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सिर्फ कीमती सामान मांगना आधार नहीं, महिला पर क्रूरता साबित करना जरूरी, कोर्ट ने खारिज किया दहेज हत्या का मामला

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दहेज हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि दहेज हत्या के लिए क्रूरता का साबित होना जरूरी है. केवल डिमांड करना से दहेज हत्या साबित नहीं होती.

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दहेज हत्या को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला.

लखनऊः दहेज हत्या के मामले में हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि क्रूरता साबित नहीं हुई तो दहेज हत्या का मामला नहीं बनेगा. सिर्फ कीमती वस्तुओं की मांग से दहेज मृत्यु का अपराध साबित नहीं होता है. मृतक महिला पर उत्पीड़न या क्रूरता से जुड़ी घटनाओं की स्पष्ट कड़ियां सिद्ध होनी चाहिए ताकि दहेज हत्या के अपराध को साबित कियाजा सके. मृत्यु और दहेज के लिए की गई क्रूरता या हिंसा के बीच ठोस संबंध सिद्ध करना जरूरी है.

1999 के हत्या मामले पर हुई सुनवाई
दरअसल हाईकोर्ट मेवा लाल व दो अन्य की अपील पर सुनवाई की थी. करीब 27 साल पुराने मामले में अपीलार्थियों ने सत्र अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई 7 साल की सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी थी. मामला लखनऊ के बंथरा थाने का है. साल 1999 में एक अपीलार्थी की पत्नी की संदिग्ध हालातों में मौत हो गई थी.
इसके पश्चात उसके ससुर ने अपीलार्थियों के खिलाफ दहेज की मांग पूरी न होने पर जहर देकर हत्या का आरोप लगाया था.

‘दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के बीच संबंध जरूरी’
अपीलार्थियों की ओर से दलील दी गई कि मृतका के शरीर पर कोई चोट नहीं मिली थी. पोस्टमार्टम की विसरा रिपोर्ट से जहर का कोई प्रमाण नहीं मिला. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में प्राकृतिक मौत और अन्य कारणों से मौत की विवेचना में अंतर को स्पष्ट किया. यदि मौत सामान्य हालातों से परे नहीं है. लेकिन उसका कारण भी अस्पष्ट है तो वह दहेज मृत्यु से संबंधित धारा 304 B के दायरे में नहीं आएगी. सबूत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टर की राय को ध्यान में रखते हुए इस मामले में हुई मौत अप्राकृतिक मौत साबित नहीं हो पाई. दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के बीच सीधा संबंध होना जरूरी है, सिर्फ दहेज की मांग या बातचीत पर्याप्त नहीं है.

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Prashant RaiChief Sub Editor

Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें





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