3.4 C
Munich

होर्मुज बवाल के बीच सुंडा स्‍ट्रेट का जिक्र, हिन्‍द महासागर में भारत के लिए कितना अहम – where is sunda strait india gateway to east asia Indian ocean

Must read


Sunda Strait: होर्मुज स्‍ट्रेट में जारी बवाल और इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति सार्वजनिक की है. नेवी चीफ एडमिरल डीके त्रिपाठी द्वारा हाल ही में जारी इस रणनीति में होर्मुज को प्रमुख ‘एरिया ऑफ इंटरेस्ट’ यानी प्राथमिक क्षेत्र बताया गया है. इसके साथ ही कई अन्य अहम समुद्री मार्गों (चोक पॉइंट्स) पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है. नेवी की रणनीति के अनुसार, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के ये समुद्री चोक पॉइंट्स वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर अत्यधिक प्रभाव डालते हैं. इन महत्वपूर्ण मार्गों में केप ऑफ गुड होप, मोजाम्बिक चैनल, बाब-एल-मंदेब, स्वेज नहर, होर्मुज जलडमरूमध्य, मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य, सुंडा स्‍ट्रेट, लोम्बोक, ओम्बाई और वेटार जलडमरूमध्य शामिल हैं. नौसेना ने खासतौर पर मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य के महत्व को रेखांकित किया है, जो हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर से जोड़ते हैं. यह मार्ग फारस की खाड़ी से पूर्वी एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रों तक पहुंचने का सबसे छोटा समुद्री रास्ता है, जिससे इसका रणनीतिक महत्व और बढ़ जाता है. यहां नेवी द्वारा सुंडा स्‍ट्रेट का जिक्र करना अपने आप में काफी अहम है.

इसके अलावा सुंडा जलडमरूमध्य को मलक्का के विकल्प के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसकी सीमाएं भी हैं. यह मार्ग लगभग 50 नॉटिकल मील (लगभग 93 किलोमीटर) लंबा और 15 नॉटिकल मील (लगभग 28 किलोमीटर) चौड़ा है, लेकिन यहां की गहराई, तेज धाराएं और नेविगेशन यानी नौवहन संबंधी जोखिम बड़े जहाजों के लिए चुनौतीपूर्ण बनाते हैं. जावा (पूर्व) और सुमात्रा के बीच स्थित सुंडा स्‍ट्रेट जावा सागर (प्रशांत महासागर) को इंडियन ओशन यानी हिन्‍द महासागर से कनेक्‍ट करता है. ऐसे में तमाम कठिनाइयों के बावजूद सुंडा जलडमरूमध्‍य का रणनीतिक महत्‍व बढ़ जाता है. ईरान जंग की वजह से होर्मुज स्‍ट्रेट के बाधित होने से हालात और भी संवेदनशील हो गए हैं. दुनिया के तमाम देश ट्रेड के लिए अल्‍टरनेटिव रूट की तलाश में जुटे हैं. भारत के लिए सुंडा स्‍ट्रेट का महत्‍व आर्थिक से ज्‍यादा सामरिक और रणनीतिक है. हिन्‍द महासागर में चीन की गतिविधियां पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई हैं. दूसरी तरफ पूर्वी एशियाई देशों के साथ चीन का टकराव वाला रिश्‍ता है, ऐसे में इन देशों के साथ सहयोग को बढ़ाते हुए भारत सुंड स्‍ट्रेट का बेहतर इस्‍तेमाल कर सकता है. इसके अलावा ओम्बाई और वेटार जलडमरूमध्य (जो इंडोनेशियाई द्वीपों के बीच स्थित हैं) भी वैकल्पिक मार्ग के रूप में मौजूद हैं, लेकिन दूरी अधिक होने के कारण इनका उपयोग सामान्य तौर पर कम ही किया जाता है.

सुंडा स्‍ट्रेट भारत के लिए न केवल ईस्‍ट एशिया के लिए गेटवे साबित हो सकता है, बल्कि हिन्‍द महासागर में चीन की गतिविधियों पर निगरानी रखने और ड्रैगन के मंसूबों पर लगाम लगाने में भी कारगर साबित हो सकता है. (फाइल फोटो/Reuters)

हिन्‍द महासागर के चोक प्‍वाइंट्स

  • Strait of Hormuz में जारी नाकेबंदी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच नौसेना ने अपनी नई समुद्री सुरक्षा रणनीति सार्वजनिक की है.
  • होर्मुज प्राइमरी एरिया घोषित: नौसेना प्रमुख Admiral D K Tripathi द्वारा जारी दस्तावेज में होर्मुज को प्राथमिक क्षेत्र बताया गया है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील मार्गों में शामिल है.
  • IOR के प्रमुख चोक पॉइंट्स चिन्हित: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में कई अहम समुद्री मार्गों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है, जिनमें Cape of Good Hope, Mozambique Channel, Bab-el-Mandeb, Suez Canal, Strait of Malacca और Singapore Strait शामिल हैं.
  • मलक्का-सिंगापुर का वैश्विक महत्व: मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर से जोड़ते हैं, जिससे यह फारस की खाड़ी से पूर्व एशिया तक का सबसे छोटा समुद्री मार्ग बनता है.
  • वैकल्पिक मार्ग भी चिन्हित: Sunda Strait को मलक्का का विकल्प बताया गया है, लेकिन कम गहराई, तेज धाराओं और नेविगेशन खतरों के कारण बड़े जहाज यहां से कम गुजरते हैं.
  • ओम्बाई और वेटर स्ट्रेट की सीमाएं: Ombai Strait और Wetar Strait भी विकल्प के तौर पर मौजूद हैं, लेकिन दूरी अधिक होने के कारण इन्हें आमतौर पर प्राथमिक मार्ग नहीं माना जाता.
  • वैश्विक व्यापार पर असर: इन चोक पॉइंट्स पर किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर असमान रूप से बड़ा प्रभाव डालती है, इसलिए भारतीय नौसेना ने इन क्षेत्रों में निगरानी और रणनीतिक तैयारी बढ़ाने पर जोर दिया है.

