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कपिल देव क्रीज पर आए, डोनाल्ड ने एक ऐसी घातक यॉर्कर फेंकी कि कपिल देव खुद को बचाने के चक्कर में पिच पर औंधे मुंह गिर पड़े. पूरे स्टेडियम में मौजूद दक्षिण अफ्रीकी फैंस ठहाके मारकर हँसने लगे उन्हें लगा कि भारतीय टीम अब घुटने टेक चुकी है. लेकिन दुनिया ने शायद उस शेर को कम आंकने की गलती कर दी थी.
1992 के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर कपिल देव ने खेली थी 129 रनों की पारी, पहली गेंद पर मुंह के बल गिर गए थे.
नई दिल्ली. यह कहानी है उस ‘हरियाणा हरिकेन’ की, जिसने अफ्रीकी धरती पर गिरकर संभलना और फिर दहाड़ना सिखाया.साल 1992, पोर्ट एलिजाबेथ का सेंट जॉर्ज पार्क मैदान. भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सीरीज का तीसरा टेस्ट मैच. अफ्रीकी तेज गेंदबाज अपनी रफ्तार से आग उगल रहे थे और भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर रही थी. स्कोरबोर्ड पर सिर्फ 31 रन थे और 6 दिग्गज बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे.
तभी मैदान पर एंट्री होती है महान कपिल देव की. वो खिलाड़ी जिसके कंधे पर वर्ल्ड कप का ताज था जो शेरों के जबड़े से जीत को छीनकर लाने में भरोसा करता था. जो ऐसा परिस्थिति में पहले भी कई बार भारत के लिए संकटमोचक साबित हुआ था. 1983 वर्ल्ड कप में जिम्बाबवे खिलाफ 17 रन पर 5 विकेट गिरे थे तो यहां 31 रन पर 6 विकेट. फिर वो हुआ जो ट्रेंटब्रिज ने देखा थ. इस पारी की पहली गेंद पर जो हुआ शायद उसने कपिल देव को जगा दिया था.
वो गेंद जिसने कपिल को गिरा दिया
एलन डोनाल्ड उस वक्त दुनिया के सबसे खौफनाक गेंदबाजों में से एक थे. जैसे ही कपिल क्रीज पर आए, डोनाल्ड ने एक ऐसी घातक यॉर्कर फेंकी कि कपिल देव खुद को बचाने के चक्कर में पिच पर औंधे मुंह गिर पड़े. पूरे स्टेडियम में मौजूद दक्षिण अफ्रीकी फैंस ठहाके मारकर हँसने लगे उन्हें लगा कि भारतीय टीम अब घुटने टेक चुकी है. लेकिन दुनिया ने शायद उस शेर को कम आंकने की गलती कर दी थी. उस हंसी ने कपिल के भीतर की आग को हवा दे दी. इसके बाद जो हुआ, उसे आज भी दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेट इतिहास में ‘कपिल का पलटवार’ कहा जाता है.
कपिल का पलटवार
कपिल ने एलन डोनाल्ड, क्रेग मैथ्यूज और ब्रायन मैकमिलन जैसे खतरनाक अटैक को खिलौना बना दिया
उन्होंने मैकमिलन की गेंद पर जो ‘कवर ड्राइव’ लगाए, वो किसी पेंटिंग की तरह खूबसूरत थे. डोनाल्ड की रफ्तार का जवाब उन्होंने अपने ट्रेडमार्क ‘नटराज शॉट’ से दिया और स्पिनर्स को तो उन्होंने क्रीज से बाहर निकलकर सीधा स्टैंड्स में पहुँचाया. जहाँ भारतीय टीम 50 रन भी मुश्किल लग रही थी, वहां कपिल ने अकेले दम पर 129 रनों की तूफानी पारी खेली उनकी इस पारी ने न सिर्फ भारत की लाज बचाई, बल्कि अफ्रीकी गेंदबाजों का खौफ भी खत्म कर दिया.
वो 129 रन सिर्फ एक स्कोर नहीं था, वो जवाब था उन लोगों को जो एक लीजेंड के गिरने पर हँसे थे. कपिल देव ने साबित कर दिया कि असली चैंपियन वो नहीं जो कभी गिरता नहीं, बल्कि वो है जो गिरकर उठे और खेल का नक़्शा ही बदल दे.


