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Bahraich News: कहते हैं कि मुश्किलें कितनी भी आ जाए, कभी अपना हौसला नहीं खोना चाहिए. ऐसी ही जज्बे से भरी कहानी बहराइच की माया देवी की है, जिनकी सफलता की अनोखी कहानी है.
बहराइच: जिले की एक ऐसी महिला जिसके पिता रिटायर फौजी थे, पिता की मौत के बाद गरीब घर में बेटी की शादी हुई. फूस का मकान और खाने को एक वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से मिलती थी. फिर रिटायर फौजी की बिटिया ने ससुराल में दिखाया ऐसा कमाल, खेती को बनाया तरक्की का हथियार और आज लखपति बन गई हैं और अब जिले की अन्य महिलाएं अब इनसे प्रेरणा लेती हैं.
महिला किसान माया देवी का संघर्ष
महिला किसान माया देवी ने लोकल 18 की टीम से खास बातचीत में बताया कि 2008 में लगभग 18 साल पहले पिता के स्वर्गवास के बाद घरवालों ने एक गरीब परिवार में शादी कर दी. जब वह ससुराल में पहुंची, तब तमाम दु:ख मुसीबत का सामना करना पड़ा. कच्चा घर, पति भी प्राइवेट नौकर, हर चीज की दिक्कत होती थी और खेती होने के बावजूद भी कोई करने वाला नहीं था. तब माया ने अपनी सूझबूझ से बहराइच जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से जानकारी लेकर खेती करना शुरू कर दिया.
देखते ही देखते खेती ने बदल दी सूरत
माया ने बताया कि खेती मेरे और मेरे ससुराल के लिए वरदान बनकर उभरी है. मुझे कोई आइडिया नहीं था कि कैसे खेती-किसानी की जाए और पति भी बाहर ड्राइवरी का काम करते थे. जो कुछ मिलता, बस घर-परिवार में ही खा-पीकर खत्म हो जाता. तब माया ने कृषि विज्ञान केंद्र का नाम सुना और जाकर वैज्ञानिकों से मिली. वैज्ञानिकों ने खेती की सलाह दी और खेती में मदद भी की. फिर माया ने मक्के की खेती शुरू कर दी. धीरे-धीरे इतना फायदा हुआ कि आज ईश्वर की कृपा से माया देवी के पास सबकुछ है.
जीरो से हीरो बनी बहराइच की माया
माया देवी ने बताया कि पहले जब खेती का कोई आइडिया नहीं था, तब मुश्किल से जीवन व्यतीत होता था. लेकिन जैसे ही खेती को अपनाया, धीरे-धीरे खेती से मुनाफा हुआ, तो पहली कमाई से घर बना, दूसरी कमाई से ट्रैक्टर और फिर इस तरह कारवां बढ़ता गया. आज मक्के के साथ-साथ रेशम कीट पालन, घर में कई कृषि यंत्र और अच्छी कमाई.
उन्होंने बताया कि अब जिले में खूब नाम भी होता है और कृषि दीदी के पद पर माया देवी खुद काम भी करती हैं. अन्य महिलाओं को भी जागरूक करती हैं. आज माया देवी के बच्चे बड़े हो गए हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं. माया देवी ने बेटी की शादी भी कर दी है. माया देवी बहराइच जिले के कटरा बहादुरगंज गांव की रहने वाली हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.


