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रिटायरमेंट के बाद नई शुरुआत! गोंडा का ये किसान उगा रहा विदेशी अमरूद, जानिए मछली बाजार में कैसे आया आइडिया

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रिटायरमेंट के बाद नई शुरुआत! गोंडा का ये किसान उगा रहा विदेशी अमरूद

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Gonda News : रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग आराम की जिंदगी बिताते हैं, लेकिन फागु राम ने खाली समय का सही उपयोग करने का फैसला किया. उन्होंने खेती की ओर रुख किया और कुछ अलग करने का सोचा. लोकल 18 से गोंडा के प्रगतिशील किसान फागु राम कहते हैं कि यह अमरूद अंदर से गुलाबी, स्वाद में मीठा और आकार में बड़ा होता है, जिससे बाजार में इसका अच्छा दाम मिलता है. आधा एकड़ बाग लगाने में 70 से 80 हजार रुपये की लागत आई है.

गोंडा. यूपी का ये अधिकारी रिटायरमेंट के बाद नई शुरुआत कर दूसरों के लिए प्रेरणा बन गया है. गोंडा जिले विकासखंड छपिया में रहने फागु राम ने नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद विदेशी किस्म के अमरूद उगाने शुरू किए हैं. उनकी यह पहल अब इलाके के दूसरे किसानों का ध्यान खींच रही है. रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग आराम की जिंदगी बिताते हैं, लेकिन फागु राम ने खाली समय का सही उपयोग करने का फैसला किया. उन्होंने खेती की ओर रुख किया और कुछ अलग करने की सोच के साथ विदेशी वैरायटी के अमरूद के पौधे लगाए.

12वीं के बाद…

लोकल 18 से बातचीत में प्रगतिशील किसान फागु राम कहते हैं कि हमें बचपन से खेती किसानी का शौक था. हमारा सब्जेक्ट भी एग्रीकल्चर का था. हमने इंटर तक पढ़ाई की. उसके बाद ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर सरकारी नौकरी मिल गई. 2016 में नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद सोचा कि क्यों न खेती किसानी की जाए. एक दिन मछली बाजार की तरफ घूमने गए थे. वहां देखा कि किसान राजेश वर्मा ताइवान पिंक वैरायटी के अमरूद लगाए हुए हैं. हमने उनसे बात की. उस बातचीत के बाद हमने भी अमरूद की खेती करने की ठानी.

इस अमरूद की क्या खासियत

फागु राम बताते हैं कि ताइवान पिंक अमरूद की बाजार में अच्छी मांग है. यह अमरूद अंदर से गुलाबी, स्वाद में मीठा और आकार में बड़ा होता है, जिससे बाजार में इसका अच्छा दाम मिलता है. सही देखभाल, समय पर सिंचाई और खाद के इस्तेमाल से उनके बाग में अच्छी पैदावार होने लगी है. फागु राम बताते हैं कि उन्होंने आधा एकड़ में ताइवान पिंक अमरूद लगाया है. भविष्य में आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है.

कितने दिन बाद फल

फागु राम बताते हैं कि ताइवान पिंक अमरुद लगाने के डेढ़ साल बाद फल देना शुरू कर देता है, पहला फल नहीं लेते हैं. उसे तोड़ देते हैं क्योंकि पहला फल लेने से पौधा मैच्योर नहीं हो पता है और भविष्य में इससे नुकसान होता है. आधा एकड़ में 70 से 80 हजार रुपये की लागत आई है. पहली बार जानकारी के अभाव से फसल का उत्पादन अच्छा नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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