा नहीं था, सिमरन ने हल्के अंदाज में कहा. दोनों अब गेट की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन इस बार उनके चेहरे पर एक नई समझ थी. उन्होंने महसूस किया कि SSSS कोड कोई खतरे का संकेत नहीं, बल्कि एक सुरक्षा प्रक्रिया है, जो सभी यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाई गई है.


