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Cluster Beans Cultivation : गोंडा का ये किसान ने ग्वार फली (क्लस्टर बीन्स) की खेती में जुटा है, जो पहले गेहूं और धान की खेती करता था, लेकिन कम मुनाफे के कारण उसने कुछ नया करने का फैसला किया. लोकल 18 से प्रगतिशील किसान राम सबद मौर्य बताते हैं कि ग्वार फली की खेती में लागत भी ज्यादा नहीं आती. इसमें पानी की जरूरत कम होती है और यह फसल कम समय में तैयार हो जाती है. अच्छे किस्म के बीज, समय पर सिंचाई और देखभाल से फसल अच्छी हुई.
गोंडा. यूपी के गोंडा जिले में खेती के तरीके तेजी से बदल रहे हैं. अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नई और नकदी फसलों की ओर भी ध्यान दे रहे हैं. इसी कड़ी में गोंडा के एक किसान ने ग्वार फली (क्लस्टर बीन्स) की खेती शुरू की है. ये किसान पहले गेहूं और धान की खेती करते थे, लेकिन कम मुनाफे के कारण उन्होंने कुछ नया करने का फैसला किया. जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने ग्वार फली की खेती शुरू की, जो अब उनके लिए फायदेमंद साबित हो रही है. लोकल 18 से गोंडा के प्रगतिशील किसान राम सबद मौर्य बताते हैं कि उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई की. उसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए तैयारी की लेकिन नौकरी नहीं मिल पाई. फिर उन्होंने 15 साल तक दूसरे शहर में रहकर निजी कंपनियों में काम किया. एक दिन सोचा कि क्यों न हम घर पर रहे और खेती किसानी करें. घर आए और खेती शुरू कर दी. इस समय ग्वार फली उगा रहे हैं.
कहां से आया आइडिया
किसान राम सबद मौर्य बताते हैं कि पहले हम पारंपरिक खेती करते थे. फिर पानी संस्थान वालों ने इसकी खेती का आइडिया दिया. फिर मैंने पांच बिस्वा में ग्वार फली की खेती की शुरू की. राम सबद मौर्य बताते हैं कि ग्वार फली की खेती में लागत भी ज्यादा नहीं आती. इसमें पानी की जरूरत कम होती है. 120 से 140 दिनों में इसकी फसल तैयार हो जाती है.
ग्वार फली की तुड़ाई दो से ढाई महीने तक होती है. कुल मिलाकर या फसल लगभग 5 महीने की है. राम सबद को शुरुआत में थोड़ी दिक्कत जरूर हुई, लेकिन कृषि विभाग और एक्सपर्ट की सलाह से उन्होंने सही तरीके अपनाए. अच्छे किस्म के बीज, समय पर सिंचाई और देखभाल से फसल अच्छी हुई. अब उनके खेत में ग्वार फली की फसल लहलहा रही है. कई किसान उनसे जानकारी लेने पहुंच रहे हैं और खुद भी इस खेती को अपनाने की सोच रहे हैं.
राम सबद मौर्य बताते हैं कि है ग्वार फली की खेती गोंडा जैसे इलाके के लिए काफी उपयुक्त है. यहां की जलवायु और मिट्टी इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है. 5 बिस्वा में 1200 से 1500 रुपये की लागत लगी है. 60 से 100 रुपये प्रति किलों के बीच बिक जाती है. पांच बिस्वा में लगभग पांच कुंटल पैदावार होने की उम्मीद है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें


