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साल 2017 में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज वॉर्न बर्न्स ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया. उन्होंने एक विशेष प्रकार का हेलमेट पहनकर गेंदबाजी करना शुरू किया. बर्न्स के गेंदबाजी एक्शन में एक ‘फॉलो-थ्रू’ था जहां उनका सिर गेंद फेंकने के तुरंत बाद नीचे की ओर झुक जाता था, जिससे वे बल्लेबाज़ के सीधे प्रहार के प्रति बिल्कुल असुरक्षित हो जाते थे. इस हेलमेट को खुद बर्न्स ने अपने कोच के साथ मिलकर डिजाइन किया था.
2017 में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज ने हेलमेट लगाकर गेंदबाजी की, निकाली 145 किमी/घंटे की रप्तार
नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर हमने बल्लेबाजों को हेलमेट में देखा है, अंपायरों को सुरक्षा घेरे में देखा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 140-150 किमी की रफ्तार से गेंद फेंकने वाला एक खूंखार तेज गेंदबाज खुद हेलमेट पहनकर बॉलिंग करने आए? सुनने में यह किसी फिल्म के सीन जैसा लगता है, लेकिन टी20 क्रिकेट के बढ़ते रोमांच और ‘पावर हिटिंग’ के जानलेवा खतरों ने खेल के इतिहास में यह अजीबोगरीब पन्ना भी जोड़ दिया है.
इससे पहले अंपायर ब्रूस ऑक्सेनफोर्ड ने अपने बाएं हाथ पर एक पारदर्शी प्लास्टिक की शील्ड पहनी थी, जिसे ‘फोरआर्म शील्ड’ या ‘ऑक्स-ब्लॉक’ कहा जाता है.यह सुरक्षात्मक डिवाइस उन्हें बल्लेबाजों द्वारा मारे गए तेज शॉट से बचाने के लिए थी, क्योंकि आधुनिक क्रिकेट में पावरफुल शॉट लगने के कारण अंपायरों को चोट लगने का खतरा बढ़ गया था. उन्होंने इस शील्ड का इस्तेमाल आईपीएल-सीजन 9में राजकोट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात लायंस के मैच के दौरान किया था.
वो खौफनाक मंजर, जिसने सब कुछ बदल दिया
इस कहानी की शुरुआत एक ऐसी घटना से हुई जिसने पूरी दुनिया के क्रिकेटरों को हिलाकर रख दिया था. इंग्लैंड के गेंदबाज ल्यूक फ्लेचर अपनी ही गेंद पर एक जोरदार स्ट्रेट ड्राइव का शिकार हुए. गेंद सीधे उनके सिर पर लगी और वह मैदान पर ही गिर पड़े. वह मंजर इतना डरावना था कि साथी खिलाड़ियों की आंखों में आंसू आ गए थे. इसी डर और भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए एक नए आविष्कार ने जन्म लिया.
वॉर्न बर्न्स: सुरक्षा का नया चेहरा
साल 2017 में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज वॉर्न बर्न्स ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया. उन्होंने एक विशेष प्रकार का हेलमेट पहनकर गेंदबाजी करना शुरू किया. बर्न्स के गेंदबाजी एक्शन में एक ‘फॉलो-थ्रू’ था जहां उनका सिर गेंद फेंकने के तुरंत बाद नीचे की ओर झुक जाता था, जिससे वे बल्लेबाज़ के सीधे प्रहार के प्रति बिल्कुल असुरक्षित हो जाते थे. इस हेलमेट को खुद बर्न्स ने अपने कोच के साथ मिलकर डिजाइन किया था. यह हेलमेट पारंपरिक बल्लेबाजी हेलमेट से अलग था यह हल्का था, इसका ऊपरी हिस्सा खुला था ताकि हवा का प्रवाह बना रहे, लेकिन चेहरे और सिर के अगले हिस्से पर एक मजबूत ग्रिल थी.
टी20 का ‘पावर’ गेम और जान का जोखिम
आज के दौर में जिस तरह से भारी-भरकम बल्ले और जबरदस्त पावर हिटिंग का बोलबाला है, एक गेंदबाज के पास गेंद फेंकने के बाद प्रतिक्रिया देने के लिए एक सेकंड से भी कम का समय होता है. बर्न्स का यह कदम भले ही उस समय चर्चा और मजे का विषय बना हो, लेकिन इसने एक गंभीर बहस छेड़ दी. क्या भविष्य में सभी गेंदबाजों के लिए हेलमेट अनिवार्य होगा? क्रिकेट सिर्फ कौशल का खेल नहीं रहा, अब यह सुरक्षा और तकनीक की जंग भी बन चुका है. वॉर्न बर्न्स का वो ‘हेलमेट अवतार’ आज भी हमें याद दिलाता है कि खेल के जुनून के बीच खिलाड़ी की जान सबसे ऊपर है.


