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वो 5 क्रिकेट टीमें…जो टेस्ट में लगातार सबसे ज्यादा सीरीज हारीं, 16 के आंकड़े पर कोई नहीं पहुंचना चाहेगा

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वो 5 क्रिकेट टीमें…जो टेस्ट में लगातार सबसे ज्यादा सीरीज हारीं

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Most consecutive series defeats in Test: टेस्ट क्रिकेट की दुनिया में जहां जीत के कीर्तिमान रचे जाते हैं, वहीं कुछ दौर ऐसे भी रहे जब हार का साया हटने का नाम नहीं ले रहा था.बांग्लादेश के नाम लगातार 16 टेस्ट सीरीज हारने का सबसे लंबा अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज है. इस लिस्ट में न्यूजीलैंड और यहां तक कि दिग्गज ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है. यह कहानी उन टीमों के कठिन संघर्ष और क्रिकेट इतिहास के उस दौर की है जब उनके लिए जीत एक सपना बन गई थी.

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लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली पांच टीमें.

नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में हार और जीत के सिलसिले अक्सर टीमों की किस्मत और उनके संघर्ष की कहानी बयां करते हैं. जहां कुछ टीमें जीत का विजय रथ लेकर चलती हैं, वहीं कुछ दौर ऐसे भी आते हैं जब हार का साया पीछा छोड़ने का नाम नहीं लेता. अगर हम आंकड़ों की दुनिया में झांकें, तो बांग्लादेश और न्यूजीलैंड जैसी टीमों के नाम कुछ ऐसे रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिन्हें कोई भी टीम याद नहीं रखना चाहेगी. यह कहानी है टेस्ट क्रिकेट में सबसे लंबे समय तक चली हार के उन सिलसिलों की, जिसने क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया.

टेस्ट क्रिकेट के पटल पर बांग्लादेश का उदय संघर्षों से भरा रहा है. बांग्लादेश के नाम टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा लगातार सीरीज हारने का अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज है. साल 2000 में भारत के खिलाफ अपने डेब्यू टेस्ट से लेकर 2005 तक बांग्लादेश ने लगातार 16 टेस्ट सीरीज गंवाईं. यह वह दौर था जब ‘बांग्ला टाइगर्स’ के पास न तो अनुभव था और न ही लंबी अवधि के प्रारूप को खेलने का धैर्य. इस दौरान उन्होंने जिम्बाब्वे, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ हार का सामना किया. इस 16 सीरीज के सिलसिले में उन्होंने कुल 31 मैच खेले, जिनमें से वे एक भी मैच नहीं जीत सके. यह क्रिकेट के इतिहास में किसी भी टीम के लिए सबसे कठिन दौर था, जहां हार एक आदत सी बन गई थी.

लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली पांच टीमें.

लेकिन हार का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. 2005 से 2009 के बीच बांग्लादेश ने एक बार फिर लगातार 11 टेस्ट सीरीज हारीं. हालांकि इस दौरान उन्होंने अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज कर ली थी, लेकिन सीरीज जीतने की कला सीखने में उन्हें वक्त लगा. इसके बाद 2009 से 2013 के बीच भी उन्होंने लगातार 9 सीरीज हारीं. ये आंकड़े बताते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में खुद को स्थापित करने के लिए बांग्लादेश को कितनी लंबी और ऊबड़-खाबड़ सड़क पार करनी पड़ी.

न्यूजीलैंड को शुरुआती दशकों की चुनौती
न्यूजीलैंड की टीम आज टेस्ट में जितना मजबूत है, इससे पहले ऐसा नहीं था.1950 के दशक में न्यूजीलैंड टीम एक गहरे संकट से गुजर रही थी. 1950-51 में इंग्लैंड के खिलाफ हार से शुरू हुआ यह सिलसिला 1958-59 तक चला, जिसमें न्यूजीलैंड ने लगातार 10 टेस्ट सीरीज गंवाईं. दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, भारत और वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलते हुए न्यूजीलैंड की टीम संघर्ष करती रही. उस दौर में न्यूजीलैंड के पास संसाधनों की कमी थी और उनकी टीम विदेशों में अपनी लय हासिल करने में नाकाम रहती थी. दिलचस्प बात यह है कि इस 10 सीरीज की हार के बीच उन्होंने 1955-56 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक मैच जीता था, लेकिन पूरी सीरीज बचाने में वे असमर्थ रहे.

ऑस्ट्रेलिया का नाम भी इस लिस्ट में शामिल
हैरानी की बात यह है कि दुनिया की सबसे सफल क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया का नाम भी इस सूची में शामिल है. हालांकि यह बात 19वीं सदी के अंत (1884 से 1890) की है. उस दौर में एशेज के दौरान ऑस्ट्रेलिया को इंग्लैंड के हाथों लगातार 7 टेस्ट सीरीज में हार झेलनी पड़ी थी. यह वह दौर था जब टेस्ट क्रिकेट अपनी शैशवावस्था में था. ऑस्ट्रेलिया की टीम इंग्लैंड के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रही थी. 1886 में ऑस्ट्रेलिया को इंग्लैंड दौरे पर 3-0 से हार मिली, तो वहीं 1888 और 1890 में भी उनकी किस्मत नहीं बदली. उस समय क्रिकेट के नियम और खेलने की स्थितियां आज से बिल्कुल अलग थीं, लेकिन उन 7 सीरीज की हार ने ऑस्ट्रेलिया को भविष्य की ‘अजेय टीम’ बनने का सबक सिखाया.

हार से जीत का सबक
इन आंकड़ों को देखकर एक बात साफ होती है कि टेस्ट क्रिकेट में अनुभव की कोई जगह नहीं है. बांग्लादेश ने जहां अपने शुरुआती 15 सालों में 36 से ज्यादा सीरीज लगातार हारकर (अलग-अलग चरणों में) सबक सीखा, वहीं न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी शुरुआती विफलताओं से प्रेरणा लेकर खुद को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में शुमार किया. ये लगातार हार केवल आंकड़ों का ढेर नहीं हैं, बल्कि उस धैर्य और जज्बे की कहानी हैं जो एक टीम को टूटने से बचाती है. आज बांग्लादेश की टीम बड़ी टीमों को मात देने का माद्दा रखती है, और यह सब उसी कठिन दौर की देन है जब उन्होंने लगातार हारने के बावजूद मैदान नहीं छोड़ा.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें



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