सुंडा स्‍ट्रेट क्‍यों अहम?

इंडोनेशिया का सुंडा जलडमरूमध्य (Sunda Strait) एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो वैश्विक व्यापार और सामरिक दृष्टि से खास स्थान रखता है. यह जलडमरूमध्य जावा सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है और सुमात्रा (पश्चिम) तथा जावा (पूर्व) द्वीपों के बीच स्थित है. इसकी चौड़ाई लगभग 16 से 70 मील के बीच है, लेकिन कई हिस्सों में यह उथला और चुनौतीपूर्ण है, जिससे बड़े जहाजों के लिए यहां से गुजरना कठिन हो जाता है. सुंडा जलडमरूमध्य को मलक्का जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर देखा जाता है, खासकर एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापारिक मार्गों के संदर्भ में. हालांकि, इसकी भौगोलिक जटिलताओं (जैसे तेज धाराएं, उथले क्षेत्र और सक्रिय ज्वालामुखी) इसे कम आकर्षक बनाती हैं. यही कारण है कि बड़े जहाज अक्सर लोम्बोक जलडमरूमध्य का रुख करते हैं, जो अपेक्षाकृत गहरा और सुरक्षित माना जाता है.

सुंडा स्‍ट्रेट क्या है और यह कहां स्थित है?
सुंडा जलडमरूमध्य इंडोनेशिया में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो जावा सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है. यह सुमात्रा (पश्चिम) और जावा (पूर्व) द्वीपों के बीच स्थित है और इसकी चौड़ाई लगभग 16 से 70 मील तक है.

यह जलडमरूमध्य रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापार के लिए एक अहम समुद्री मार्ग है. खासकर Strait of Malacca के विकल्प के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है, हालांकि इसकी भौगोलिक चुनौतियाँ इसे सीमित बनाती हैं.

इसकी भौगोलिक विशेषताएं और जोखिम क्या हैं?
यह क्षेत्र ज्वालामुखीय द्वीपों से घिरा है, जिनमें Krakatoa के अवशेष और Anak Krakatau शामिल हैं. यहां तेज धाराएं और उथले क्षेत्र हैं, जिससे बड़े जहाजों के लिए नेविगेशन मुश्किल हो जाता है.

इस क्षेत्र से जुड़े प्रमुख ऐतिहासिक घटनाक्रम कौन से हैं?
साल 1883 में क्राकाटोआ ज्वालामुखी का विस्फोट इतिहास के सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक था, जिससे भारी सुनामी आई. इसके अलावा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 में Battle of Sunda Strait भी यहीं लड़ा गया था.

क्या इस क्षेत्र में विकास से जुड़े कोई प्रस्ताव रहे हैं?
जावा और सुमात्रा को जोड़ने के लिए एक पुल बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन 2014 में इंडोनेशिया सरकार ने इसे रद्द कर दिया और समुद्री आधारित परिवहन को प्राथमिकता दी.सुंडा जलडमरूमध्य अपनी भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद वैश्विक समुद्री व्यापार, इतिहास और ज्वालामुखी गतिविधियों के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है.

पुल बनाने की योजना क्‍यों ठंडे बस्‍ते में डाली?

यह क्षेत्र ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है. 1883 में क्राकाटोआ ज्वालामुखी का विस्फोट आधुनिक इतिहास की सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक था. इस विस्फोट से उत्पन्न सुनामी ने हजारों लोगों की जान ली और व्यापक तबाही मचाई. आज भी अनाक क्राकाटोआ जैसे सक्रिय ज्वालामुखी इस क्षेत्र को संवेदनशील बनाते हैं. इतिहास में भी यह जलडमरूमध्य अहम रहा है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मार्च 1942 में यहां सुंडा जलडमरूमध्य का युद्ध लड़ा गया, जिसमें मित्र देशों और जापानी सेनाओं के बीच भीषण संघर्ष हुआ. इस लड़ाई में USS Houston और HMAS Perth जैसे युद्धपोत डूब गए थे. इंडोनेशियाई सरकार ने कभी जावा और सुमात्रा को जोड़ने के लिए इस जलडमरूमध्य पर पुल बनाने की योजना पर विचार किया था, लेकिन 2014 में इसे स्थगित कर दिया गया. सरकार ने इसके बजाय समुद्री परिवहन (Maritime Transport) आधारित विकास को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया. सुंडा जलडमरूमध्य भौगोलिक, ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, हालांकि इसकी प्राकृतिक चुनौतियां इसे जटिल भी बनाती हैं.

इंडियन नेवी के कदम के क्‍या संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज में किसी भी प्रकार का अवरोध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है. ऐसे में भारतीय नौसेना द्वारा इन समुद्री चोक पॉइंट्स पर रणनीतिक नजर रखना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन के लिए भी अहम है. नौसेना की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है, जब वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध व्यापार को लेकर चिंता बढ़ रही है. इससे स्पष्ट है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है.



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article