नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलना हर खिलाड़ी का सपना होता है, लेकिन नीली जर्सी पहनने वाले हर क्रिकेटर की आंखों में जो सबसे बड़ा ख्वाब पलता है, वो होता है- देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना और उस सुनहरी ट्रॉफी को चूमना. हालांकि, सभी की किस्मत में वर्ल्ड कप की चमक नहीं लिखी होती. भारतीय क्रिकेट इतिहास में कुछ ऐसे बदनसीब दिग्गज भी रहे, जिन्होंने अपनी क्लास और कप्तानी से करोड़ों फैंस का दिल तो जीता, लेकिन जब बात क्रिकेट के सबसे बड़े मंच की आई, तो किस्मत ने उनसे मुंह मोड़ लिया. हम इस स्टोरी में उन 5 क्रिकेटरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें पूरे करियर में एक वर्ल्ड कप मैच तक नसीब नहीं हुआ. देश को ट्रॉफी जिताने का उनका वो एक सपना… सपना ही रह गया.
इशांत शर्मा
जब इशांत शर्मा ने भारतीय टीम में एंट्री की थी, तब वे अपनी तेज रफ्तार और खतरनाक स्विंग से बल्लेबाजों को खूब परेशान करते थे. उन्हें देखकर लगता था कि वे वनडे क्रिकेट के बड़े खिलाड़ी बनेंगे, लेकिन किस्मत ने उन्हें कभी वर्ल्ड कप खेलने का मौका नहीं दिया. अपने वनडे करियर के दूसरे हिस्से में इशांत काफी महंगे साबित होने लगे, जिससे टीम में उनकी जगह पर सवाल उठने लगे. इसके बावजूद साल 2015 के वर्ल्ड कप में उन्हें टीम में चुने जाने का पूरा मौका था, लेकिन ऐन वक्त पर चोट के कारण वे वर्ल्ड कप से बाहर हो गए, जो उनके लिए एक बहुत बड़ा झटका था. इशांत ने भारत के लिए 100 से ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन वनडे में 115 विकेट लेने के बाद भी उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया और वे कभी वर्ल्ड कप मैच नहीं खेल पाए.
इरफान पठान
इस लिस्ट में इरफान पठान का नाम होना हर क्रिकेट फैन को हैरान करता है. अपने शुरुआती दिनों में इरफान नई गेंद से दुनिया के सबसे खतरनाक स्विंग गेंदबाजों में से एक थे. उन्होंने टेस्ट मैच के पहले ही ओवर में हैट्रिक लेने का कारनामा भी किया था. लेकिन, ऑलराउंडर बनने की चाहत और बार-बार चोटिल होने की वजह से उनकी गेंदबाजी की धार कम हो गई. दिलचस्प बात यह है कि वे 2007 के वर्ल्ड कप की भारतीय टीम का हिस्सा थे, जहां भारत शुरुआती दौर में ही बाहर हो गया था, लेकिन उन 3 मैचों में इरफान को एक बार भी प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया. उन्होंने वनडे में 173 विकेट चटकाए, लेकिन बिना एक भी वर्ल्ड कप मैच खेले संन्यास ले लिया.
अंबाती रायुडू
साल 2019 के वर्ल्ड कप में अंबाती रायुडू को टीम में न चुनना भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े विवादों में से एक बन गया था. रायुडू एक बेहतरीन मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज थे, लेकिन सिलेक्टर्स ने उनकी जगह विजय शंकर को टीम में चुन लिया, जिसकी वजह से बीसीसीआई की काफी आलोचना हुई थी. रायुडू का वनडे में बैटिंग एवरेज 47 से ज्यादा का था, जो यह साबित करता है कि वे कितने शानदार बल्लेबाज थे. वर्ल्ड कप टीम से बाहर होने के बाद गुस्से और निराशा में रायुडू ने संन्यास की घोषणा कर दी थी. उन्होंने अपने वनडे करियर की 50 पारियों में 3 शतकों के साथ 1694 रन बनाए, लेकिन वर्ल्ड कप खेलने का उनका सपना अधूरा ही रह गया.
पार्थिव पटेल
पार्थिव पटेल एक ऐसे बाएं हाथ के बल्लेबाज और विकेटकीपर थे, जिनमें टैलेंट की कोई कमी नहीं थी. लेकिन उनका करियर एक ऐसे दौर में शुरू हुआ जब टीम में विकेटकीपरों की जगह के लिए भारी कॉम्पिटिशन था. राहुल द्रविड़, दिनेश कार्तिक और फिर एमएस धोनी की मौजूदगी की वजह से पार्थिव को कभी लंबे समय तक खेलने का मौका नहीं मिला. पार्थिव को 2003 के वर्ल्ड कप टीम में चुना तो गया था, लेकिन कप्तान ने अचानक राहुल द्रविड़ से विकेटकीपिंग कराने का फैसला किया. इस वजह से पार्थिव पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ बेंच पर बैठे रहे. इसके बाद एमएस धोनी के आने से पार्थिव के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो गए. उन्होंने 38 वनडे मैचों में 736 रन बनाए, लेकिन कभी वर्ल्ड कप के मैदान पर नहीं उतर सके.
वीवीएस लक्ष्मण
इस लिस्ट में सबसे बड़ा और हैरान करने वाला नाम महान बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण का है. लक्ष्मण टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े दिग्गजों में से एक हैं, जिन्होंने 130 से ज्यादा टेस्ट मैचों में 8000 से अधिक रन बनाए. लेकिन वनडे क्रिकेट में उनका ग्राफ थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रहा. साल 2003 के वर्ल्ड कप में लक्ष्मण का चुना जाना लगभग पक्का था. वे इसके पूरे हकदार भी थे, लेकिन सिलेक्टर्स ने आखिरी वक्त पर उनकी जगह दिनेश मोंगिया को टीम में शामिल कर लिया. यह फैसला हर किसी के लिए चौंकाने वाला था. लक्ष्मण ने भारत के लिए 86 वनडे मैच खेले, लेकिन टेस्ट क्रिकेट का यह महान खिलाड़ी कभी वर्ल्ड कप का एक भी मैच नहीं खेल पाया.


