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सहारनपुर का थरौली गांव, जहां एलपीजी नहीं गोबर गैस से बनता है घर का खाना.. जानिए इस गांव की कहानी

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सहारनपुर: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते जहां प्रत्येक देश पर गैस का संकट तेजी से बढ़ा है. वहीं भारत देश में भी गैस सिलेंडर लेने के लिए लोगों की लंबी-लंबी कतार देखी गई है, लेकिन सहारनपुर का एक गांव ऐसा भी है जिसका एक भी व्यक्ति एलपीजी गैस लेने के लिए लाइनों में नहीं लगा है. हम बात कर रहे हैं सहारनपुर की देहात विधानसभा के गांव थरौली की, जिसमें लगभग 50% परिवार बायोगैस प्लांट के माध्यम से गैस का उत्पादन कर साल भर खाना बनाते हैं.

इस गांव में पिछले 10 साल से गोबर गैस प्लांट लगातार लगाएं जा रहे हैं, जबकि इस गांव की आबादी की अगर बात करें तो लगभग 30 परिवार इसमें निवास करते हैं, जिसमें से लगभग 50% परिवार एलपीजी से मुक्त हो चुके हैं और गोबर गैस प्लांट के माध्यम से अपना खाना बनाते हैं. वहीं दूसरी ओर गांव के लोगों का लगातार प्रयास यह है कि इस गांव को जल्द LPG मुक्त बनाया जाए.

गांव से थरौली से रणपाल ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि हम लोग गोबर गैस से खाना बनाते हैं. लगभग साढ़े 3 साल का समय हो चुका है हमारे यहां पर गोबर गैस प्लांट लगे हुए, जबकि हमारे सिवा अन्य लोगों के भी यहां पर उस समय गोबर गैस प्लांट लगे थे. हमारा गांव बहुत छोटा गांव है और यहां लगभग 30 परिवार रहते हैं. गोबर गैस पर बनने वाले अगर खाने की बात करें, तो बिल्कुल खाना ऐसा बनता है जैसा कि चूल्हे पर बना हुआ खाना.

गोबर गैस प्लांट लगवाने में कितना आता है खर्चा

इसका आईडिया लगभग 10 साल पहले आईटीसी की ओर से हमारे गांव में काफी लोगों ने गोबर गैस प्लांट लगवाए थे और उसके बाद फिर मदर डेयरी के द्वारा ग्रामीणों को गोबर गैस प्लांट लगवा कर दिए गए. इस गोबर गैस प्लांट को लगवाने के लिए मात्र ₹6000 का खर्चा आ रहा है. इसमें लगभग 7 से 8 घंटे में गोबर गैस बनाकर तैयार हो जाती है और घर के जितने भी मेंबर हैं सभी का खाना आसानी से बन जाता है.

गोबर गैस प्लांट के माध्यम से ही खाना बनाते हैं

ग्रामीण संदीप कुमार ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि गोबर गैस प्लांट हमारे यहां लगा हुआ है जिसको 4 साल पहले हमारे द्वारा लगवाया गया था.  हम इस पर ही अपना खाना बनाते हैं, LPG का कनेक्शन हमारे पास है, लेकिन हम उसका इस्तेमाल नहीं करते हैं. हमारे गांव में ज्यादातर जो परिवार हैं वह गोबर गैस प्लांट के माध्यम से ही खाना बनाते हैं. इस गैस के द्वारा जो खाना बनाया जाता है उसका स्वाद भी बिल्कुल अलग आता है. इसको लगवाने में कुछ ज्यादा खर्च नहीं आता सब्सिडी में मात्र ₹6000 में यह लगाया गया था.

10 से 15 लोगों का खाना आसानी से बन जाता है

गृहणी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि खाना बनाने के लिए हम लोग पिछले 4 साल से गोबर गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके ऊपर जो खाना बनता है वह स्वादिष्ट होता है आसानी से बन जाता है और सबसे अच्छी बात ही है कि वह खाना हमें नुकसान नहीं देता. मेहमान आने पर भी हम लोग इसी पर खाना बनाते हैं 10 से 15 लोगों का खाना आसानी से बन जाता है.

गैस के मामले में हमारा गांव धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की ओर

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि संदीप चौधरी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि हमारा गांव थरौली बहुत छोटा सा गांव है और हमारे गांव के लोग मिलकर के इस गांव को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहे हैं. हमारे गांव का एक भी व्यक्ति एलपीजी गैस लेने के लिए इस गैस के संकट में ना तो लाइन में लगा और ना ही लगेगा. इसका कारण है कि गैस के मामले में हमारा गांव धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हो रहा है. गांव के लगभग आधे परिवार गोबर गैस से अपना खाना बनाते हैं और बचे हुए परिवार भी जल्द गोबर गैस प्लांट लगाने की तैयारी में है.



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